शुक्रवार, 10 जून 2011

जहां चाह है वहां राह है


मनुष्य प्रकृति का वह अजूबा है जिसे कोई भी रुकावट रोक नहीं सकती। उसके धड़ के ऊपर स्थित कारखाने में छोटी से छोटी अड़चनों से लेकर बड़ी से बड़ी मुश्किलों के हल निरंतर निकलते रहते हैं।
विश्वास ना हो तो देख लें -




















7 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

काम का ब्लाग है आपका तो,
अजब गजब सब गजब

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

good...

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

भई वाह शर्मा जी! अच्छे चित्र समेटे हैं॥

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

स्वीमिंग पुल कमाल का है जी।
अच्छा आईडिया है।
कभी इस्तेमाल किया जा सकता है:)

निर्मला कपिला ने कहा…

सही बात है।

Chetan ने कहा…

computer wala to shuru kar hi deta hoon