बॉक्सिंग डे को मनाने का कोई बहुत ही कठोर नियम नहीं है। कभी-कभी जब 26 दिसम्बर को रविवार पड़ जाता है तो इसे अगले दिन अर्थात 27 दिसम्बर को और यदि बॉक्सिंग दिवस शनिवार को पड़ जाये तो उसके बदले में आने वाले सोमवार को अवकाश दिया जाता है। परन्तु यदि क्रिसमस शनिवार को हो तो क्रिसमस की सुनिश्चित छुट्टी सोमवार 27 दिसम्बर को होती है और बॉक्सिंग दिवस का सुनिश्चित अवकाश मंगलवार 28 दिसम्बर को होता है.......................!
इस ब्लॉग में एक छोटी सी कोशिश की गई है कि अपने संस्मरणों के साथ-साथ समाज में चली आ रही मान्यताओं, कथा-कहानियों को, बगैर किसी पूर्वाग्रह के, एक अलग नजरिए से देखने, समझने और सामने लाने की ! इसके साथ ही यह कोशिश भी रहेगी कि कुछ अलग सी, रोचक, अविदित सी जानकारी मिलते ही उसे साझा कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके ! अब इसमें इसको सफलता मिले, ना मिले, प्रयास तो सदा जारी रहेगा !
बॉक्सिंग डे लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बॉक्सिंग डे लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 26 दिसंबर 2020
बॉक्सिंग डे, जिसका बॉक्सिंग के खेल से कोई लेना-देना नहीं है
#हिन्दी_ब्लागिंग
बॉक्सिंग डे, यानी अवकाश दिवस ! इसका बॉक्सिंग के खेल से दूर-दूर का भी संबंध नहीं है। इसे एक धर्मनिरपेक्ष उत्सव कहा जा सकता है। जो 26 दिसम्बर को मनाया जाता है। पर इस दिन कई देशों में तरह-तरह के खेलों की शुरुआत होने और मिलते-जुलते नाम की वजह से ऐसा लगता है कि शायद बॉक्सिंग के खेल से इसका नाता हो। जबकी ऐसा नहीं है ! ब्रिटेन और उसके शासित देशों में इसकी परंपरा रही है। जो अब अन्य जगहों पर भी फ़ैल गयी है। पहले इस दिन क्रिसमस के दूसरे दिन जरूरतमंदों, बेसहारा सर्वहारा लोगों के लिए आवश्यक वस्तुओं को डिब्बे में बंद कर चर्चों के सामने रख देने की परंपरा थी। जिससे किसी को किसी के सामने शर्मिंदगी का एहसास ना हो। पर समय के साथ-साथ अब उस परंपरा के साथ-साथ इसने खरीदारी के उत्सव का रूप ले लिया है। इस दिन लोग जम कर सामान खरीदते हैं इसलिए दुकानदार भी लुभावने प्रस्ताव पेश करने में पीछे नहीं रहते। एक तरह से यह दिन शॉपिंग डे में तब्दील हो गया है।
तक़रीबन रोमन काल से चली आ रही इस परिपाटी के बारे में कुछ ज्यादा स्पष्ट नहीं है, पर इस दिन हर जगह ग़रीबों, जरूरतमंदों को धन या अन्य दान दे कर उनकी सहायता करने का चलन रहा है। इस दिन चर्चों के बाहर जीवनोपयोगी आवश्यक वस्तुओं को डिब्बों में बंद कर उन्हें जरुरतमंद-बेसहारा लोगों के लिए रख दिए जाता था। इन्हीं के साथ वहीं कुछ खाली बॉक्स भी सेंट स्टीफेन की दावत के नाम पर कुछ रकम इकट्ठी करने के लिए रख दिए जाते थे। इन्हीं बॉक्सों या डिब्बों के लेन-देन के कारण इस दिन को बॉक्सिंग डे के नाम से जाना जाने लगा है।
इसको मनाने का कोई बहुत ही अनिवार्य या कठोर नियम नहीं है। कभी-कभी जब 26 दिसम्बर को रविवार पड़ जाता है तो बॉक्सिंग दिवस अगले दिन अर्थात 27 दिसम्बर को और यदि बॉक्सिंग दिवस शनिवार को पड़ जाये तो उसके बदले में आने वाले सोमवार को अवकाश दिया जाता है। परन्तु यदि क्रिसमस शनिवार को हो तो क्रिसमस की सुनिश्चित छुट्टी सोमवार 27 दिसम्बर को होती है और बॉक्सिंग दिवस का सुनिश्चित अवकाश मंगलवार 28 दिसम्बर को होता है।
