सुधीर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सुधीर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 18 दिसंबर 2025

धोनी के राम बाबू , भारतीय क्रिकेट के सुपरफैन (2)

धोनी बेहतरीन खिलाडियों में से एक हैं, इसमें कोई शक नहीं, पर उनका ईगो भी बहुत बड़ा है ! इसी ईगो के चलते कई बार सही-गलत अफवाहें भी सामने आती रही हैं ! अपने सीनियर खिलाडियों से उनकी ''तनातनी'' कोई दबी-छुपी बात भी नहीं है ! हो सकता है कि सुधीर को देख उन्हें भी अपने लिए भी वैसे ही किसी प्रशंसक की जरुरत महसूस होने लगी हो और सामने राम बाबू को पा कर सुधीर की एक रेप्लिका अपने नाम से क्रिकेट जगत में प्रोजेक्ट कर दी  हो ! हो सकता है कि यह गलत हो, पर लगता तो है.......!  

#हिन्दी_ब्लागिंग 

पि छले अंक में भारतीय क्रिकेट के एक तरह से सबसे बड़े फैन सुधीर कुमार चौधरी की बात की थी ! जिनके क्रिकेट के प्रति जुनून ने उनकी जिंदगी बदल दी ! आज इस खेल से जुड़ा हुआ तकरीबन हर खेल प्रेमी उनका नाम जानता है ! आज वैसे ही एक और व्यक्ति की बात ! ये भी सुधीर की तरह ही मैदान की दर्शक दीर्घा में तिरंगा फहराते नजर आते हैं ! ये हैं मोहाली, पंजाब के राम बाबू ! धोनी के प्रशंसक हैं,  उनके द्वारा प्रायोजित किए गए हैं, इसीलिए इनके शरीर पर धोनी का नाम और जर्सी नंबर पेंट किया दिखता है ! 

राम बाबू 

सुधीर कुमार चौधरी 

दु निया में बहुत से लोग, सफल और विख्यात लोगों की सफलता से प्रेरित हो उसी तरह का काम या पेशा अपना लेते हैं ! कुछ सफल भी हो जाते हैं, पर शायद ही ऐसा कभी हुआ हो कि प्रेरित व्यक्ति अपने प्रेरक से भी आगे निकल गया हो ! कुछ ऐसा ही यहां भी है ! सुधीर और राम बाबू में कुछ समानताएं भी हैं ! दोनों ने गरीबी का दंश झेला है ! दोनों के परिवार इनके इस ''शौक'' के खिलाफ  रहे हैं ! दोनों को अपना जुनून पूरा करने के लिए दोस्तों-मित्रो से आर्थिक सहायता लेनी पड़ी है ! दोनों क्रिकेट के सबसे मशहूर खिलाडियों के फैन हैं ! पर सुधीर, राम बाबू से बहुत आगे हैं ! शायद इसलिए कि उन्हें BCCI की स्पॉन्सरशिप हासिल है। साथ ही उनके आदर्श साफ-सुथरी-अविवादित छवि वाले सचिन तेंदुलकर हैं ! दूसरी ओर राम बाबू धोनी द्वारा प्रायोजित हैं, जिन पर कई बार विभिन्न तरह की शंकाएं उठ चुकी हैं ! 

राम बाबू 

ऐसा लगता है कि सुधीर को हर मैच में तिरंगा फहराते, लोगों को उनकी बात करते, खिलाड़ियों के साथ उनकी फोटो को देख, राम बाबू के मन में भी आशा जगी होगी कि इस तरह वह भी मशहूरी प्राप्त कर सकते हैं ! क्रिकेट से उनका लगाव था ही ! कई बार, मैदान के बाहर, प्लेयरों को ले जाने वाली बस के नजदीक या अन्य मौकों पर वह धोनी के नारे लगाते उनका ध्यान अपनी रंगी-पुती आकृति की ओर खींच भी चुके थे ! एक बार धोनी के बुलावे पर उनके घर भी जा चुके थे !

