pub-3648900737756323 कुछ अलग सा: किले का दरवाजा अंदर से ही खुलता है

मंगलवार, 25 अगस्त 2026

किले का दरवाजा अंदर से ही खुलता है

वैसे तो सच की फितरत है कि वह सामने आता जरूर है ! चाहे जैसे भी हो ! इसके लिए उसकी सहायता करते हैं कुछ ऐसे लोग जो इतिहास की असलियत जग-जाहिर करने में अपना जीवन लगा देते हैं ! पर यह बहुत ही जटिल और दुरूह कार्य है ! अपार समय, पैसे और धैर्य की जरुरत होती है ! साथ ही घोर विरोध का भी सामना करना पड़ता है ! विरोध का होना तो लाजिमी है ! जो लोग सत्ता सुख पाने के लिए कुछ भी कर सकते हों, उनके लिए तो उनके सच का आम हो जाना किसी परमाणु विस्फोट से कम नहीं हो सकता.........!     

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

हम यदि अपने पुराने ग्रंथों, महाकाव्यों, इतिहास की सुप्रसिद्ध कथाओं-कहानियों को देखें तो उनमें बहादुर, निडर जननायकों के साथ ही उस समय के खलनायकों के षड्यंत्रों, कारस्तानियों, उनकी दुरभिसंधियों का भी विस्तृत विवरण मिल जाता है ! पर बदलते समय के साथ, जब खलनायक भी नायक बन सत्तानशीन होते चले गए और उनके चाटुकार, मौकापरस्त चारणों द्वारा उनके कुकर्मों पर पर्दा डाल, उनके चरित्र को पाक-साफ दिखाने, उनकी छवि को महिमामंडित करने हेतु इतिहास को ही तोड़-मरोड़ डाला गया, तो सच भी रसातल जा पहुंचा ! 

झूठ के मकड़जाल में फंसा सच 

आज जरूरत है उसी परंपरा को जीवित कर सज्जनों के साथ-साथ दुर्जनों की वंशावलियों की भी पूरी कुंडली को जनता-जनार्दन के सामने लाने की ! उनके और उनके पूर्वजों द्वारा किए गए सारे कारनामों को जिनके अतीत के सच पर झूठ का चमकीला आवरण चढ़ा, असलियत छिपा, उनको महिमामंडित कर, अवाम को सच के सिवा कुछ और ही दिखा-समझा कर पीढ़ी दर पीढ़ी जो गलत इतिहास पढ़ाया-समझाया गया, उसका पर्दाफाश करने की ! वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के सामने सच रखने की ! उनके दिलों में राष्ट्र प्रथम की भावना सुदृढ़ करने की ! जिससे किले के दरवाजे की सुरक्षा पुख्ता हो जाए, अभेद्य हो जाए !

राष्ट्र प्रथम 

वैसे तो सच की फितरत है कि वह सामने आता जरूर है ! चाहे जैसे भी हो ! इसके लिए उसकी सहायता करते हैं कुछ ऐसे लोग जो इतिहास की असलियत जग-जाहिर करने में अपना जीवन लगा देते हैं ! पर यह बहुत ही जटिल और दुरूह कार्य है ! अपार समय, पैसे और धैर्य की जरुरत होती है ! साथ ही घोर विरोध का भी सामना करना पड़ता है ! विरोध का होना तो लाजिमी है ! जो लोग सत्ता सुख पाने के लिए कुछ भी कर सकते हों, उनके लिए तो उनके सच का आम हो जाना किसी परमाणु विस्फोट से कम नहीं हो सकता ! 

भावना 

इस वर्ग के लोगों को अपने समाज, अपनी संस्कृति, अपने देश और उसके गौरवशाली अतीत से कोई सरोकार नहीं होता ! उन्हें सिर्फ और सिर्फ अपने सुख, ऐश-ओ-आराम और अपने भविष्य की चिंता होती है! ऐसे लोग आज से नहीं सदियों से इस देश में फलते-फूलते रहे हैं ! वर्षों-वर्ष से ये लोग अपने ही देश के किले का दरवाजा अंदर से खोलते रहे हैं ! इनके कुत्सित प्रयासों के बावजूद देश तरक्की की राह पर चलने की कोशिश करता रहा है ! 

भविष्य 

कभी-कभी एक विचित्र सी सोच भी मन में उभरती है कि यदि ऐसे लोग विदेशी ताकतों के झांसे में ना आ, देश हित के प्रयासों में जुट जाएं, तो क्या अमेरिका, क्या चीन, क्या योरोप, क्या सारी दुनिया सिर्फ भारत के नाम से नहीं जानी जाने लग जाएगी.................काश ऐसा हो पाता !

जय हिन्द ! वंदे मातरम !!  

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

2 टिप्‍पणियां:

Digvijay Agrawal ने कहा…

कोशिश तो यही रहती है
पर किले के भीतर बैठे मीरजाफ़रों को
कैसे रोका जाए इसका हल तलाशिए
वंदन

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

दिग्विजय जी 🙏
किले के दरवाजे तो क्या उसके दर ओ दिवार तक में सेंध लगाने वालों के नकाब को आम जनता ने कब का उतार फेंका है, पर जिन पर सारी सुरक्षा की जिम्मेदारी है वे ऐसों को सुधरने के मौके पर मौका दिए जा रहे हैं, पता नहीं किस उम्मीद या मजबूरी में

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