गांव - अंजनी, जिला - मैनपुरी, राज्य - उत्तर प्रदेश।
हनुमानजी की माता अंजनी के नाम पर बसे इस गांव में दूध बेचना पाप समझा जाता है। आज जबकी देश में पानी भी खरीद कर पीना पडता है, इस दो हजार भैंसों वाले गांव में यदि कोई चोरी-छिपे दूध बेचता पाया जाता है तो उसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पडती है नहीं तो गांव छोड कर जाना पडता है। हजारों लीटर दूध का उत्पादन करने वाला यह गांव सार्वजनिक उत्सवों या कार्यक्रमों में मुफ़्त दूध दे उस जमाने की याद ताजा करता रहता है, जब कहा जाता था कि इस देश में दूध की नदियां बहा करती थीं। यहां की आबादी मेँ 99 प्रतिशत यदुवंशियों का है जो दूध बेचने को बेटा बेचने जैसा जघन्य काम मानते हैं। यह गांव आर्थिक रूप से काफी संपन्न है।
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नाम - जब्बार हुसैन , उम्र - 66 साल, निवास - फ़तहपुर बिंदकी।
लगन हो तो हुसैन साहब की तरह। 42 बार हाईस्कूल की परीक्षा में फ़ेल हो जाने के बावजूद इन्होंने हिम्मत नहीं हारी है और एक बार फिर ये पूरे जोशोखरोश के साथ परीक्षा की तैयारियों में जुटे हुए हैं। उनकी जिद है कि वह हाईस्कूल की परीक्षा जरूर पास करेंगे वह भी बिना गलत तरीकों को अपनाये। इस जनून के चलते उनकी बीवी ने उनसे तलाक ले लिया है पर हुसैन साहब अपनी धुन पर कायम हैं। इसके चलते उन्होंने जूतों की दुकान की, ट्युशन लगाई, कडी मेहनत की। उनके हौसले बुलंद हैं, वह एक-न-एक दिन अपनी मंजिल जरूर पा लेंगे। आमीन ।
हनुमानजी की माता अंजनी के नाम पर बसे इस गांव में दूध बेचना पाप समझा जाता है। आज जबकी देश में पानी भी खरीद कर पीना पडता है, इस दो हजार भैंसों वाले गांव में यदि कोई चोरी-छिपे दूध बेचता पाया जाता है तो उसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पडती है नहीं तो गांव छोड कर जाना पडता है। हजारों लीटर दूध का उत्पादन करने वाला यह गांव सार्वजनिक उत्सवों या कार्यक्रमों में मुफ़्त दूध दे उस जमाने की याद ताजा करता रहता है, जब कहा जाता था कि इस देश में दूध की नदियां बहा करती थीं। यहां की आबादी मेँ 99 प्रतिशत यदुवंशियों का है जो दूध बेचने को बेटा बेचने जैसा जघन्य काम मानते हैं। यह गांव आर्थिक रूप से काफी संपन्न है।
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नाम - जब्बार हुसैन , उम्र - 66 साल, निवास - फ़तहपुर बिंदकी।
लगन हो तो हुसैन साहब की तरह। 42 बार हाईस्कूल की परीक्षा में फ़ेल हो जाने के बावजूद इन्होंने हिम्मत नहीं हारी है और एक बार फिर ये पूरे जोशोखरोश के साथ परीक्षा की तैयारियों में जुटे हुए हैं। उनकी जिद है कि वह हाईस्कूल की परीक्षा जरूर पास करेंगे वह भी बिना गलत तरीकों को अपनाये। इस जनून के चलते उनकी बीवी ने उनसे तलाक ले लिया है पर हुसैन साहब अपनी धुन पर कायम हैं। इसके चलते उन्होंने जूतों की दुकान की, ट्युशन लगाई, कडी मेहनत की। उनके हौसले बुलंद हैं, वह एक-न-एक दिन अपनी मंजिल जरूर पा लेंगे। आमीन ।