मुलाकात 

क्रि केट के बेहतरीन खिलाडियों में से धोनी एक हैं, इसमें कोई शक नहीं ! पर उनका ईगो भी बहुत बड़ा है ! इसी ईगो के चलते कई बार सही-गलत अफवाहें भी सामने आती रही हैं ! अपने सीनियर खिलाडियों से उनकी ''तनातनी'' कोई दबी-छुपी बात भी नहीं है ! हो सकता है कि सुधीर को देख उन्हें भी अपने लिए भी वैसे ही किसी प्रशंसक की जरुरत महसूस होने लगी हो और सामने राम बाबू को पा कर सुधीर की एक रेप्लिका अपने नाम से क्रिकेट जगत में प्रोजेक्ट कर दी  हो ! हो सकता है कि यह गलत हो, पर लगता तो है। 

उपलब्धि 
राम बाबू और सुधीर को कई और बातें भी अलग करती हैं ! सुधीर ने खेल के प्रति लगाव के कारण शादी तक नहीं की ! उधर राम बाबू ने पत्नी और सातवीं में पढ़ने वाले बेटे तथा उससे एक साल छोटी बिटिया को उनके भाग्य के सहारे छोड़ दिया ! उनकी पत्नी किसी तरह घर चलाती रही हैं ! अपनी अलग पहचान बनाने के बावजूद राम बाबू की किसी तरह की कोई कमाई नहीं है, वह अपनी यात्रा, ठहरना और अन्य जरूरतों के लिए लोगों की सहायता पर निर्भर है ! उनके अनुसार मैच देखने के अलावा जीवन में और कोई योजना नहीं है ! अब धोनी उनको स्पांसर कर रहे हैं, तो यथा संभव कभी-कभी परिवार की सहायता कर देते हैं ! 

दर्शक दीर्घा में 
राम बाबू के धोनी के अलावा किसी और खिलाड़ी से कोई दोस्ताना संबंध नहीं हैं। नाहीं किसी से किसी तरह की आर्थिक सहायता मिलती है ! कभी-कभी मैच का टिकट जरूर मिल जाता है ! दोस्तों और शुभचिंतकों की सहायता से इस 40 वर्षीय क्रिकेट फैन के रहने-खाने-यात्रा संबंधित काम पूरे हो जाते हैं ! यह पूछने पर कि टीवी पर आपको देख क्या परिवार खुश होता है, राम बाबू चुप्पी साध लेते हैं ! फिर मायूसी के साथ बतलाते हैं कि सभी का कहना है कि जब इससे परिवार को कोई सहायता नहीं मिलती तो इस सब का क्या मतलब !

चिंतामग्न 

नको इसका भी कहीं मलाल तो है कि सुधीर को एक ट्रैवल एजेंसी के साथ-साथ और भी कई तरह की स्पांसरशिप मिल चुकी है। पर पता नहीं क्यों उनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता ! पर उन्हें इस बात का गर्व भी है कि धोनी उन्हें जानते हैं और मैदान में मैचों के दौरान उनको नजरंदाज नहीं किया जाता ! इसीलिए जब तक शरीर साथ देगा तब तक वे भारतीय टीम के मैचों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते रहेंगे, आगे ऊपर वाले की मर्जी !

@अंतर्जाल का आभार 

सोमवार, 15 दिसंबर 2025

भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सुपरफैन, (1)

देखा जाए तो यह भी एक साधना ही है ! मैच देखने जाने एक एक दिन पहले वह अपने शरीर को भारतीय ध्वज के रंगों से रंग लेते हैं और उस रात को सोते नहीं हैं कि कहीं रंग खराब ना हो जाएं ! वह आमतौर पर अपनी छाती पर तेंदुलकर का नाम लिखते हैं और पीठ पर उनकी जर्सी का नंबर ! वह अपने साथ एक शंख भी रखते हैं, जिसे मैच के खास-खास मौकों पर मैदान में बजाते हैं ! सुद्या के उपनाम से जाने जाने वाले अविवाहित चौधरी सनातनी हिन्दू हैं। अयोध्या राम मंदिर अभिषेक में भी उन्होंने भाग लिया था.......... ! 

