बुधवार, 11 मार्च 2020

दिल्ली, जनकपुरी की RSCB नामक संस्था वर्षों से वरिष्ठ नागरिकों के लिए कार्यरत है

देश की राजधानी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में भी एक ऐसी ही संस्था, Retired & Senior Citizens Brotherhood, कई सालों से समर्पित भाव से वरिष्ठ तथा सेवानिवृत लोगों के लिए कार्यरत है। जो उनकी शारीरिक व मानसिक समस्याओं का हल निकालने में मदद तो करती ही है, साथ ही उनके लिए तरह-तरह की देश-विदेश की यात्राओं का भी आयोजन करती है। इस तरह के कई आयोजन पूरी सफलता के साथ संपन्न हो चुके हैं। ऐसी यात्राओं में सम्मिलित लोगों की आयु, क्षमताओं, आवश्यकताओं को देखते हुए छोटी से छोटी बात का भी पूरी तरह से ध्यान रख कर ही सारे प्रोग्राम की रूपरेखा बनाई जाती है.............!       

#हिन्दी_ब्लागिंग  
समय के साथ-साथ देश-दुनिया-समाज में भी तरह-तरह के उलट-फेर होते रहते हैं। बदलाव होते रहते हैं ! लोगों की सोच बदलती रहती है, समझ बढ़ती है जागरूक लोगों की समाज के प्रति प्रतिबद्धता सामने आती है ! एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का एहसास उत्पन्न होता है ! इसी सब के तहत किसी संवेदनशील इंसान का ध्यान समाज के कुछ उन बुजुर्गों की तरफ भी गया होगा, जिन्होंने अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ समय अपने घर-परिवार-समाज को दिया होता है, पर अब उम्र के इस पड़ाव पर शारीरिक रूप से सक्षम होते हुए भी मानसिक तौर पर अपने-आप को जीवन की दौड़ में अनुपयोगी मान, अलग-थलग पड़ जाते हैं ! शौक होते हुए भी उसे पूरा करने में एक झिझक का अनुभव करते हैं। कहीं आने-जाने में युवाओं के साथ कदम-ताल करते समय पिछड़ने का भय मन में घर कर जाता है। तेजी से बदलती चीजों, नए-नए उपकरणों के साथ कुछ-कुछ अपनी घटती शारीरिक क्षमता उन्हें बाहरी दुनिया के साथ ताल-मेल बैठाने में संकोची बना देती है ! ऐसे में वे सिर्फ घर की चारदीवारी में घिर कर रह जाते हैं ! जिससे एक प्रेमल, केयरिंग तथा समर्पित परिवार का सदस्य होने के बावजूद, रोज एक ही तरह की दिनचर्या  उन्हें कुछ हद तक आलसी, निष्क्रिय, चिड़चिड़ा तथा तनावग्रस्त कर एक अलग ही तरह का जीव बना देती है।

समाज के ऐसे बहुत बड़े तबके को जीवन की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए देश-दुनिया में तरह-तरह की संस्थाएं आगे आईं। जिनका मुख्य ध्येय और उद्देश्य, बिना किसी लाभार्जन के, समाज के वरिष्ठ, वयोवृद्ध, बुजुर्ग लोगों के जीवन में पसरते मरुधर को फिर से हरियाली में बदलने, उनको आत्मविश्वासी बनाने, उनकी नीरस दिनचर्या को बदलने, उन्हें खुश तथा तनाव मुक्त करने का था।

