बुधवार, 2 दिसंबर 2020

जब फिल्म ''मदर इंडिया'', ''दिस लैंड इज माईन'' बनते-बनते रह गई

पर दिलीप कुमार तो दिलीप कुमार ! उन्हें पता था कि फिल्म नायिका पर केंद्रित है, सारा श्रेय उसे ही मिलने वाला है ! तो भाई ने जगह-जगह कहानी में ज़रा-ज़रा सा बदलाव लाने का सुझाव देना शुरू कर दिया ! फिर इतने से भी काम नहीं बनता दिखा, तो उन्होंने अपने लिए डबल रोल की फरमाइश कर डाली। पहले नायिका का पति और फिर उसका लड़का ! जो सुक्खी लाला से अपनी जमीन हासिल करने के लिए लड़ता और जीतता है। यहां तक कि फिल्म का नाम तक भी सुझा दिया  ''दिस लैंड इज माईन''...............!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

कई बार ऐसा होता है कि कोई इंसान जो समाज में बहुत लोकप्रिय होता है, अवाम का चहेता या आदर्श होता है ! जिसे लोग चाहते हों, प्यार करते हों ! जिसके बारे में उनकी धारणा सिर्फ भले मानुष की हो, ऐसे आदमी को अपनी छवि बनाए रखने के लिए काफी जतन करने पड़ते हैं। अपनी नकारात्मकता को छुपाने के लिए कई-कई सच्ची-झूठी कहानियां घडनी पड़ती हैं ! ''मिथ'' रचना पड़ता है !

औरत 

एक ऐसा ही मिथ, जो पिछले तिरसठ सालों से सच का रूप धरे था, उसका अब जा कर खुलासा हुआ है ! अब तक यही कहा जाता रहा है कि फिल्म मदर इंडिया में दिलीप कुमार ने बिरजू का रोल करने से इस लिए इंकार कर  दिया था क्योंकि वह अपनी अब तक की नायिका रही नर्गिस के बेटे का किरदार नहीं करना चाहते थे। पर सच्चाई इसके विपरीत थी ! उन्हें एक तरह से इस फिल्म से निकाला गया था। पर उनके चाहने वालों पर इस बात का विपरीत असर ना पड़े इसलिए उपरोक्त कहानी गढ़ी गई थी। 

जब नर्गिस को पता चला कि दिलीप कुमार उनके बेटे का रोल कर रहे हैं तो उन्होंने इतनी बड़ी उपलब्धि को भी यह कहते हुए साफ़ इंकार कर दिया कि ''मैं पर्दे पर जिनके साथ रोमांस कर चुकी, उनके साथ माँ-बेटे जैसा रिश्ता निभाना मुझे कतई मंजूर नहीं। अगर दिलीप कुमार बिरजू का रोल करते हैं तो मैं इस फिल्म में काम नहीं कर पाऊंगी।'' 

हुआ यह था कि जब महबूब खान ने अपनी यादगार फिल्म ''औरत'' को दोबारा ''मदर इंडिया'' के नाम से बनाने की सोची, तो कास्टिंग के समय उनके जेहन में बिरजू के रोल के लिए अपने गहरे मित्र दिलीप कुमार का नाम छाया हुआ था। उनको कहानी सुनाई गई ! वे मान भी गए ! पर दिलीप कुमार तो दिलीप कुमार ! उन्हें पता था कि फिल्म नायिका पर केंद्रित है, सारा श्रेय उसे ही मिलने वाला है ! तो भाई ने जगह-जगह कहानी में ज़रा-ज़रा सा बदलाव लाने का सुझाव देना शुरू कर दिया ! फिर इतने से भी काम नहीं बनता दिखा तो उन्होंने अपने लिए डबल रोल की फरमाइश कर डाली। पहले नायिका का पति और फिर उसका लड़का ! जो सुक्खी लाला से अपनी जमीन हासिल करने के लिए लड़ता और जीतता है। यानी पूरी फिल्म  की ! यहां तक कि उन्होंने इस फिल्म का नाम तक भी सुझा दिया ''दिस लैंड इज माईन'' ! महबूब एक सरल ह्रदय इंसान थे, तिस पर दिलीप कुमार के दोस्त, वे इन सब बदलावों के लिए तैयार भी हो गए। उन्हें इस बात का ज़रा सा भी एहसास नहीं हुआ कि उनके दोस्त ने उनकी कहानी की आत्मा को मार, फिल्म को पूर्णतया अपनी बना लिया है और इसकी पूरी तैयारी भी शुरू कर दी है जिसके लिए अपने बाप और बेटे के रोल के लिए स्पेशल विग बनवाने लंदन भी चले गए हैं। 

औरत 

पर विधि को कुछ और ही मंजूर था। ''औरत'' के लेखक वजाहत मिर्जा को यह सब बदलाव बेहद नागवार गुजर रहे थे। उनके अनुसार इस तरह तो कहानी की मूल भावना और उद्देश्य ही ख़त्म हो रहे थे। उन्होंने जब इस बात का पुरजोर विरोध किया तो यूनिट के बाकी लोग भी उनके साथ आ खड़े हुए। इधर जब नर्गिस को, जिन्हें ऐसे ही रोल की सदा से तलाश थी जो उनकी फ़िल्मी जिंदगी का मील का पत्थर साबित हो सके, पता चला कि दिलीप कुमार उनके बेटे का रोल कर रहे हैं तो उन्होंने इतनी उपलब्धि को भी यह कहते हुए साफ़ इंकार कर दिया कि ''मैं पर्दे पर जिनके साथ रोमांस कर चुकी, उनके साथ माँ-बेटे जैसा रिश्ता निभाना मुझे कतई मंजूर नहीं। अगर दिलीप कुमार बिरजू का रोल करते हैं तो मैं इस फिल्म में काम नहीं कर पाऊंगी।'' 

मदर इंडिया 

इन सब के बीच महबूब बुरी तरह उलझ कर रह गए ! एक तरफ जिगरी दोस्त दिलीप कुमार और दूसरी तरफ नर्गिस और उनकी अपनी पूरी टीम ! आखिर फिल्म के हित के लिए उन्हें अपना फैसला बदलना पड़ा। नरगिस को नायिका का रोल सौंपा गया।  दिलीप को समझा-बुझा कर और उनकी इज्जत के लिए नर्गिस की बात को उनकी बता, एक मिथ रच कर उन्हें फिल्म से अलग किया गया। सारे बदलाव रद्द कर पुरानी कहानी को बरकरार रखते हुए ''दिस लैंड इज माईन'' को ''मदर इंडिया'' का नाम दे इतिहास रचा गया। 

@संदर्भ, आभार - राजकुमार केसवानी, पुस्तक-नर्गिस, बन्नी रूबेन  

8 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर आलेख।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

आभार, सुशील जी

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" गुरुवार 03 दिसम्बर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

यशोदा जी
हार्दिक आभार

Meena sharma ने कहा…

एक और अनसुनी कहानी।
कुछ अलग सा....
सादर।

शुभा ने कहा…

वाह!बेहतरीन लेख ।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

मीना जी
अनेकानेक धन्यवाद ! सच्चाई सामने आई पर अर्से के बाद

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शुभा जी
हार्दिक आभार

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