मंगलवार, 30 सितंबर 2008

स्वागत है माँ का

मेहमानों की आवाजाही से हमारे यहां तो रौनक लगी रही। पहले तो गणपतजी पधारे, वैसे तो उनसे संपर्क बना रहता है पर उनका आना साल में एक बार ही हो पाता है। काफी व्यस्त रहते हैं। उनकी आवभगत में समय का पता ही नहीं चल पाया। उनके जाने के दूसरे दिन ही पितरों का आगमन हो गया, कल ही उनकी विदाई हुई और आज माँ के स्वागत का सौभाग्य प्राप्त हो गया। अपनी तो मौजां ही मौजां।
आज से नवरात्र पर्व शुरु हो रहे हैं। आप सब को भी माँ का ढ़ेरों- ढ़ेर प्यार और आशीष मिले। इन नौ दिनों में माँ के नौ स्वरुपों की पूजा होती है। आज पहला दिन है और आज माँ का "शैलपुत्री" के रूप में पूजन होता है। पर्वत राज हिमालय के यहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका यह नाम पड़ा। इनका वाहन वृषभ है। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित रहता है। इनका विवाह भी भगवान शिवजी से ही हुआ। नव दुर्गाओं में प्रथम, माँ शैलपुत्री दुर्गा का महत्व और शक्तियां अनंत मानी जाती हैं। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योग साधना का शुभारंभ होता है।
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वन्दे वाच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।
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5 टिप्‍पणियां:

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

अच्‍छी जानकारी दी आपने धन्‍यवाद
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी
जय माता दी

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

दुर्गा पूजा की ढेर सारी बधाई :) जय माता दी

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत अच्‍छी जानकारी दी आपने
धन्‍यवाद

Udan Tashtari ने कहा…

नवरात्रि की हार्दिक मंगलकामनाऐं.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

नवरात्र के पावन पर्व पर आपको परिवार सहित मँगल कामनाएँ !
जय माता दी...