संता, बंता तथा कंता पुलिस में भर्ती होने गये। उनको अपराधियों की शिनाख्त करने के लिये एक फोटो दिखाई गयी जिसमें एक आदमी का बगल से खिंचा गया चित्र था। पहले कंता से पूछा गया कि इस आदमी की क्या खासियत है? इसे कैसे पहचानोगे? कंता बोला, अरे यह तो बहुत आसान है। इस आदमी का एक ही कान है। इसे तुरंत पहचान लूंगा। सामने वाले ने अपना सिर पीट लिया। इसके बाद बंता को बुला कर उससे भी वही सवाल पूछा गया, उसने भी झट से जवाब दिया कि एक आंख वाले को पकड़ने और पहचानने में कोई दिक्कत नहीं है। साक्षात्कार लेने वाला झल्ला कर बोला, कैसे बेवकूफ हो तुम्हें इतना भी नहीं पता कि यह साइड पोज है। चलो भागो यहां से। चले आते हैं पुलिस में काम पाने। अब संता की बारी थी। उसको बुला कर भी वही सवाल पूछा गया, कि इस आदमी को कैसे पहचानोगे? संता ने गौर से फोटो देखी और बोला, मैं इसे पहचान लूंगा, क्योंकि इसने कान्टेक्ट लेंस लगाया हुआ है। साक्षात्कार लेने वाला हैरान। यह बात तो उसे भी मालुम नहीं थी। तुरंत फाइलें खंगाली गयीं तो पाया गया कि संता का कहना सही है। सबने उसकी सूझ-बूझ की बड़ी प्रशंसा की। फिर ऐसे ही उससे पूछ लिया गया कि उसे यह बात कैसे पता चली। संता बोला, जी यह तो कामन सेंस की बात है। एक आंख वालों की नज़र कमजोर होती है और इस बेचारे का कान भी एक ही है तो यह चश्मा तो पहन नहीं सकता। जाहिर है यह कांटेक्ट लेंस ही लगाता होगा।
**********************************************
एक बार संता पर भगवान की कृपा हो गयी। भगवान ने कहा कि तुम्हें दो चीजों में से कोई एक चीज मिल सकती है, या तो तुम सारे जमाने की अक्ल ले लो या फिर दस करोड़ रुपये। संता ने अक्ल मांग ली। प्रभू ने उसकी इच्छा पूरी कर दी। दूसरे दिन वह उदास बैठा था। उसकी बीवी ने जब उसकी उदासी का कारण पूछा तो वह बोला, 'भागवान मुझे रुपये लेने चाहिये थे'।
**********************************************
एक बार पागलखाने के डाक्टरों को लगा कि उनके तीन मरीज ठीक हो गये हैं। फिर भी उन्हें घर भेजने के पहले एक टेस्ट कर लेना उचित समझा गया। तीनों को एक खाली स्विंमींग पूल पर ले जाकर डाक्टर ने कहा, पूल में छलांग लगाओ। यह सुनते ही दो पागल कूद पड़े और चोट खा बैठे। डाक्टर ने तीसरे की तरफ देख कहा कि तुम बिल्कुल ठीक हो गये हो लगता है पर यह बताओ कि तुम क्यूं नहीं कूदे?
मुझे तैरना कहां आता है। तीसरे ने मासूमियत के साथ जवाब दिया।
इस ब्लॉग में एक छोटी सी कोशिश की गई है कि अपने संस्मरणों के साथ-साथ समाज में चली आ रही मान्यताओं, कथा-कहानियों को, बगैर किसी पूर्वाग्रह के, एक अलग नजरिए से देखने, समझने और सामने लाने की ! इसके साथ ही यह कोशिश भी रहेगी कि कुछ अलग सी, रोचक, अविदित सी जानकारी मिलते ही उसे साझा कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके ! अब इसमें इसको सफलता मिले, ना मिले, प्रयास तो सदा जारी रहेगा !