इस दिन कई खेलों के शुरू होने का चलन रहा है। उसी में क्रिकेट भी शामिल है। इस बार भी हम आस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं और बॉक्सिंग डे पर ही, एक मैच से पीछे चल रही हमारी टीम को दूसरा टेस्ट मैच खेलना है। हमारा इस दिन खेले गए मैचों का रेकॉर्ड बहुत ही "गरीब" रहा है ! हमने अब तक इस दिन आस्ट्रेलिया के साथ आठ, द. अफ्रीका के खिलाफ पांच और न्यूजीलैंड के साथ एक मैच खेला है। जिसमें दो में ही जीत मिल पाई हैं ! नौ में हार तथा तीन बेनतीजा रहे हैं। इस बार अपने देश के क्रिकेट प्रेमी यही दुआ कर रहे हैं कि इस बार बॉक्सिंग दिवस पर खेले जाने वाले मैच में भारतीय टीम का डिब्बा गोल ना हो। वर्षों से हमारी टीम के साथ जुड़ा हुआ ''जिंक्स'' भी जाने वाले साल के साथ ही विदा हो।
आमीन !!
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
विशिष्ट पोस्ट
जिसने सबसे ज्यादा विभिन्न रोगग्रस्त पात्रों का किरदार निभाया
अनेकों बार Autism, Dyslexia, Progeria, Paraplegia, Alzheimer, Amnesia, Schizophrenia जैसी अनेक बीमारियों पर, जिनका नाम भी आम लोगों ने सुना...
-
कल रात अपने एक राजस्थानी मित्र के चिरंजीव की शादी में जाना हुआ था। बातों ही बातों में पता चला कि राजस्थानी भाषा में पति और पत्नी के लिए अलग...
-
शहद, एक हल्का पीलापन लिये हुए बादामी रंग का गाढ़ा तरल पदार्थ है। वैसे इसका रंग-रूप, इसके छत्ते के लगने वाली जगह और आस-पास के फूलों पर ज्याद...
-
आज हम एक कोहेनूर का जिक्र होते ही भावनाओं में खो जाते हैं। तख्ते ताऊस में तो वैसे सैंकड़ों हीरे जड़े हुए थे। हीरे-जवाहरात तो अपनी जगह, उस ...
-
चलती गाड़ी में अपने शरीर का कोई अंग बाहर न निकालें :) 1, ट्रेन में बैठे श्रीमान जी काफी परेशान थे। बार-बार कसमसा कर पहलू बदल रहे थे। चेहरे...
-
युवक अपने बच्चे को हिंदी वर्णमाला के अक्षरों से परिचित करवा रहा था। आजकल के अंग्रेजियत के समय में यह एक दुर्लभ वार्तालाप था सो मेरा स...
-
कहते हैं कि विधि का लेख मिटाए नहीं मिटता। कितनों ने कितनी तरह की कोशीशें की पर हुआ वही जो निर्धारित था। राजा लायस और उसकी पत्नी जोकास्टा। ...
-
हनुमान जी के चिरंजीवी होने के रहस्य पर से पर्दा उठाने के लिए पिदुरु के आदिवासियों की हनु पुस्तिका आजकल " सेतु एशिया" नामक...
-
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा। हमारे तिरंगे के सम्मान में लिखा गया यह गीत जब भी सुनाई देता है, रोम-रोम पुल्कित हो जाता ...
-
"बिजली का तेल" यह क्या होता है ? मेरे पूछने पर उन्होंने बताया कि बिजली के ट्रांस्फार्मरों में जो तेल डाला जाता है वह लगातार ...
-
अपनी एक पुरानी डायरी मे यह रोचक प्रसंग मिला, कैसा रहा बताइयेगा :- काफी पुरानी बात है। अंग्रेजों का बोलबाला सारे संसार में क्यूं है? क्य...





