"कलशे पानी गर्म हो, चिडी न्हावे जब धूल,
जब चींटी अंडा ले चढ़े , वर्षा होसी भरपूर। "
जब घडे में पानी ठंडा न हो, चिडिया धूल में लोटने लगे, चींटियाँ अपने अण्डों को ले ऊंची जगहों पर जाने लगें तो समझ लेना चाहिए कि पानी बरसने वाला है।
"उल्टे गिरगिट ऊंचे चढ़े, बरखा होई भुई जल बढे।"
यदि गिरगिट पेडों पर उलटा चढ़ता दिखे तो बस पानी बरसा ही समझो।
"आगे रवि पीछे मंगल, जो आषाढ़ बरसे , अनमोल हो धरती, उमगें बाढ़।"
आषाढ़ के माह में यदि पहले मंगलवार और बाद में रविवार पड़े तो अच्छी बारिश होती है।
"टोली मिल की कांवली , आय थलां बैठत, दिन चौथे के पांचवें, जल-थल एक करत।"
चीलें जब जमीन पर आकर बैठें तो चार-पाँच दिनों में पानी अवश्य बरसता है।
***************************
चलते-चलते :- बरसात के मौसम में एक आदमी की कार कीचड़ मे फंस गयी। तभी उधर से संता अपने बैल के साथ निकला। उस आदमी ने संता से गुजारिश की कि उसकी गाड़ी को निकलवाने मे मदद करे। संता तो सदा दूसरों की भलाई ही करता रहता है। वह तुरंत तैयार हो गया। उसने अपने बैल को गाड़ी के आगे बांधा और बोला, चल बेटा भोलू जोर लगा। चल मुन्ना जोर से खींच, चल मोहन शाब्बाश जोर लगा के, हां बेटा मोती पीछे ना रहना खींच ले।संता का मोती नाम लेना था कि बैल ने एक झटके से गाड़ी खींच कर बाहर निकाल दी। गाड़ीवाले ने अचंभित हो पूछा, भाई जब तुम्हारे बैल का नाम मोती है तो तुमने पहले इसका नाम ना ले और तीन नाम क्यों पुकारे। संता मुस्कुराया और आदमी को एक किनारे ले जा धीरे से बोला, जनाब मेरा बैल अंधा है। तीन और नाम लेने से उसे लगता है कि वह अकेला नहीं है उसके साथ और भी बैल हैं सो वह काम में लग जाता है। यदि उसे पता चल जाये कि वह अकेला ही जुता हुआ है तो अड़ जाता है।
गाड़ी वाले भाई का मुंह खुले का खुला रह गया।
जब चींटी अंडा ले चढ़े , वर्षा होसी भरपूर। "
जब घडे में पानी ठंडा न हो, चिडिया धूल में लोटने लगे, चींटियाँ अपने अण्डों को ले ऊंची जगहों पर जाने लगें तो समझ लेना चाहिए कि पानी बरसने वाला है।
"उल्टे गिरगिट ऊंचे चढ़े, बरखा होई भुई जल बढे।"
यदि गिरगिट पेडों पर उलटा चढ़ता दिखे तो बस पानी बरसा ही समझो।
"आगे रवि पीछे मंगल, जो आषाढ़ बरसे , अनमोल हो धरती, उमगें बाढ़।"
आषाढ़ के माह में यदि पहले मंगलवार और बाद में रविवार पड़े तो अच्छी बारिश होती है।
"टोली मिल की कांवली , आय थलां बैठत, दिन चौथे के पांचवें, जल-थल एक करत।"
चीलें जब जमीन पर आकर बैठें तो चार-पाँच दिनों में पानी अवश्य बरसता है।
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चलते-चलते :- बरसात के मौसम में एक आदमी की कार कीचड़ मे फंस गयी। तभी उधर से संता अपने बैल के साथ निकला। उस आदमी ने संता से गुजारिश की कि उसकी गाड़ी को निकलवाने मे मदद करे। संता तो सदा दूसरों की भलाई ही करता रहता है। वह तुरंत तैयार हो गया। उसने अपने बैल को गाड़ी के आगे बांधा और बोला, चल बेटा भोलू जोर लगा। चल मुन्ना जोर से खींच, चल मोहन शाब्बाश जोर लगा के, हां बेटा मोती पीछे ना रहना खींच ले।संता का मोती नाम लेना था कि बैल ने एक झटके से गाड़ी खींच कर बाहर निकाल दी। गाड़ीवाले ने अचंभित हो पूछा, भाई जब तुम्हारे बैल का नाम मोती है तो तुमने पहले इसका नाम ना ले और तीन नाम क्यों पुकारे। संता मुस्कुराया और आदमी को एक किनारे ले जा धीरे से बोला, जनाब मेरा बैल अंधा है। तीन और नाम लेने से उसे लगता है कि वह अकेला नहीं है उसके साथ और भी बैल हैं सो वह काम में लग जाता है। यदि उसे पता चल जाये कि वह अकेला ही जुता हुआ है तो अड़ जाता है।
गाड़ी वाले भाई का मुंह खुले का खुला रह गया।