रविवार, 9 अगस्त 2009
शुक्रवार, 7 अगस्त 2009
भेडिए की दादागिरी
एक बहुत पुरानी कहानी है, पर यह पूरी तरह आज अमेरिका के चरित्र को उजागर करती है :-
एक मेमना एक झरने से पानी पी रहा था। तभी उससे काफी उंचाई पर एक भेडिया कहीं से घूमता-घामता आ पहुंचा। मेमने को देखते ही उसके मुंह में पानी आ गया और वह उसे मारने का बहाना बनाते हुए मेमने को डांटते हुए बोला, अरे बेवकूफ तू मेरे पीनेवाले पानी को जूठा क्यों कर रहा है? बेचारे मेमने की हालत तो भेड़िये को देख ऐसे ही खराब हो गयी थी, फिर भी उसने साहस कर कहा, कि पानी तो ऊपर से नीचे की ओर आ रहा है, मैं उसे जूठा कैसे कर सकता हूं। यह सुन भेड़िया एकबार तो सकपका गया पर उसे तो मेमने को अपना शिकार बनाना था। झुंझला कर भेड़िये ने कहा, चलो ठीक है पर यह तो बता कि पिछले साल तूने मुझे गाली क्यूं दी थी। मेमना कुछ संभल गया था। उसने जवाब दिया, मैं पिछले साल आपको गाली कैसे दे सकता था, मैं तो अभी आठ महीने का ही हूं। अपना वार खाली जाते देख भेड़िया बुरी तरह गुस्से में आ गया और बोला, साले तूने नहीं तो तेरे बाप ने मुझे गाली दी होगी। इतना कह भेड़िये ने झपट कर मेमने को दबोच लिया और उसका काम तमाम कर दिया।
आज दुनिया में अमेरिका का रवैया भी उस भेड़िये से मिलता-जुलता है। जो भी उसके खिलाफ खड़ा होने या उसकी बात ना मानने की जुर्रत करता है, उसका हश्र कुछ-कुछ उस गरीब मेमने सा ही हो जाता है।
सोमवार, 3 अगस्त 2009
एक "बोगस" शब्द का जन्म
आजकल हमारे यहां नकली नोटों ने अफरातफरी मचा रखी है। पर इन्हीं नकली नोटों ने वर्षों पहले अंग्रेजी डिक्शनरी को एक नया शब्द दिया था। "BOGUS"
बात 1827 की है। अमेरिकी सरकार भी नकली नोटों के चलन से परेशान थी। रोज कहीं ना कहीं छापे पड़ते थे, लोग पकड़े जाते थे। ऐसे ही पुलिस ने एक जगह छापा मार कर नकली नोट छापने वालों को तो पकड़ा ही उनका सारा सामान भी तहस-नहस कर दिया। उनकी नोट छापने वाली मशीन को भी सड़क पर फेंक दिया। जिसे देखने के लिये भीड़ एकत्रित हो गयी। मशीन की बनावट कुछ अजीब सी थी जिसे देख कर भीड़ में से किसी ने कह दिया कि क्या 'ओगस-बोगस' सी मशीन है। दूसरे दिन जब अखबार में खबर छपी तो उसने मशीन का नाम ही बोगस प्रेस लिख दिया। तब ही से यह शब्द अस्तित्व में आया और आज इसका व्यापक रूप मे इस्तेमाल हो रहा है।
पोस्ट बोगस तो नहीं है ? (-:
बात 1827 की है। अमेरिकी सरकार भी नकली नोटों के चलन से परेशान थी। रोज कहीं ना कहीं छापे पड़ते थे, लोग पकड़े जाते थे। ऐसे ही पुलिस ने एक जगह छापा मार कर नकली नोट छापने वालों को तो पकड़ा ही उनका सारा सामान भी तहस-नहस कर दिया। उनकी नोट छापने वाली मशीन को भी सड़क पर फेंक दिया। जिसे देखने के लिये भीड़ एकत्रित हो गयी। मशीन की बनावट कुछ अजीब सी थी जिसे देख कर भीड़ में से किसी ने कह दिया कि क्या 'ओगस-बोगस' सी मशीन है। दूसरे दिन जब अखबार में खबर छपी तो उसने मशीन का नाम ही बोगस प्रेस लिख दिया। तब ही से यह शब्द अस्तित्व में आया और आज इसका व्यापक रूप मे इस्तेमाल हो रहा है।
