शनिवार, 3 जुलाई 2010

तलाक है कि मजाक है :-)

बैंकाक में एक किसान ने अदालत में अपनी बीवी को तलाक देने के लिए अर्जी दी। जानते हैं कब, अपनी शादी की 73वीं सालगिरह पर। और कारण बताया कि हम दोनों का स्वभाव मेल नहीं खाता।

जापान के एक पति महोदय अपनी पत्नी से तलाक लेकर इतने खुश थे कि इस दिन को हर साल मुक्ति दिवस के रूप में मनाया करते थे। वर्षों बाद ऐसे ही एक मुक्ति दिवस समारोह में उनकी मुलाकात अपनी उसी भूतपूर्व पत्नी से हो गयी।
फिर? फिर क्या, वे दोनो फिर पति-पत्नी बन गये।

सुप्रसिद्ध हालिवुड़ अभिनेत्री एलिजाबेथ टेलर और अभिनेता रिचर्ड़ बर्टन एक दूसरे से तीन-तीन बार तलाक लेने के बाद फिर-फिर आपस में शादी के बंधन में बंधते रहे थे।

7 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

शर्मा जी पहले तो कुल्लू मनाळी मै घुमा दिया, अब तलाक के किस्से, वेसे यह मुक्ति दिवस तो जरुर मनाना चाहिये:)

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

ऐसी मुक्ति क्या काम की जो फ़िर से गुलामी की ओर ले जाए।
और अगर गुलामी ही करनी है तो एक ही मालिक की करों।
एक स्थान पर पड़ा हुआ पत्थर भी कुछ काल के बाद भगवान हो जाता है।

:):):)

निर्मला कपिला ने कहा…

दुनिया अजब गजब । शुभकामनायें

समय चक्र ने कहा…

अजी बुढ़ापे में स्वभाव कहाँ मेल खाते हैं ....पचास के बाद दरकन शुरू हो जाती है फिर तो चुहत्तर की बात है ....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

लतीफा सुखान्त रहा!
--
पढ़कर आशा ने अँगड़ाई ली!

राजकुमार सोनी ने कहा…

विचारणीय पोस्ट। ये तो सोचना ही होगा कि आखिर ऐसा होता क्यों रहा। अपने देश में भी ये समस्या अब जरूरत से ज्यादा बढ़ गई है।

आपका अख्तर खान अकेला ने कहा…

sch khaa aaaapne tlaq aek mzaaq bn gyaa he iske liyen szza kaa qaanun honaa chaahiye. akhtar khan akela kota rajsthan

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