#हिन्दी_ब्लागिंग 

क्रिकेट से लगाव रखने वाले लोगों ने विदेशी टीमों के साथ हो रहे तकरीबन हर मैच में, तिरंगे रंग में रंगे दो युवकों को बड़ा सा तिरंगा फहराते देखा होगा ! एक की पीठ पर 10 नंबर, जो कभी सचिन की जर्सी का नंबर होता था, और आगे सीने पर तेंदुलकर लिखा होता है। उसी तरह दूसरे की पीठ पर धोनी की जर्सी  का नंबर 7 और आगे धोनी लिखा होता है ! अब तो ये दोनों क्रिकेट के हर मैच  का अभिन्न अंग सा बन गए हैं ! दर्शकों को भी अब इनको देखने की आदत पड़ गई है ! कौन हैं ये दोनों ? इतना जुनून क्यों है इन दोनों का इस खेल के प्रति ? 

 

सुधीर कुमार चौधरी 

राम बाबू 
बिहार के मुज्जफरपुर शहर के ग्रामीण इलाके में 20 फरवरी 1981 में एक अत्यंत गरीब परिवार में एक बालक का जन्म होता है ! नाम रखा गया, सुधीर कुमार चौधरी ! पता नहीं कैसे और क्यों छह साल की छोटी सी उम्र में ही उस पर क्रिकेट का जुनून सवार हो गया और वह सचिन का दीवाना बन गया ! इसी दीवानगी में उसने 14 वर्ष की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी। कहा तो यह भी जाता है कि क्रिकेट के सभी मैच देख सके, इसके लिए उसने अपनी शादी तक स्थगित करवा दी थी ! 
सुद्या 

क्रिकेट की दीवानगी ऐसी थी कि उसके सिवा युवा सुधीर को और कुछ भी ना सूझता था, ना हीं भाता था !भारतीय टीम देश में जहां भी जाती, ये महाशय किसी ना किसी युक्ति से वहां पहुंच ही जाते थे ! अपनी इन सब हरकतों से उसने अपने माता-पिता को बहुत ही नाराज कर दिया था। रोक-टोक जब कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी तो सुधीर ने धमकी तक दे डाली कि अगर उसे मैच देखने से रोका गया तो वह आत्मदाह कर लेगा ! उसने कहा कि उसका जीवन भारतीय क्रिकेट मैच देखने के लिए समर्पित है ! इसके धनार्जन के लिए उसने क्रिकेट प्रेमियों की सहायता ली ! 

समर्पण 

सन 2003 से, चौधरी भारत द्वारा खेले गए हर क्रिकेट मैच को देखते और समर्थन करते आ रहे हैं ! पर यह सब इतना आसान नहीं रहा था ! 28 अक्टूबर 2003 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सचिन का खेल देखने के लिए उन्होंने 21 दिनों तक साइकिल चलाकर मुजफ्फरपुर से मुंबई तक का सफर तय किया था, और यह त्रिकोणीय सीरीज का पहला मैच था, जहां उन्होंने भारतीय तिरंगा लहराकर भारत का समर्थन करना शुरू किया। पैसों की तंगी के कारण कई बार खतरा मोल लेते हुए ट्रेनों में बिना टिकट यात्रा भी की ! पर मुख्यत: स्टेडियम तक ले जाने के लिए इनकी सायकिल ही साथ निभाती रही ! जैसे कि 2006 में लाहौर और 2007 में बांग्लादेश तक उसी पर चले गए थे ! 2015 में, मीरपुर में इंडिया-बांग्लादेश सीरीज के दौरान, भारत का स्पोर्ट करने खातिर उनकी जान पर बन आई थी, बड़ी मुश्किल से बांग्ला देश की पुलिस ने वहां के उन्मादी दर्शकों से इन्हें बचाया था ! 