पोस्ट बोगस तो नहीं है ? (-:
रविवार, 2 अगस्त 2009
माँ की खिल्ली उडाता एक विज्ञापन
सीन, एक :- एक लड़की घर से निकल रही है। पीछे से आवाज आती है, बाहर बाल खुले मत छोड़ना। तभी वह बाला अपने सारे बालों को लहरवा देती है।
सीन, दो :- वही कन्या आफिस में प्रवेश करती है। पीछे से हिदायत भरी आवाज सुनाई देती है, आफिस में बाल खुले मत रखना। सुनते ही सर को झटका दे वह अपने सारे बालों को आजाद कर देती है।
सीन, तीन :- मां अपने सामने बैठी अपनी लाड़ली के बालों को निहारते हुए फूली नहीं समाती, अपनी सलाहों पर। उधर लड़की मुस्कुराती है, माँ के भोलेपन और अपनी चतुराई पर।
यह एक शैंपू का विज्ञापन है। पता नहीं आज अपना सामान बेचने के लिये, अपना उत्पाद घर-घर पहुंचाने के लिये ज्यादातर कंपनियां मां-बाप को अज्ञानी, समय से पिछड़ा हुआ दिखाने पर क्यों तुली रहती हैं। ये कैसी सोच है? ऐसा भी तो हो सकता था कि मां कहती, बेटा हम फलाना शैंपू प्रयोग में लाते आ रहे हैं, इससे ना कभी मुझे बालोँ की चिंता करनी पड़ी ना तुम्हें पड़ेगी। पर विज्ञापन बनाने वाले अधकचरे दिमागों में यह बात गहराई तक पैठ गयी है कि अवहेलना, उद्दंड़ता, लापरवाही ही आज सफलता का मापदंड़ हो गयी है।
पर कौन और कैसे कोई समझाये किसी को कि यदि क्रीमों से ही इंसान सुंदर और गोरा-चिट्टा होने लग जाता तो आज अफ़्रीका में कोई काले रंग का ना बचा होता। (-:
सीन, दो :- वही कन्या आफिस में प्रवेश करती है। पीछे से हिदायत भरी आवाज सुनाई देती है, आफिस में बाल खुले मत रखना। सुनते ही सर को झटका दे वह अपने सारे बालों को आजाद कर देती है।
सीन, तीन :- मां अपने सामने बैठी अपनी लाड़ली के बालों को निहारते हुए फूली नहीं समाती, अपनी सलाहों पर। उधर लड़की मुस्कुराती है, माँ के भोलेपन और अपनी चतुराई पर।
यह एक शैंपू का विज्ञापन है। पता नहीं आज अपना सामान बेचने के लिये, अपना उत्पाद घर-घर पहुंचाने के लिये ज्यादातर कंपनियां मां-बाप को अज्ञानी, समय से पिछड़ा हुआ दिखाने पर क्यों तुली रहती हैं। ये कैसी सोच है? ऐसा भी तो हो सकता था कि मां कहती, बेटा हम फलाना शैंपू प्रयोग में लाते आ रहे हैं, इससे ना कभी मुझे बालोँ की चिंता करनी पड़ी ना तुम्हें पड़ेगी। पर विज्ञापन बनाने वाले अधकचरे दिमागों में यह बात गहराई तक पैठ गयी है कि अवहेलना, उद्दंड़ता, लापरवाही ही आज सफलता का मापदंड़ हो गयी है।
पर कौन और कैसे कोई समझाये किसी को कि यदि क्रीमों से ही इंसान सुंदर और गोरा-चिट्टा होने लग जाता तो आज अफ़्रीका में कोई काले रंग का ना बचा होता। (-:
शनिवार, 1 अगस्त 2009
बरसात में सजीव हो उठता है मांडू
