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बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

कारूं का खजाना ¡ एक बतकही, कारूं पर



भानुमति का पिटारा, छज्जू का चौबारा जैसी अपनी विशेषताओं के लिए मुहावरों और लोकोक्तियों के अति प्रसिद्ध पात्रों की श्रृंखला की तीसरी कड़ी कारूं का  खजाना ! कौन था यह कारूं ? जो कहीं भी बेहिसाब दौलत का जिक्र आते ही सामने आ खड़ा होता है ! जिसके बारे में यह प्रचलित था कि वह यूनानी राजा ''मिडास'' का वंशज है। क्या यह कोई काल्पनिक पात्र था या वास्तव में इसका वजूद था ................!

#हिन्दी_ब्लागिंग 
कभी-कभी समय के साथ-साथ कल्पित कथा-कहानियां या उसके पात्र हमसे इतने घुल-मिल जाते हैं कि हम उन्हें वास्तविक समझने लगने लगते हैं और इसके उलट कभी-कभी वास्तविक घटनाएं, पात्र और उनके द्वारा किए गए मानवेत्तर कार्य इतने लोकप्रिय हो जाते हैं कि लोकोक्तियां या मुहावरे बन, वास्तविकता और कल्पना की सीमा को ही ख़त्म कर देते हैं ! ऐसा ही एक पात्र है कारूं ! बेहिसाब दौलत का जब कहीं भी जिक्र होता है तो कारूं के खजाने का मुहावरे के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है ! भारत में यह मुहावरा फ़ारसी से आया है। जहां कारूं का उल्लेख कारून के रूप में मिलता है। अंग्रेजी में यही कारून, क्रोशस के रूप में उल्लेखित है ! जहां ''एज़ रिच एज़ क्रोशस'' वाक्य मशहूर है। कौन था यह शख्स ? क्या यह कोई काल्पनिक पात्र था या वास्तव में इसका वजूद था ? इतिहास के सागर में यदि गोता मारा जाए तो यह सच सामने आता है कि यह नाम कोई कोरी कल्पना नहीं है। कभी इस नाम का एक बहुत ही धनी राजा हुआ था पर वह जितना ऐश्वर्यवान था उतना ही महाकंजूस तथा घमंडी भी था।   
कारूं 
ईसा से 560 से 547 वर्ष पूर्व एशिया माइनर यानी आज की टर्की में लीडियन साम्राज्य के राजा क्रोशस का शासन था, जिसकी राजधानी सार्डिस थी। उसके बारे में यह प्रचलित था कि वह यूनानी राजा ''मिडास'' का वंशज है। हो सकता है यह धारणा उसके स्वर्ण के प्रति अत्यधिक मोह के कारण बनी हो ! उसके राज्य में ढेरों सोने की खदानों के अलावा राज्य में से हो कर बहती नदियों में भी प्रचुरता से स्वर्ण कणों की उपलब्धता थी। लीडिया की धरती उस समय सोने का पर्याय बन गयी थी। उसकी समृद्धि, धन-वैभव, विशाल व असाधारण खजाने की ख्याति देश-विदेश में चारों ओर फैली हुई थी। पर इतनी अकूत संपत्ति का स्वामी होने के बावजूद वह पर्ले दर्जे का घमंडी व कंजूस था। पर इसके बावजूद उसने दुनिया को एक अनोखी देन भी दी थी और वह है टकसाल ! क्रोशस से पहले सिक्के ठोक-पीट कर बनाए जाते थे पर उसने सोने को ढाल कर इलेक्ट्रम नामक स्वर्णमुद्रा की ईजाद की जिसकी गुणवत्ता बनाए रखने पर बड़ी कड़ाई से ध्यान रखा गया। इसके अलावा वह पहला एशियाई राजा था जिसने यूनान पर अपना अधिकार स्थापित किया। 
ढली हुई स्वर्णमुद्रा 
सदियाँ बीत गयीं उस रहस्यमय खजाने पर समय की धूल जमती चली गई ! वह अप्रतिम खजाने का क्या हश्र हुआ यह सवाल अभी तक सुलझ नहीं पाया है। ऐसा माना जाता है कि वह विशाल धन भंडार किसी शाप की वजह से तुर्की के उसाक प्रांत में जमींदोज हो गया है और जो कोई भी उसको हासिल करने की कोशिश करेगा उसकी या तो मौत हो जाएगी या बहुत नुकसान झेलना पडेगा ! पर दुनिया में साहसियों, हठधर्मियों और सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास न करने वालों की बड़ी-पूरी जमात है ! ऐसे ही लोग समय-समय पर उस खजाने को हथियाने की कोशिश करते रहे हैं ! बहुतों को बहुत कुछ हासिल भी हुआ, पर वे उसका उपयोग कुछ दिनों तक ही कर पाए और किसी न किसी हादसे का शिकार हो गए ! 
इसके बावजूद भी बीच-बीच में तुर्की के आस-पास लालचवश या जरुरत के लिए हुए खनन इत्यादि में तरह-तरह के आभूषण, सोने-चांदी के पात्र, स्वर्णमुद्राएँ और सोने से भरे बर्तन मिलने की ख़बरें आती रहती हैं, पर साथ ही प्राप्तकर्ता के साथ हुए हादसों का जिक्र भी होता है ! इससे यह धारणा और भी पुख्ता होती जाती है कि यह खजाना शापित है ! खजाना तो है इसका प्रमाण है यहां से प्राप्त अमूल्य वस्तुओं में से करीब 363 वे नायाब और अमूल्य कलाकृतियां जो टर्की के म्यूजियम में सुरक्षित रखी हुए हैं ! वास्तविकता चाहे जो हो पर जब तक यह कायनात रहेगी, कारूं के खजाने की चर्चा और लोकोक्ति भी जीवित रहेगी। 