वंदे मातरम 

एक बार टीम की जीत का जश्न मनाने के लिए बाड़ फांदने की कोशिश में पुलिस के तेवर झेलने पड़े थे ! ऐसा ही कुछ हुआ, मार्च 2010 में, कानपुर में एक प्रैक्टिस सेशन के दौरान तेंदुलकर से हाथ मिलाने की कोशिश में पुलिस से मार खानी पड़ी ! तेंदुलकर के दखल के बाद उन्हें छोड़ दिया गया, बाद में उन्हें पहचान कर पुलिस ऑफिसर ने उनसे माफी मांगते हुए इस घटना पर अफसोस जताया। अब तक उनकी पहचान बन चुकी थी, लोग जूनून का लोहा मान चुके थे !  इस घटना के बाद, BCCI ने उन्हें इंडियन टीम के हर होम मैच के लिए स्पॉन्सर कर दिया। 

जय हो 
अविस्मरणीय पल 

चौधरी का सपना तब जा कर पूरा हुआ, जब 2, अप्रैल 2011 में, भारत ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में फाइनल में श्रीलंका को हराया। तेंदुलकर ने खुद उन्हें, भारतीय ड्रेसिंग रूम में आने और टीम के जश्न में शामिल होने के लिए बुलाया । उन्होंने चौधरी से हाथ मिलाया, उन्हें गले लगाया और अंत में अपने साथ विश्व कप उठाने और फोटो खिंचाने का स्वर्णिम मौका भी दिया ! यह सुधीर के जीवन का सबसे खास समय था।आज भी सचिन उनके ट्रैवल और मैच के टिकट के लिए आर्थिक सहयोग करते हैं ! 

रोहित के साथ 

जीत का जश्न 
देखा जाए तो यह भी एक साधना ही है ! मैच देखने जाने एक एक दिन पहले वह अपने शरीर को भारतीय ध्वज के रंगों से रंग लेते हैं और उस रात को सोते नहीं हैं कि कहीं रंग खराब ना हो जाएं ! वह आमतौर पर अपनी छाती पर तेंदुलकर का नाम लिखते हैं और पीठ पर उनकी जर्सी का नंबर ! वह अपने साथ एक शंख भी रखते हैं, जिसे मैच के खास-खास मौके पर बजाया जाता है ! सुद्या के उपनाम से जाने जाने वाले अविवाहित चौधरी सनातनी हिन्दू हैं। अयोध्या राम मंदिर अभिषेक में उन्होंने भी भाग लिया था ! 

सचिनमय 
सुधीर ने अपनी ज़िंदगी सचिन तेंदुलकर को समर्पित कर दी है ! 2011 के ICC वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ उनकी और सुपरस्टार की तस्वीरें भारतीय क्रिकेट इतिहास में अपनी जगह बना चुकी हैं। उनकी यात्राएं मशहूर हैं। उन्होंने तेंदुलकर का मैच देखने के लिए 12,000 मील से ज़्यादा साइकिल चलाई है ! फिल्म निर्माता सुश्रुत जैन द्वारा निर्मित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ''बियॉन्ड ऑल बाउंड्रीज'' के तीन प्रमुख किरदारों में से सुधीर भी एक हैं। यह फिल्म भारतीय क्रिकेट के तीन अलग-अलग उन व्यक्तित्वों के निजी जीवन के बारे में जानकारी देती है, जो इस खेल के सबसे बड़े प्रशंसक माने जाते हैं !

@अंतर्जाल का हार्दिक आभार 

विशिष्ट पोस्ट

यूपी का रहस्यमयी मेंढक मंदिर

ओयल कस्बे में स्थित लगभग 200 साल पुराने नर्मदेश्वर महादेव मंदिर को सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, इसके साथ ही यहां एक और आश्चर्यजनक बात...