मुगल सेनापति बाज बहादुर और रूपमति की प्रेम गाथाओं को अपने दामन में समेटे, मध्यप्रदेश के धार जिले में विंध्य पर्वत की गोद में स्थित 22किमी के क्षेत्र में बसा मांडव या मांडवगढ या मांडू आज भी ऐसी-ऐसी इमारतों और प्राकृतिक दृष्यों को सहेजे खड़ा है, जो वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य की अनुपम मिसाल हैं। 1405-1434 में होशंग शाह के राज्य में यह अपने चर्मोत्कर्ष पर था। उसने ही स्वतंत्र मांडव राज्य की स्थापना की थी। परंतु मुगलों के आगमन से ही इसका पराभव शुरु हो गया था। परंतु आज भी इसका वैभव देख इसकी सुंदरता का अंदाज आसानी से लग जाता है। बरसात के दिनों में तो यहां स्वर्ग उतर आता है। यहां की वादियां, घाटियां, चारों ओर फैली हरियाली मानो जिवंत हो पर्यटकों को एक जादुई दुनियां में ले जाती है।
यहां का सबसे बड़ा आकर्षण, झीलों के बीच बना जहाज महल, सुंदरता का बेजोड़ नमूना है। इस पर बने रानी रूपमती के झरोखे से, जहां पर्वत श्रृंखला खत्म हो जाती है और सामने खुला मैदान नजर आता है। दूर नर्मदा नदी एक लकीर की तरह नजर आती है। कहते हैं कि बिना नर्मदा के दर्शन किये रूपमती जल ग्रहण नहीं करती थी। इसीलिये बाज बहादुर ने यहां नर्मदा के दर्शन हेतु यह झरोखा बनवाया था।
मांडू अपने महलों के लिये विख्यात है यहां देखने लायक बहुत सी इमारतें हैं। जिनमें बाज बहादुर महल, हिंडोला महल, मुंज महल, हाथी महल , जामा मस्जिद, अशर्फी महल, चम्पा बावड़ी, रेवा कुंड इत्यादि किसी को भी अपने मोहपाश में बांधने में सक्षम हैं। इनके अलावा यहां का सनसेट पांइट और ईको पांइट भी महसूस करने लायक स्थान हैं। यहां के नीलकंठ महादेव और जैन मंदिर का अपना अलग ही आकर्षण है।
मांडू घूमने में समय की समस्या भी आड़े नहीं आती। दो दिनों में यहां आराम से घूम, बिना जेब पर ज्यादा बोझ डाले भी पूरी जगहें देखी जा सकती हैं। इंदौर से सड़क के रास्ते इसकी दूरी 100किमी है। यहां से हर तरह के वाहन उपलब्ध हैं। अभी मौसम है, हो सके तो मौका मत चूकीये।
यहां का सबसे बड़ा आकर्षण, झीलों के बीच बना जहाज महल, सुंदरता का बेजोड़ नमूना है। इस पर बने रानी रूपमती के झरोखे से, जहां पर्वत श्रृंखला खत्म हो जाती है और सामने खुला मैदान नजर आता है। दूर नर्मदा नदी एक लकीर की तरह नजर आती है। कहते हैं कि बिना नर्मदा के दर्शन किये रूपमती जल ग्रहण नहीं करती थी। इसीलिये बाज बहादुर ने यहां नर्मदा के दर्शन हेतु यह झरोखा बनवाया था।
मांडू अपने महलों के लिये विख्यात है यहां देखने लायक बहुत सी इमारतें हैं। जिनमें बाज बहादुर महल, हिंडोला महल, मुंज महल, हाथी महल , जामा मस्जिद, अशर्फी महल, चम्पा बावड़ी, रेवा कुंड इत्यादि किसी को भी अपने मोहपाश में बांधने में सक्षम हैं। इनके अलावा यहां का सनसेट पांइट और ईको पांइट भी महसूस करने लायक स्थान हैं। यहां के नीलकंठ महादेव और जैन मंदिर का अपना अलग ही आकर्षण है।
मांडू घूमने में समय की समस्या भी आड़े नहीं आती। दो दिनों में यहां आराम से घूम, बिना जेब पर ज्यादा बोझ डाले भी पूरी जगहें देखी जा सकती हैं। इंदौर से सड़क के रास्ते इसकी दूरी 100किमी है। यहां से हर तरह के वाहन उपलब्ध हैं। अभी मौसम है, हो सके तो मौका मत चूकीये।
शुक्रवार, 31 जुलाई 2009
? इनका जवाब किसी के पास भी नही है