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

ब्लैक फ्राइडे, अजीब से नाम वाला एक खरीददारी दिवस

इस दिन से ही अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों में क्रिसमस की खरीददारी की शुरुआत होती है। इस दिन बडी-बडी कंपनियां तरह-तरह के ऑफर तो देती ही हैं, बाजार के छोटे तथा खुदरा व्यापारी भी ग्राहकों को लुभाने और खरीदने को प्रेरित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। पिछले कई सालों से यह दिन खरीददारी का सबसे व्यस्त, बड़ा और लाभप्रद दिन माना जाता है। इसकी कुछ-कुछ तुलना हम अपने यहां के ''धन तेरस'' या चीन के "सिंगल या बैचलर डे''  से कर सकते हैं पर बिक्री के लिहाज से इसकी कोई बराबरी नहीं है.........!

#हिन्दी_ब्लागिंग     
पश्चिमी देशों में बाइबल से जुड़े होने के कारण शुक्रवार का एक अलग महत्व तो है ही उसके अलावा सप्ताहंत दिवस होने के कारण भी यह महत्वपूर्ण हो जाता है, और यदि वह किसी उत्सव से जुड़ जाए तो ? ऐसा ही एक शुक्रवार है ''ब्लैक फ्राइडे'' यानी काला शुक्रवार ! नाम जरूर अजीब है पर इस दिन से ही वहां क्रिसमस की खरीदारी की शुरुआत होती है। इस दिन बडी बडी कंपनियां तरह-तरह के ऑफर तो देती ही हैं, बाजार के छोटे तथा खुदरा व्यापारी भी ग्राहकों को लुभाने और खरीदने को प्रेरित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। पिछले कई सालों से यह दिन खरीददारी का सबसे व्यस्त, बड़ा और लाभप्रद दिन माना जाता है। इसकी कुछ-कुछ तुलना हम अपने यहां के ''धन तेरस'' या चीन के "सिंगल या बैचलर डे''  से कर सकते हैं पर बिक्री के लिहाज से इसकी कोई बराबरी नहीं है।


