शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

तीन पैरों वाला फ़ुटबाल खिलाडी

वह अपने तीनों पैरों से दौडने, कूदने, सायकिल चलाने, स्केटिंग करने के साथ-साथ बाल पर बेहतरीन ‘किक’ लगाने में पारांगत हो गया था। ऐसे ही उसके एक शो को देख एक नामी फुटबाल क्लब से उसे खेलने की पेशकश की गयी। फ्रैंक ने मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। देखते-देखते वह सबसे लोकप्रिय खिलाडी बन गया। खेल के दौरान जब वह अपने दोनों पैरों को स्थिर कर तीसरे पैर से किक लगा, बाल को खिलाडियों के सर के उपर से दूर पहुंचा देता तो दर्शक विस्मित हो खुशी से तालियां और सीटियां बजाने लगते।  उसे अपने तीसरे पैर से किसी भी तरह की अड़चन नहीं थी। सिर्फ कपडे सिलवाते समय विशेष नाप की जरूरत पडती थी और रही जूतों की बात तो उसने उसका भी बेहतरीन उपाय खोज लिया था , वह दो जोडी जुते खरीदता और चौथे फालतू जूते को किसी ऐसे इंसान को भेंट कर देता जिसका एक ही पैर हो................!!


#हिन्दी_ब्लागिंग 

आज जब किसी इंसान की हाथ या पैर में एक छठी उंगली भी हो भले ही वह अंग क्रियाशील हो या ना हो उसे प्रकृति का अजूबा ही माना जाता है। कहीं-कहीं तो ऐसे अंग वाला भला आदमी हास्य का पात्र भी बन जाता है ! समाज में इसे एक तरह की चीज को विकलांगता के रूप में ही देखा जाता है। सालों पहले हमारे एक पहचान के  युवक को तो इसी ''कमी'' की वजह से रेलवे ने नौकरी भी दे दी थी !  हमारे फिल्म उद्योग में कई सितारे अपनी इन्हीं वजहों को सालों छिपाते रहे हैं। ऐसे में एकआदमी ! तीन पैरों वाला ! उस पर फ़ुटबाल का खिलाड़ी ! कपोल-कल्पना लगती है ! किसी किस्से-कहानी की काल्पनिक उड़ान ! सुन कर सहज ही विश्वास होना कठिन है !  



18 मई 1889, इटली में सिसली के पास, रोसोलिनि कस्बे के एक अस्पताल मे एक बच्चे का जन्म होता है। जिसको देखते ही नर्स जोरों से  लेते ही नर्स जोरों से चीख पडी ! मां घबडा कर रोने लगी ! नर्स की चीख सुन पूरे अस्पताल मे हडकंप मच गया। बात ही कुछ ऐसी थी ! उस नवजात  सवस्थ शिशु के पूर्ण विकसित तीन पैर थे ! उस समय के अंधविश्वासों के चलते उसे अपशगुनी मान लिया गया ! पर परिवार की ममता उसे किसी तरह की हानि पहुंचाने को तैयार नहीं थी। बच्चे के मां-बाप ने डाक्टरों से प्रार्थना की कि वे किसी भी तरह ऑपरेशन कर इस तीसरी टांग से बच्चे को मुक्ति दिलवा दें। पर डाक्टर विवश थे ! उन्हें लग रहा था कि ऑपरेशन से या तो बच्चे की मौत हो जाएगी या फिर वह जीवन भर के लिए लकवाग्रस्त हो जाएगा। बच्चे की इस अस्वाभाविक बात को छिपाने की हर मुमकिन कोशिश के बावजूद यह खबर सारे शहर मे फैल गई ! लोग उसे देखने के लिए उमड़ पड़े। 

समय कहां रुकता है, वह बीतता गया। उसके साथ ही फ्रैंक लेंटिनी पूरी तरह स्वस्थ रह कर बडा होता गया। बड़े आश्चर्य की बात थी कि उसे अपने इस तीसरे पैर से कभी कोई दिक्कत नहीं हुई । बस उसे इसका कुछ उपयोग समझ में नहीं आता था। वह उस पैर से शरीर को सहारा देने का काम लिया करता था। समय आने पर उसके पिता ने उसे एक स्कूल में दाखिल करवा दिया। पर वहां उसके सहपाठियों द्वारा उसका उपहास उडाने और उससे दूरी बनाए रखने के कारण फ्रैंक उदास रहने लगा। पिता ने कारण जान-समझ उसे वहां से हटवा कर एक विकलांगों के स्कूल में भर्ती करवा दिया। वहां के अन्य विकलांग बच्चों को देख उसे महसूस हुआ कि वह तो दूसरे बच्चों की तुलना में बहुत भाग्यशाली है। उसे लगने लगा कि भगवान का दिया यह जीवन बहुत खूबसूरत है। रही बात शारीरिक विकृति की तो उसको भी अपनी विशेषता बनाया जा सकता है। उसे तो अपने तीसरे पैर से किसी तरह की अड़चन ही नहीं है। सिर्फ कपडे सिलवाते समय विशेष नाप की जरूरत पडती है और रही जूतों की बात तो उसने उसका भी बेहतरीन उपाय खोज लिया। वह दो जोडी जुते खरीदता और चौथे फालतू जूते को किसी ऐसे इंसान को भेंट कर देता जिसका एक ही पैर हो।