? सन 1814, सितंबर के महिने में, फ्रांस के एजिन शहर के आसमान पर एक बादल का टुकड़ा उमड़ता है। अचानक एक जोर की आवाज के साथ उसमें से कंकड़- पत्थरों के साथ बारिश होने लगती है।ऐसा ही कुछ सन 2000 में इथोपिया मे भी हुआ था जब आसमान से मछलियों की बरसात हुई थी।
? वर्ष 1821, प्रख्यात भूगर्भशास्त्री डेविड वर्च्यु ने अपने काम के सिलसिले में एक चट्टान की खुदाई की। उसी दौरान करीब 20-25 फुट की गहराई पर उन्होंने एक भूरे रंग के छिपकली नुमा जानवर को दबे पाया। वह मरा हुआ दिख रहा था। पर रोशनी और हवा के मिलते ही वह हिला और भाग गया।
? सन 1908, 30 जून, साईबेरिया के एक प्रांत तुंगुस्का के हाड़ी टापू पर आसमान से आग का एक गोला गिरता है जो तकरीबन आधे टापू पर बिखर जाता है। इसका विस्फोट इतना जोरदार होता है कि टापू के सारे पेड़-पौधों का नमोनिशान मिट जाता है।
? सन 1977, अमेरिका और ब्रिटेन में एक साथ हजारों लोगों ने एक अजीब सी भिनभिनाहट जैसी आवाजें सुनी। इससे हजारों लोग रात को सो नहीं पाये थे।
? जनवरी 1984, रूस का एक विमान अपने गंतव्य की ओर बढ रहा था कि अचानक उसमें एक चमकीली गोल सी वस्तु घुस आयी। अचंभित यात्रियों के सर पर कुछ देर मंडराने के पश्चात यह गायब हो गयी।
? पश्चिमी टेक्सास में हाईवे-90 से कुछ ही दूरी पर आकाश में दिखने वाली रोशनी एक रहस्यमय अजूबा है।
? 80 के दशक में दिल्ली के विश्व्विद्यालय क्षेत्र में एक सीमित जगह को तहस-नहस करने वाला बवंडर अभी तक रहस्य के आवरण में लिपटा हुआ है।
? वर्ष 1821, प्रख्यात भूगर्भशास्त्री डेविड वर्च्यु ने अपने काम के सिलसिले में एक चट्टान की खुदाई की। उसी दौरान करीब 20-25 फुट की गहराई पर उन्होंने एक भूरे रंग के छिपकली नुमा जानवर को दबे पाया। वह मरा हुआ दिख रहा था। पर रोशनी और हवा के मिलते ही वह हिला और भाग गया।
? सन 1908, 30 जून, साईबेरिया के एक प्रांत तुंगुस्का के हाड़ी टापू पर आसमान से आग का एक गोला गिरता है जो तकरीबन आधे टापू पर बिखर जाता है। इसका विस्फोट इतना जोरदार होता है कि टापू के सारे पेड़-पौधों का नमोनिशान मिट जाता है।
? सन 1977, अमेरिका और ब्रिटेन में एक साथ हजारों लोगों ने एक अजीब सी भिनभिनाहट जैसी आवाजें सुनी। इससे हजारों लोग रात को सो नहीं पाये थे।
? जनवरी 1984, रूस का एक विमान अपने गंतव्य की ओर बढ रहा था कि अचानक उसमें एक चमकीली गोल सी वस्तु घुस आयी। अचंभित यात्रियों के सर पर कुछ देर मंडराने के पश्चात यह गायब हो गयी।
? पश्चिमी टेक्सास में हाईवे-90 से कुछ ही दूरी पर आकाश में दिखने वाली रोशनी एक रहस्यमय अजूबा है।
? 80 के दशक में दिल्ली के विश्व्विद्यालय क्षेत्र में एक सीमित जगह को तहस-नहस करने वाला बवंडर अभी तक रहस्य के आवरण में लिपटा हुआ है।
बुधवार, 29 जुलाई 2009
व्हाइट हाउस में घूमते भूत
भूत प्रेतों की विश्वसनियता पर सदा ही खत्म ना होने वाली बहस होती रही है। ऐसा माना जाता है कि पिछड़े देशों में अशिक्षा के कारण लोग ऐसे अंधविश्वासों को मानते रहे हैं। आज यहां उन दो देशों के कुछ "घरों" की बात रख रहा हूं, जो संसार में सबसे ज्यादा उन्नतशील देश समझे जाते हैं।
