इस ब्लॉग में एक छोटी सी कोशिश की गई है कि अपने संस्मरणों के साथ-साथ समाज में चली आ रही मान्यताओं, कथा-कहानियों को, बगैर किसी पूर्वाग्रह के, एक अलग नजरिए से देखने, समझने और सामने लाने की ! इसके साथ ही यह कोशिश भी रहेगी कि कुछ अलग सी, रोचक, अविदित सी जानकारी मिलते ही उसे साझा कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके ! अब इसमें इसको सफलता मिले, ना मिले, प्रयास तो सदा जारी रहेगा !
रविवार, 22 जनवरी 2023
अश्वत्थामा हतो.......! जैसा वाकया पहले भी एक बार घटित हो चुका था
शुक्रवार, 5 नवंबर 2021
नरक चतुर्दशी, नरकासुर वध
समर के दौरान प्रभु लीला के तहत एक बाण श्री कृष्ण जी की बांह को छू गया ! जिससे क्रुद्ध हो सत्यभामा ने, जो खुद भी युद्ध में पारंगत थीं, अस्त्र उठा कर नरकासुर पर प्रहार कर उसका वध कर डाला ! लेकिन मरते हुए, नरकासुर ने अपनी माँ से वरदान मांगा कि संसार उसे दुर्भाव से नहीं बल्कि खुशी से याद करे और हर साल उसकी मृत्यु के दिन पर उत्सव मनाया जाए। उसी वरदान के तहत दिवाली के एक दिन पहले नरक चतुर्दशी का समारोह मनाया जाता है..............!
#हिन्दी_ब्लागिंग
इंसान के लिए जो बात या घटना अप्रत्याशित, असंभावित या आकस्मिक होती है वही बात जगत रचयिता के विधि लेखन का पूर्वनियोजित हिस्सा होती है ! हमारी पृथ्वी की गोलाई की तरह ही यहां पर घटने वाली हर बातें, विषय, घटनाएं, वाकये सब सुनियोजित हो किसी ना किसी तरह, गोल-गोल एक दूसरे से जुड़े होते हैं। इंसान जिस घटना पर अवाक रह जाता है वह वर्षों पहले नियंता द्वारा रची जा चुकी होती है !
विशिष्ट पोस्ट
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