देश की राजधानी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में भी एक ऐसी ही संस्था, Retired & Senior Citizens Brotherhood, कई सालों से समर्पित भाव से वरिष्ठ तथा सेवानिवृत लोगों के लिए कार्यरत है। जो उनकी शारीरिक व मानसिक समस्याओं का हल निकालने, पेंशन संबंधित परेशानियों को सुलझाने, बुजुर्गों के प्रति होने वाली ज्यादितियों में मदद तो करती ही है, साथ ही उनके लिए तरह-तरह की देश-विदेश की यात्राओं का भी आयोजन करती है। इस तरह के कई आयोजन पूरी सफलता के साथ संपन्न हो चुके हैं। ऐसी यात्राओं में सम्मिलित लोगों की आयु, क्षमताओं, आवश्यकताओं को देखते हुए छोटी से छोटी बात को भी पूरी तरह ध्यान में रख कर ही सारे प्रोग्राम की रूपरेखा बनाई जाती है। शुरू में एक मुश्त खर्च ले कर फिर यात्रा की पूरी अवधि में किसी भी तरह का आर्थिक भार नहीं डाला जाता। हाँ व्यक्तिगत शॉपिंग इसमें शामिल नहीं होती। इस तरह के लोग बधाई के पात्र हैं। उनके लिए साधुवाद !!
अभी पिछली 29 फ़रवरी से सात मार्च तक की उनकी केरल यात्रा में मैं भी सपत्नीक शामिल हुआ था। 29 फ़रवरी को सात बजे इंदिरा गांधी टर्मिनल से श्री नरूला जी, जिनके सरल स्वभाव से प्रभावित हो श्रीमती जी ने उनके साथ पिता-पुत्री का रिश्ता गठ डाला, जो एक शांत स्वभाव के हंसमुख, मिलनसार, अनुभवी इंसान हैं, उनके नेतृत्व मे शुरू हुई हवाई यात्रा कब थिरुवनंतपुरम, कन्याकुमारी, अलेप्पी, थेकाड्डी, मुन्नार और कोचीन होते हुए फिर सात मार्च को दोपहर एक बजे वहीं आ कर ख़त्म हो गयी, पता ही नहीं चला ! हालांकि रोज बस और पैदल सफर अत्यधिक थकान उत्पन्न कर देता था पर दूसरे दिन अलसुबह सारे ''युवा वरिष्ठ सदस्य'' बिना किसी देर सबेर, तरोताजा हो आगे के मुकाम के लिए तय समय पर हाजिर रहते थे। मुझे याद नहीं पड़ता कि किसी ने किसी भी दिन जरा सा भी विलंब किया हो। ऐसे जवानों को मेरा ''हैट्स आफ।'' सबसे अच्छी बात यह रही कि 65/66 की औसत उम्र के इस ग्रुप के सदस्यों को तक़रीबन रोज जगह, भोजन, पानी बदलते रहने के बावजूद किसी को भी उदर संबंधी शिकायत पेश नहीं आई ! जबकि इस उम्र में खान-पान में जरा सी लापरवाही या ऊक-चूक परेशानी का सबब बन जाती है।  

इस यात्रा की सफलता में इसका ताना-बाना बुनने वाली कंपनी #रिया_ट्रेवलर्स और उनके सहयोगी #श्री_सिद्दार्थ का भी बहुत बड़ा हाथ था। सिद्दार्थ की तो प्रशंसा करना इसलिए भी लाजिमी है कि पहले दिन से ही उसने सदा मुस्कराते हुए बड़े संयम, धैर्य और शांत रहते हुए हम सब अलग-अलग पैरामीटर वाले लोगों को खुश और संतुष्ट रखा। उनके केरल के सहयोगी जिन्हें सब प्यार से #जीनू कह कर पुकारते रहे उसके स्वभाव का तो वर्णन ही नहीं किया जा सकता। आज के समय में ऐसा सीधा, सरल, मृदु, तत्पर तथा मितभाषी इंसान होना बहुत बड़ी बात है। हम सब इस यात्रा के साथ-साथ उसको भी यथासंभव याद रखेंगे।            

10 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

प्रेरक संस्मरण

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शास्त्री जी
अनेकानेक धन्यवाद ¡

अजय कुमार झा ने कहा…

बहुत ही प्रेरणादायी पहल है | इस सोच को ,सोच का साथ देने वालों और सारी यादों को बहुत बहुत सलाम | शुक्रिया सर इसे साझा करने के लिए

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

अजय जी,
जिसने भी पहले ऐसा सोचा होगा वह स्तुत्य है। इससे जो फर्क पड़ता है उसे मैंने खुद देखा और महसूस किया है। इस टुअर के पहले ब्रीफिंग के समय जब जाने वाले सदस्य इकट्ठा हुए तो ऐसा लगा कि थके-हारे-निर्बल-पस्त, औसत 65/66 की उम्र वालों का समूह हो ! पर यात्रा के पहले दिन से ही एक अलग ऊर्जा वाले लोग सामने आए ! लगता ही नहीं था कि कोई पचास के ऊपर भी है। पूरे आठ दिनों के ''हेक्टिक'' प्रवास के दौरान ना कोई थका, ना बीमार पड़ा ना हीं किसी तरह की शारीरिक शिकायत हुई किसी को ! जबकि तक़रीबन रोज ही जगह, खाना और पानी बदल रहा था !

फर्क तो पड़ता ही है तनाव रहित परिवेश का।

Kamini Sinha ने कहा…

एक प्रेरणादायक संस्मरण और यात्रा ,बहुत महत्वपूर्ण जानकारी दी आपने ,सादर नमन हैं उन सभी को जिन्होंने ये भावनावों से परिपूर्ण एक नया कार्यक्रम शुरू किया हैं। ,आपको भी आभार जो आपने ये जानकारी हमसे साझा की ,सादर नमन

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

कामिनी जी
सद्प्रयास चाहे कैसा भो हो बढावा जरूर मिलना चाहिए

संजय भास्‍कर ने कहा…

प्रेरणादायी संस्मरण

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

संजय जी
अनेकानेक धन्यवाद

Kamini Sinha ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Kamini Sinha ने कहा…

सादर नमस्कार ,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (17 -3-2020 ) को मन,मानव और मानवता (चर्चा अंक 3643) पर भी होगी,

आप भी सादर आमंत्रित हैं।
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कामिनी सिन्हा

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