1, व्हाइट हाउस :- जी हां, वही व्हाइट हाउस जिसमें संसार के सबसे शक्तिशाली और उन्नतशील देश का राष्ट्रपति रहता है। जो देश विज्ञान का सहारा ले आकाश पाताल नापने का दावा करता है उसी के, संसार के सबसे आरामदायक और भव्य, महल में भूतों का ड़ेरा है। इस खूबसूरत भवन मे बहुतेरे राष्ट्राध्यक्ष मरने के पश्चात भी रहने का लोभ नहीं छोड़ पाये हैं।प्रत्यक्षदर्शियों ने वहां पूर्व राष्ट्रपति हैरिसन, एंड़्रयू जैक्सन, अब्राहम लिंकन और रूजवेल्ट की आत्माओं को घूमते देखा है।
2, व्हेले हाउस :- अमेरिका के ही सैन डिएगो में स्थित यह घर बहुत ही डरावना है। 1857 में बने इस घर के अभिशप्त होने का कारण इसका कब्रिस्तान पर बना होना माना जाता है। यहां लोग दिन में भी जाने से कतराते हैं।
3, टावर आफ लंदन :- इस एतिहासिक इमारत में तो भूतों की टोली रहती है। बहुतेरी बार सर कटे भूतों को अपने सर हाथ में लिये घूमते लोगों ने देखा है। यहां हेनरी षष्टम, सर वाल्टर रैले तथा थामस बेकेट की आत्मायें अक्सर घूमते देखी गयीं हैं।
4, बोरले रेक्टोरी चर्च :- कहते हैं कि इंग्लैंड का यह चर्च भूतों की मनपसंद जगह है। 1863 में बने इस चर्च में बनने के कुछ सालों बाद ही अजीबोगरीब घटनायें होनी शुरु हो गयीं थी। भय और आशंका के मारे इसे 1939 में जला कर नष्ट कर देने के बावजूद भी यहां रहस्यमयी घटनायें खत्म नहीं हुई हैं।
5, रेहम हाल :- यह भवन अपनी "ब्राउन लेडी" के भूत के कारण खासा मशहूर है। इंग्लैंड के नारफोक के इस रेहम हाल पर एक फिल्म भी बन चुकी है।
ये तो कुछ बानगियां हैं, उन लोगों के लिये जो अपने को पिछड़े और अंधविश्वासी देश में रहनेवाला मान कर सदा गोरी चमड़ी वालों को अपने से श्रेष्ठ और उनके देशों को अपना मार्गदर्शक माने रहते हैं। अनहोनी की आशंका, मौत का भय, अनिष्ट का डर दुनिया में सब जगह लोगों को घेरे रहता है। कहीं एक रत्ती कम कहीं एक तोला ज्यादा।
1, व्हाइट हाउस :- जी हां, वही व्हाइट हाउस जिसमें संसार के सबसे शक्तिशाली और उन्नतशील देश का राष्ट्रपति रहता है। जो देश विज्ञान का सहारा ले आकाश पाताल नापने का दावा करता है उसी के, संसार के सबसे आरामदायक और भव्य, महल में भूतों का ड़ेरा है। इस खूबसूरत भवन मे बहुतेरे राष्ट्राध्यक्ष मरने के पश्चात भी रहने का लोभ नहीं छोड़ पाये हैं।प्रत्यक्षदर्शियों ने वहां पूर्व राष्ट्रपति हैरिसन, एंड़्रयू जैक्सन, अब्राहम लिंकन और रूजवेल्ट की आत्माओं को घूमते देखा है।
2, व्हेले हाउस :- अमेरिका के ही सैन डिएगो में स्थित यह घर बहुत ही डरावना है। 1857 में बने इस घर के अभिशप्त होने का कारण इसका कब्रिस्तान पर बना होना माना जाता है। यहां लोग दिन में भी जाने से कतराते हैं।
3, टावर आफ लंदन :- इस एतिहासिक इमारत में तो भूतों की टोली रहती है। बहुतेरी बार सर कटे भूतों को अपने सर हाथ में लिये घूमते लोगों ने देखा है। यहां हेनरी षष्टम, सर वाल्टर रैले तथा थामस बेकेट की आत्मायें अक्सर घूमते देखी गयीं हैं।