अमेरिका का एक दिन है थैंक्स-गिविंग डे यानि धन्यवाद दिवस ! जो नवंबर के चौथे गुरुवार को मनाया जाता है। यह हमारे यहां मनाए जाने वाले फसल पर्व की तरह ही है। वहां नवंबर तक फसलों की कटाई हो जाती है, इस काम में आपसी सहयोग के लिए, एक-दूसरे का आभार जताने के लिए इसे मनाते हैं। यह वहां का राष्ट्रीय पर्व है।  इसीके अगले दिन को ब्लैक फ्राइडे कहते हैं, जो तक़रीबन 23 और 29 नवम्बर के बीच आता है। इसी दिन से पारंपरिक तौर पर क्रिसमस की खरीदारी की शुरुआत होती है। इस मोके पर कई विक्रेता अपनी दुकानें बहुत जल्दी, अक्सर 4.00 बजे सबेरे या उससे भी पहले खोल लेते हैं और बिक्री बढ़ाने और ग्राहकों को लुभाने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन यथा, ब्‍लैक फ्राइडे डील, स्‍पेशल सेल, क्रिसमस छूट जैसे ऑफर मार्केट में पेश करते हैं। कुछ खुदरा विक्रेता तो इस तिमाही में इतना कमा लेते हैं कि उन्हें वर्ष भर का मुनाफ़ा मिल जाता है। ब्लैक फ्राइडे अमेरिका में एक उत्‍सव की तरह मनाया जाता है। वैसे यह छुट्टी का दिन नहीं होता लेकिन बहुत से नियोक्ता अपने कर्मचारियों को इस दिन छुट्टी दे देते हैं जिससे बाजार में ग्राहकों की संख्या में कई गुना इजाफा हो जाता है।




अब सवाल यह है कि जब यह ग्राहकों के लिए खरीदारी, मौज-मस्ती वाला दिन है, अगर यह दिन खुदरा विक्रेताओं के लिए वर्ष की बिक्री का सबसे बड़ा दिन है तो इसे ब्लैक फ्राइडे क्यों कहा जाता है ? देखा जाए तो यह नाम उन लोगों द्वारा पड़ा, जिनकी मुसीबत इस दिन बढ़ जाती है ! चूँकि यह दिन वर्ष का सबसे व्यस्त खरीदारी का दिन होता है और लगता है, जैसे देश का हर वाशिंदा कुछ न कुछ खरीदने को बाजार में आ निकला है ! लोग जमकर खरीदारी का आनंद लेते हैं, जैसे आज नहीं तो फिर नहीं। इसी कारण वहां गलियों, सड़कों, दुकानों, बाजार-हाट में इतनी भीड़ बढ़ जाती है कि व्यवस्था बनाए रखना और उसे संभालना, यातायात को सुचारु बनाए रखना पुलिस के लिए दूभर हो जाता है। सार्वजनिक वाहनों का चलना-चलाना कष्टसाध्य हो जाता है। दुकानों के रास्ते जाम हो जाते हैं, स्वचालित सीढ़ियों पर लोगों का अंबार लग जाता है, बेकाबू भीड़ का कोई ओर-छोर नहीं होता ! इसी वजह से कई असामान्य व प्रतिकूल परिस्थितियां भी बन जाती हैं, जिनकी वजह से  पुलिस की मुसीबतें-परेशानियां और दिनों की अपेक्षा ज्यादा बढ़ जाती हैं। टैक्सी और बस चालक घंटों जाम में फसे रहने के कारण इस दिन को मुसीबत भरा, सिर दर्द व तनाव बढ़ाने वाला मानते हैं ! उनके अलावा इस दिन परेशान होने वाले वे लोग भी हैं जो दुकानों इत्यादि में काम करते हैं, इस दिन उन्हें अतिरिक्त मेहनत से बिना थके काम करना पड़ता है ! यह कर्मचारियों के लिए कड़ी मेहनत का एक लंबा दिन होता है। इन्हीं सब के चलते इस दिन को ये सब लोग 'ब्लैक फ्राइडे' कहने लग गए जो धीरे-धीरे इस दिन का पर्याय ही बन गया।


विदेशी वस्तुओं, फैशन, रहन-सहन और आयातित त्योहारों की तरह भले ही हम इसे भी अपने यहां मनाने लग जाएं पर दुनिया के कई देश इस दिन को फिजूल और बिना जरुरत की खरीददारी से जोड कर देखते हुए इसे  ''बाय नथिंग डे'' के रूप में मनाते हैं। इस दिन ख़ासकर खरीददारी का विरोध किया जाता है। लोग अपने क्रेडिट कार्ड्स तक को जला देते है और खरीददारी न करने का भी मैसेज प्रचारित-प्रसारित करते हैं ! दुनिया के करीब 65 देश इस दिन को नकारात्मक दिवस के रूप में मनाते है। जिनमें जापान, नीदरलैंड, नार्वे, फ्रांस और युनाइटेड किंगडम जैसे देश शामिल हैं। काश ! हम ''उनसे'' नहीं ''इनसे'' कुछ सीखें ! 

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