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सोमवार, 24 जनवरी 2022

मोमबत्तियों की बढ़ती संख्या से विचलित ना हों, उनके बढ़ते आलोक का आनंद लें

पोर्टब्लेयर और दिल्ली, दोनों जगहों के तापमान में बहुत ज्यादा अंतर था। वहां एक टी शर्ट भी भारी लगती थी तो यहां सब कुछ ठंड की चपेट में था ! पर जो है वह तो हइए है ! शुक्र इस बात का रहा कि उम्र-दराज होने के बावजूद किसी भी सदस्य को कोई खास तकलीफ नहीं हुई जबकि पूरा दौरा कुछ थका देने वाला ही था ! पर हरेक सदस्य ने यह सिद्ध कर दिया कि उम्र सिर्फ एक अंक ही है ! तन पर भले ही समय की छेनी अपना असर दिखा रही हो, दिमाग युवा और मन अभी भी बच्चा ही है ! हम वे लोग हैं जो केक पर की मोमबत्तियों की बढ़ती संख्या से विचलित ना हो कर उनके बढ़ते अलोक का आनंद लेते हैं..............!   

#हिन्दी_ब्लागिंग 

जनकपुरी की #RSCB (Retired and Senior Citizen Brotherhood) संस्था द्वारा आयोजित 11 से 16 दिसंबर की पोर्टब्लेयर यात्रा का पांचवां दिन घर वापसी के रूप में शुरू हुआ ! नील द्वीप से अपने उसी क्रूज, Green Ocean, से ही वापसी भी थी ! पोर्टब्लेयर से हैवलॉक होते हुए यह नील टापू तक करीब ढाई घंटे में पहुंचता है पर वापसी में सीधे नील से पोर्टब्लेयर आने में दो घंटे ही लगते हैं ! पर यह समय भी गाने-बजाने में कैसे निकल जाता है, पता ही नहीं चलता ! दोपहर एक बजते-बजते पोर्टब्लेयर के उसी होटल J में, जिसमें दो दिन पहले ठहरे थे, पहुँच फिर चेक इन कर लिया गया ! यह होटल अबरदीन बाजार में स्थित है यहाँ से मरीना बीच की दूरी सिर्फ पांच मिनट,पैदल की है ! भोजनोपरांत कुछ लोग शहर भ्रमण और कुछ लोग खरीदारी के लिए निकल गए तो कुछ ने अपने कमरे में ही समय व्यतीत करने का निश्चय किया !


होटल से 

अपनी मनमोहक खूबसूरती, शांति और जलीय खेलों, जलीय जीव-जन्तुओं को बेहद करीब से देख सकने की सुविधा जैसी रोमांचक खूबियों के कारण अंडमान द्वीप समूह पर्यटकों को सदा आकर्षित करता रहा है ! दिल्ली से करीब ढाई हजार किमी (2485) दूर इसकी राजधानी पोर्ट ब्लेयर अपनी ऐतिहासिक जेल, म्यूजियम, जापानी बंकर, मरीना पार्क जैसी बेहद सुंदर जगहों के लिए विश्व प्रसिद्ध है ! यहां की वन संपदा के दोहन के लिए सन1789 में अंग्रेज सरकार द्वारा लेफ्टिनेंट रेगिनाल्ड ब्लेयर के नेतृत्व में एक सर्वे करवाया गया तथा उसी सर्वेयर के नाम पर ही यहां के मुख्य द्वीप का नाम पोर्ट ब्लेयर रख दिया गया !  

क्लॉक टॉवर 



काले पानी की सजा पाने वालों में विभिन्न प्रदेशों, जातियों, धर्मों के स्त्री-पुरुष दोनों ही होते थे ! ब्रिटिश सरकार के अधिकारी इन कैदियों में से कइयों की सजा समय-समय पर उनका आचरण देख काम या माफ करते रहते थे ! पर सजा मुक्त होने पर भी उन्हें मुख्य भूमि पर ना भेज, वहीं बसा दिया जाता था। उनके आपस में विवाह भी करवा, परिवार बनवा, कुछ टुकड़े जमीनों के भी दे दिए जाते थे ! इस तरह ये द्वीप बसते चले गए ! सरकार की पुलिस में भी हर धर्म जाति के लोग थे, तो उनकी आस्था और धर्म की तुष्टि को पूरा करने के लिए अंग्रेजों ने पोर्टब्लेयर में एक-एक मंदिर, गुरुद्वारा और मस्जिद का निर्माण करवा उनका संचालन पुलिस विभाग को सौंप दिया ! आज भी यह प्रथा चली आ रही है और इन तीनों धर्मस्थलों को पुलिस के नाम से ही जाना जाता है !   

पुलिस मंदिर 

इनके अलावा अबरदीन मार्ग पर हनुमान जी का एक और मंदिर भी है। इसका गुंबद देश के दक्षिणी भागों के मंदिरों जैसा है ! इसकी मुख्य प्रतिमाएं पूर्णतया सोने से मढ़ी हुई हैं, जो बहुत ही सुंदर और सजीव सी हैं ! फिर भी किसी तरह का पहरा या अतिरिक्त सुरक्षा की जरुरत महसूस नहीं की जाती ! शायद द्वीप की रक्षार्थ सागर की उपस्थिति ही पर्याप्त है ! आश्चर्य की बात है कि इन सब दर्शनीय स्थलों का उल्लेख किसी भी यात्रा विवरणिका में उपलब्ध नहीं करवाया जाता ! पर जो भी हो यह जगहें देखने लायक जरूर हैं।

मंदिर की छत पर बना अत्यंत सुंदर चित्र 



वापसी 
शाश्वत नियम है कि हर चीज का अंत होता ही है ! सो इस यादगार यात्रा का समापन भी आ ही पहुंचा ! आते समय बेंगलुरु होते हुए आए थे, लौटते वक्त Go First की कोलकाता होते हुए दिल्ली की फ्लाइट थी ! दोपहर सवा ग्यारह बजे शुरू हुई हवाई यात्रा ने घुमाते-फिराते शाम पांच बजे दिल्ली पहुंचा दिया ! ग्रुप के मित्रों ने आपस में संबंध बनाए रखने के वादे के साथ विदा ली ! दोनों जगहों के तापमान में बहुत ज्यादा अंतर था, वहां एक टी शर्ट भी भारी लगती थी तो यहां सब कुछ ठंड की चपेट में था ! पर जो है वह तो हइए है ! शुक्र इस बात का रहा कि उम्र-दराज होने के बावजूद किसी भी सदस्य को कोई ख़ास तकलीफ नहीं हुई जबकि पूरा दौरा कुछ थका देने वाला ही था ! पर हरेक सदस्य ने यह सिद्ध कर दिया कि उम्र सिर्फ एक अंक है ! तन पर भले ही समय की छेनी अपना असर दिखा रही हो, दिमाग युवा और मन बच्चा ही होना चाहिए ! हम वे लोग हैं जो केक पर की मोमबत्तियों की संख्या से विचलित ना हो कर उनके बढ़ते आलोक का आनंद लेते हैं ! 

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