मंगलवार, 17 मार्च 2020

पूरब का वेनिस. केरल का अलेप्पी नगर।

बैक वाटर नौका विहार के दौरान लैगूनों पर रहने वालों को अपने काम-काज में रत देखा। उनके मुख्य स्थल पर आने-जाने के लिए शहरों की बस सेवा की तरह वहां छोटे-बड़े स्टीमरों की फेरी की सेवा उपलब्ध है, पर तक़रीबन हर घर के सामने हैसियत के अनुसार छोटी-बड़ी-सामान्य-सुंदर-मोटर चालित हर तरह की नौकाएं बंधी दिखाई पड़ती हैं। जैसी मैदानी इलाकों में स्कूटर,बाइक या कारें खड़ी रहती हैं...........!
#हिन्दी_ब्लागिंग 
केरल का एक छोटा सा नगर अलेप्पी, जिसे अलाप्पुझा के नाम से भी जाना जाता है। यह त्रिवेंद्रम से तक़रीबन डेढ़ सौ की.मी. की दुरी पर समुद्र के किनारे स्थित है। इसका मुख्य आकर्षण हरे-भरे वृक्षों, पौधों, गुल्मों, लताओं, जिनमें नारियल के पेड़ों की प्रमुखता होती है, के किनारे ठहरे हुए पानी में धीमी गति से नौका विहार है। जिसका एक अलग ही रोमांच है। यह केरल के बैक वॉटर पर्यटन का सबसे लोकप्रिय केंद्र है। 
केरल की सबसे पुरानी परंपराओं में से एक विश्व प्रसिद्ध सालाना "स्नेक बोट रेस" का आयोजन यहीं किया जाता है। ''नेहरू ट्रॉफ़ी बोट रेस'', जिसे स्थानीय भाषा में वल्लमकली कहलाने वाला यह एक भव्य आयोजन है, जिसे अगस्त और सितंबर माह के बीच आयोजित किया जाता है। ये नौका दौड़ आमतौर पर फसल के मौसम के दौरान आयोजित की जाती है। 


धान के खेत में खड़ा रेस्त्रां 
गदा नुमा वातानुकूलन 
इसमें कई नाविक एक साथ सम्मोहित करने वाले समन्वय के साथ पूरे वेग से कतारबद्ध होकर लगभग 100 फिट लंबी नौकाओं का संचालन करते हैं।पुन्नमडाकायल झील पर बड़ी तादाद में देश -विदेश के लोग एकत्रित हो इस अनोखी रेस का आनंद उठाते हैं। 1952 से शुरू हुआ यह रोमांचकारी खेल आज भी उतने ही जोशो-खरोश से खेला और देखा जाता है।
होटल 



लैगून पर बसे घर 
हमारा जाना तो मार्च में हुआ था सो हमने बैक वॉटर में क्रूज और नौका के मिले-जुले रूप तथाकथित हाउसबोट में सवार हो करीब डेढ़ घंटे तक मंथर गति से घूमते हुए प्रकृति के इस अनोखे रूप का आस्वादन किया। इसी सफर के दौरान लैगूनों पर रहने वालों को अपने काम-काज में रत देखा। उनके मुख्य स्थल पर आने-जाने के लिए शहरों की बस सेवा की तरह वहां छोटे-बड़े स्टीमरों की फेरी की सेवा उपलब्ध है पर तक़रीबन हर घर के सामने हैसियत के अनुसार छोटी-बड़ी-सामान्य-सुंदर-मोटर चालित हर तरह की नौकाएं बंधी दिखाई पड़ती हैं। जैसी मैदानी इलाकों में स्कूटर,बाइक या कारें खड़ी रहती हैं। अभी तो स्वच्छ हवा-पानी और प्रकृति की गोद में उनका रहन-सहन बहुत लुभावना और मनभावक लग रहा था पर हम में से कोई भी उस समय की कल्पना नहीं कर सकता था जब यही कायनात बरसात के मौसम में अपना रौद्र रूप धारण कर कहर बरपाने लगती है !  


घर का वाहन 
त्रिवेंद्रम से पिछले दिन की कन्याकुमारी की यात्रा की तरह ही सुबह जल्द निकलना हुआ। यात्रा की शुरुआत गायत्री मंत्र की तीन आवृतियों और कुछेक भजनों के बाद गानों का तथा अंतराक्षरी का जो दौर शुरू हुआ वह तीन घंटे के बाद दोपहर के भोजन की आवश्यकता को देखते हुए ही थमा। हमारे लिए अलेप्पी में तीन बजे नौका, जिसे द्वितलीय बजरा कहना ज्यादा मुनासिब होगा, इंतजार कर रहा था। आज की रात अलेप्पी में ही बितानी तय थी सो होटल में ''चेक इन'' कर कुछ दूर खड़े बजरे पर सवार हो गए। हालांकि नौका विहार का मौका विभिन्न शहरों में कई बार मिल चुका है पर यहां यही कहा जा सकता है कि यह अनुभव अद्भुत था। 


सूर्यास्त होने वाला था ! 6.45 पर क्षितिज पर सूर्य और सागर के मिलन के उस अलौकिक, दर्शनीय व अद्भुत प्राकृतिक लम्हे को अपनी आँखों और कैमरों में कैद करने के  करने के लिए हर कोई बेचैन था ! सो पहुंच गए अलेप्पी ''सी बीच'', उस अस्मरणीय पल का गवाह बनने।



विदाई 
ग्रहाधिराज की भाव-भीनी विदाई हुई ! मस्ती की गई ! चाय वगैरह छकी गई और लौटना हुआ होटल ! अभी आठ भी नहीं बजे थे तो सिद्दार्थ ने रात्रिभोज के पहले एक राउंड ''म्यूजिकल चेयर'' का प्रपोजल रखा जो सहर्ष स्वीकार हुआ। फिर डिनर और निद्रा का आह्वान ! 
कल फिर पेरियार जो जाना था ! 

6 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (18-03-2020) को    "ऐ कोरोना वाले वायरस"    (चर्चा अंक 3644)    पर भी होगी। 
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
 -- 
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शास्त्री जी
यूं ही स्नेह बना रहे

Kamini Sinha ने कहा…

केरल का सुंदर चित्रण ,बड़ी सुंदर यात्रा वृतांत ,सादर नमन

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

कामिनी जी
बहुत-बहुत आभार

विकास नैनवाल 'अंजान' ने कहा…

रोचक यात्रा रही। दक्षिण भारत की तरफ मुझे भी कभी निकलना है। उम्मीद है इस साल यह स्वप्न पूरा होगा। अगली कड़ी का इन्तजार रहेगा।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

विकास जी
यह हमारा सौभाग्य है कि प्रकृति ने खुल कर अपना स्नेह लुटाया हमारे देश पर

विशिष्ट पोस्ट

गांव से माँ का आना

अधिकतर  संतान द्वारा बूढ़े माँ-बाप की बेकद्री, अवहेलना, बेइज्जती इत्यादि को मुद्दा बना कर कथाएं गढ़ी जाती रही हैं !  होते होंगे ऐसे नाशुक्रे ल...