सकारात्मक सोच से फ्रैंक का अपनी जिंदगी के प्रति दृष्टिकोण बदल गया। उसने अपने जीवन को बेहतर बनाने, उसमें कुछ करने की ठान ली। इसी सोच के कारण वह हर परीक्षा को विशेष योग्यता से पास करता गया। इतना ही नहीं उसने चार-चार भाषाओं का ज्ञान भी अर्जित किया जो उसके भविष्य में बडा काम आया। समय के साथ उसकी पढाई पूरी होते-होते उसके पास काम के प्रस्ताव भी आने शुरु हो गये थे। पर वह ज्यादातर सर्कस के क्षेत्र से थे । काफी सोच-विचार कर उसने एक नामी सर्कस में काम करना शुरु कर दिया। दैवयोग से वहां उसे काफी नाम और दाम तो मिला ही साथ ही साथ उसके मन से रही-सही हीन भावना भी खत्म हो गयी। वहां रहते हुए उसने अपने तीसरे पैर का भरपूर उपयोग करना भी सीख लिया। अब वह अपने तीनों पैरों से दौडने, कूदने, सायकिल चलाने, स्केटिंग करने के साथ-साथ बाल पर बेहतरीन ‘किक’ लगाने में पारांगत हो गया था। ऐसे ही उसके एक शो को देख एक नामी फुटबाल क्लब से उसे खेलने की पेशकश की गयी। फ्रैंक ने मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। देखते-देखते वह सबसे लोकप्रिय खिलाडी बन गया। लोग बडे से बडे खिलाडी को नजरंदाज कर उसी पर निगाहें गडाए रहते। खेल के दौरान जब वह अपने दोनों पैरों को स्थिर कर तीसरे पैर से किक लगा बाल को खिलाडियों के सर के उपर से दूर पहुंचा देता तो दर्शक विस्मित हो खुशी से तालियां और सीटियां बजाने लगते।

फिर एक समय आया जब पैसा और शोहरत पाने के बाद फ्रैंक की इच्छा घर बसाने की हुई। उनकी जिजीविषा, जिंदगी के प्रति सकारात्मक दृष्टि, हाजिर जवाबी और सेंस ऑफ ह्यूमर से एक युवती थेरेसा मुरे काफी प्रभावित हुई। दोनों ने शादी कर ली और दोनों से चार स्वस्थ बच्चे पैदा हुए। फ्रैंक लेंटिनी का 40 साल से ज्यादा का करियर रहा।उन्होंने करीब-करीब हर बड़े सर्कस और साइड-शो के साथ काम किया। साथियों के बीच उनको काफी सम्मान मिलता था और साथी उनको 'द किंग' कहकर बुलाते थे। अपनी विकलांगता को अपनी शक्ति बनाने वाला, उत्कट जिजिविषा और प्रबल इच्छा शक्ति वाले उस इंसान का 22 सितंबर 1966 में 77 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से   

23 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

प्रकृति अद्भुद है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

अरे वाह।
बिल्कुल अद्भुत।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

सुशील जी
सचमुच!

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शास्त्री जी
कायनात के कारनामे तो चकरा कर रख देते हैं

Satta King | Sattaking ने कहा…

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yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 09 अप्रैल 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

यशोदा जी
मान देने हेतु अनेकानेक धन्यवाद

अनीता सैनी ने कहा…

जी नमस्ते ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (१०-०४-२०२१) को 'एक चोट की मन:स्थिति में ...'(चर्चा अंक- ४०३२) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

अनीता जी
सम्मिलित करने हेतु हार्दिक आभार

Sweta sinha ने कहा…

क्या बात है वाह... आश्चर्यजनक जानकारी के लिए आभारी हूँ सर।
सादर।

Amrita Tanmay ने कहा…

अविश्वसनीय ।

शिवम् कुमार पाण्डेय ने कहा…

बेहतरीन जानकारी दी अपने।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

श्वेता जी
हार्दिक आभार

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

अमृता जी
प्रकृति के कारनामों की कोई थाह नहीं

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शिवम जी
सदा स्वागत है आपका

आलोक सिन्हा ने कहा…

बहुत सुंदर जानकारी ।आभार ।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

आलोक जी
बहुत-बहुत धन्यवाद

मन की वीणा ने कहा…

अद्भुत जानकारी कम से कम मेरे लिए आपका शोध कार्य श्रमसाध्य और अभिनव है।
सुंदर प्रस्तुति।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

कुसुम जी
आप सब का स्नेह हौसला बनाए रखता है। हार्दिक आभार।

Anuradha chauhan ने कहा…

अद्भुत जानकारी

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

अनुराधा जी
हार्दिक आभार

Kadam Sharma ने कहा…

Kabhi na suni anokhi jankari ke lie aabhar

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शुक्रिया, कदम जी

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