रविवार, 18 जुलाई 2010

कुछ ही.....ही, हा......हा, हो जाए

रविवार का दिन है, आईए कुछ ही..ही.., हा..हा.. हो जाए

@ भाषण चल रहा था। नेताजी बार-बार कह रहे थे कि हमें अपने पैरों पर खड़े होना है। तभी भीड़ के पीछे से कोई चिल्लाया, अरे साहब हम तो कब से कोशिश कर रहे हैं पर यह हवलदार हमें जबरदस्ती बैठा देता है।

@ एक आदमी अपना सर पकड़े डाक्टर के पास आ कर अपनी नकली टांग की तरफ इशारा कर बोला, डाक्टर साहब, इस लकड़ी की टांग के कारण मेरे सर में दर्द हो रहा है।
नकली टांग से सर में कैसे दर्द हो सकता है? डाक्टर ने आश्चर्य से पूछा।
असल में आज मेरी बीवी ने इसे उठा कर मेरे सर पर दे मारा है।

@ दादाजी ने अपने पोते का साधारण ज्ञान परखने के लिए पूछा, बताओ बगुला तालाब में एक टांग पर क्यों खड़ा होकर मछलियां पकड़ता है?
आप भी दादाजी!!!, अरे दोनों पैर उठा लेगा तो गिर नहीं पड़ेगा क्या ?

@ श्रीमतीजी ने पूछा, ए जी, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर में क्या अंतर होता है? वही जो तुम्हारे मुझसे मांग कर पैसे लेने और चुपचाप निकाल लेने में होता है।
श्रीमानजी ने जवाब दिया।

9 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

हा-हा और ही-ही!

AlbelaKhatri.com ने कहा…

hu hu hu hu hu hu hu

राज भाटिय़ा ने कहा…

हा-हा ही-ही हूं हूं

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

...बेहतरीन!!!

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत मजेदार!

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

हा हा हा बहुत बढ़िया

राजकुमार सोनी ने कहा…

मजेदार.. मजा आ गया

हमारीवाणी.कॉम ने कहा…

हिंदी ब्लॉग लेखकों के लिए खुशखबरी -


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हमारीवाणी.कॉम

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

:) बढिया!