4, बोरले रेक्टोरी चर्च :- कहते हैं कि इंग्लैंड का यह चर्च भूतों की मनपसंद जगह है। 1863 में बने इस चर्च में बनने के कुछ सालों बाद ही अजीबोगरीब घटनायें होनी शुरु हो गयीं थी। भय और आशंका के मारे इसे 1939 में जला कर नष्ट कर देने के बावजूद भी यहां रहस्यमयी घटनायें खत्म नहीं हुई हैं।
5, रेहम हाल :- यह भवन अपनी "ब्राउन लेडी" के भूत के कारण खासा मशहूर है। इंग्लैंड के नारफोक के इस रेहम हाल पर एक फिल्म भी बन चुकी है।
ये तो कुछ बानगियां हैं, उन लोगों के लिये जो अपने को पिछड़े और अंधविश्वासी देश में रहनेवाला मान कर सदा गोरी चमड़ी वालों को अपने से श्रेष्ठ और उनके देशों को अपना मार्गदर्शक माने रहते हैं। अनहोनी की आशंका, मौत का भय, अनिष्ट का डर दुनिया में सब जगह लोगों को घेरे रहता है। कहीं एक रत्ती कम कहीं एक तोला ज्यादा।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
विशिष्ट पोस्ट
राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत, फर्क क्या है
इन दोनों देशभक्ति से ओत-प्रोत संगीत रचनाओं में एक समानता यह है कि इनकी रचना बंगाल में, वहां की दो महान विभूतियों के द्वारा की गई है ! हमारा ...
-
कल रात अपने एक राजस्थानी मित्र के चिरंजीव की शादी में जाना हुआ था। बातों ही बातों में पता चला कि राजस्थानी भाषा में पति और पत्नी के लिए अलग...
-
शहद, एक हल्का पीलापन लिये हुए बादामी रंग का गाढ़ा तरल पदार्थ है। वैसे इसका रंग-रूप, इसके छत्ते के लगने वाली जगह और आस-पास के फूलों पर ज्याद...
-
आज हम एक कोहेनूर का जिक्र होते ही भावनाओं में खो जाते हैं। तख्ते ताऊस में तो वैसे सैंकड़ों हीरे जड़े हुए थे। हीरे-जवाहरात तो अपनी जगह, उस ...
-
चलती गाड़ी में अपने शरीर का कोई अंग बाहर न निकालें :) 1, ट्रेन में बैठे श्रीमान जी काफी परेशान थे। बार-बार कसमसा कर पहलू बदल रहे थे। चेहरे...
-
युवक अपने बच्चे को हिंदी वर्णमाला के अक्षरों से परिचित करवा रहा था। आजकल के अंग्रेजियत के समय में यह एक दुर्लभ वार्तालाप था सो मेरा स...
-
कहते हैं कि विधि का लेख मिटाए नहीं मिटता। कितनों ने कितनी तरह की कोशीशें की पर हुआ वही जो निर्धारित था। राजा लायस और उसकी पत्नी जोकास्टा। ...
-
हनुमान जी के चिरंजीवी होने के रहस्य पर से पर्दा उठाने के लिए पिदुरु के आदिवासियों की हनु पुस्तिका आजकल " सेतु एशिया" नामक...
-
"बिजली का तेल" यह क्या होता है ? मेरे पूछने पर उन्होंने बताया कि बिजली के ट्रांस्फार्मरों में जो तेल डाला जाता है वह लगातार ...
-
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा। हमारे तिरंगे के सम्मान में लिखा गया यह गीत जब भी सुनाई देता है, रोम-रोम पुल्कित हो जाता ...
-
अपनी एक पुरानी डायरी मे यह रोचक प्रसंग मिला, कैसा रहा बताइयेगा :- काफी पुरानी बात है। अंग्रेजों का बोलबाला सारे संसार में क्यूं है? क्य...