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रविवार, 14 अगस्त 2022

स्वतंत्रता दिवस और लाल किला

ब्रिटिश हुकूमत ने आजाद हिंद फौज के जांबाजों, जी एस ढिल्लन, कैप्टन शाहनवाज तथा कैप्टन सहगल पर यहीं मुकदमा चला उन्हें सजा देने की कोशिश की थी, पर उस समय सारा देश उनके पीछे खड़ा हो गया था। प्रचंड विरोध छा गया था पूरे देश में और डर के मारे अंग्रेजों को उन वीरों को मुक्त करना पड़ गया था। देश में विजयोत्सव मनाया गया और लाल किला उस विजय का प्रतीक बन गया। इसीलिए जब हमें आजादी मिली तब देश के पहले प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरु ने सर्वसम्मति से इसे पहले स्वतंत्रता दिवस पर झंडोतोलन के लिए सबसे उपयुक्त स्थल मान यहां से सारे राष्ट्र को संबोधित किया.......!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

स्वतंत्र भारत की पहली सुबह की अगवानी ! सारा देश रात भर सो ना पाया था ! अंग्रेजों के चंगुल से लहूलुहान स्वतंत्रता को छीन लाने में हजारों-हजार देशवासी मौत का आलिंगन कर चुके थे ! आखिर उनकी शहादत रंग लाई थी ! सारा देश जैसे सड़कों पर उतर आया था। लोगों की आंखें भरी पड़ी थीं खुशी और गम के आंसूओं से ! खुशी आजादी की, गम प्रियजनों के बिछोह का... !

आजादी का जश्न 
दिल्ली तो जैसे पगला सी गई थी। होती भी क्यों ना, आजाद देश की राजधानी जो थी ! रात के अँधेरे में भी नाचते-गाते लोगों के हुजूम के हुजूम, ठट्ठ के ठट्ठ बढ़े चले जा रहे थे, लाल किले की ओर ! हवा में भी जैसे स्वतंत्रता की भीनी-भीनी सुगंध घुल गई थी !आज यह एतिहासिक किला भी फूला नहीं समा रहा था अपने भाग्य पर ! बहुत उतार- चढ़ाव देख रखे थे, इसने अपने जीवन काल में ! जबसे शाहजहां, ने उस जमाने में करीब एक करोड़ की लागत से इसे नौ सालों में बनवा कर पूरा किया था, तब से आज तक यह अनगिनत घटनाओं का साक्षी रहा है ! देश के प्रमुख किले के खिताब का गौरव  इसे ऐसे ही नहीं मिल गया ! 
जहां यह किला मुगलों की शानो-शौकत का गवाह रहा था, वहीं करीब दो सौ साल बाद, अंतिम मुग़ल बादशाह की दर्दनाक मौत का अभिसाक्षी भी इसे बनना पड़ा ! सन 1857 की क्रांति में स्वतंत्रता संग्राम के वीरों ने अंग्रेजों को मात दे कर यहीं बहादुर शाह जफर को अपना सम्राट चुना था ! किला गवाह है, उस इतिहास का कि कैसे बदला लेने के लिए अंग्रेजों ने मौत का तांडव शुरु कर दिया था ! हजारों निहत्थे, बेकसूर, मासूम लोग मौत के घात उतार दिए गए ! कितनों को फांसी पर लटका दिया गया ! सैंकडों को काला पानी नसीब हुआ ! बुढे, बीमार, मजलूम बादशाह को कैद कर रंगून भेज दिया गया ! कितनी मांगें सूनी हो गईं ! कितनी गोदें उजड़ गईं ! कितनी आँखों का पानी सूख गया था ! जिनका कोई हिसाब नहीं ! इंसान का वहशीपन जैसे सजीव हो उठा था ! 
ऐसा नहीं है कि इसके पहले या बाद में इस दुर्ग ने जुल्मों-सितम नहीं देखे ! सालों बाद एक बार फिर 1945 में ब्रिटिश हुकूमत ने आजाद हिंद फौज के जांबाजों, जी एस ढिल्लन, कैप्टन शाहनवाज तथा कैप्टन सहगल पर यहीं मुकदमा चला उन्हें सजा देने की कोशिश की थी ! पर उस समय सारा देश उनके पीछे खड़ा हो गया था ! प्रचंड विरोध छा गया था पूरे देश में ! डर के मारे अंग्रेजों को उन वीरों को मुक्त करना पड़ गया था ! देश में विजयोत्सव मनाया गया और लाल किला उस विजय का प्रतीक बन गया ! इसीलिए जब हमें आजादी मिली तब देश के पहले प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरु ने सर्वसम्मति से इसे पहले स्वतंत्रता दिवस पर झंडोत्तोलन के लिए सबसे उपयुक्त स्थल मान, यहां से सारे राष्ट्र को संबोधित किया था ! उसके बाद से आज तक देश का हर प्रधान मंत्री यहां से झंडा फहरा कर अपने आप को गौरवांन्वित महसूस करता है ! यह किला हमारी आन-बान-शान का प्रतीक बन, गर्व से सर उठाए खड़ा है !
आप सभी को, असंख्य विडंबनाओं के बावजूद, देश की आजादी की 75 वीं सालगिरह पर अनेकानेक शुभकामनाएं ! हमारा देश दुनिया का सिरमौर बने ! सभी देशवासी सदा सुरक्षित, सुखी, स्वस्थ व प्रसन्न रहें ! यही कामना है !

वंदे मातरम, जय हिंद  

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