pub-3648900737756323 कुछ अलग सा: निमंत्रण
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शुक्रवार, 19 जनवरी 2024

वही हो रहा है जो राम जी चाह रहे हैं

जिसने सारी कायनात बनाई है ! समय-काल बनाया है ! धर्म-ज्ञान बनाया है ! जिसके चाहे बिना पत्ता तक नहीं हिल पाता ! सूर्य-शनि जैसे ग्रह जिसके इशारे पर संचरण करते हैं ! जिसका नाम ही भवसागर पार करवा सकता है ! जो खुद अमंगलहारी हैं ! जिनके पिता के नाम का स्मरण ही दुःख दूर करने के लिए पर्याप्त है ! तुम उसके लिए मुहूर्त और इमारत में खामियां दिखलवा कर भ्रमित करना चाहते हो लोगों को ? वह भी अपनी तुच्छ कामनाओं के लिए ? तुम हो क्या ? तुम्हारा वजूद क्या है ? औकात क्या है तुम्हारी ! तुम.... तुम मुहूर्त बनाओगे उसके लिए जो खुद मुहूर्त बनाता है ! जो इतना शुभ है कि शुभ उसके चरणों में अपना शीश झुकाता है 

#हिन्दी_ब्लागिंग 

अयोध्या जाने से इंकार करने वालों की फोटो, उनके ब्यान मीडिया रोज ऐसे दिखा-बता रहा है जैसे कोई बहुत बड़ी घटना हो गई हो, यह बात तो देश की गलियों के कुत्ते-बिल्लियों को भी पता थी कि ये लोग मंदिर नहीं जाएंगे ! सारा देश जानता है कि ऐसे लोगों का ना कोई धर्म है, ना ईमान, ना नैतिकता है ना कोई विवेक ! इनका एक ही ध्येय है कुर्सी ! है तो बचाए रखो नहीं है तो उसको पाने के लिए देश तक की परवाह ना करो ! 

इनको अपने दंभ में पता ही नहीं चला कि यह कब एक इंसान से बैर के चक्कर में कैसे समाज, धर्म, देश और अब तो राम विरोधी भी बनते चले गए ! पर प्रभु की बेआवाज लाठी की चोट पर बिलबिलाते हुए आँख खुली तो एक एक तरफ तो खाई थी ही दूसरी तरफ और भी गहरी घाटी ! आसन्न संकट देख लगे चिल्लाने हम जाएंगे...हम जाएंगे..... ! पर 22 जनवरी के बाद ! क्यों भई ! तब क्या राम बदल जाएंगे ? स्थान बदल जाएगा ? मंदिर बदल जाएगा ? पूजा-अर्चना बदल जाएगी ? या जिन्होंने स्थापना करवाई उनके नाम बदल जाएंगे ?

एक और तरह के दादुर हैं जिन्होंने कुंठित मठाधीशों को भी बरगला दिया है ! वे मुहूर्त तथा मंदिर पर सवाल उठा रहे हैं ! कल एक चैनल पर एक ऐसे ही परपोषित मौलाना को भी लपेट लाए जिनका सनातन से कोई वास्ता नहीं है, वे भी मुहूर्त, आस्था, वास्तु पर अपना ज्ञान उगले जा रहे थे !

जिसने सारी कायनात बनाई है ! समय-काल बनाया है ! धर्म-ज्ञान बनाया है ! जिसके चाहे बिना पत्ता तक नहीं हिल पाता ! सूर्य-शनि जैसे ग्रह जिसके इशारे पर संचरण करते हैं ! जिसका नाम ही भवसागर पार करवा सकता है ! जो खुद अमंगलहारी हैं ! जिनके पिता के नाम का स्मरण ही दुःख दूर करने के लिए पर्याप्त है ! तुम उसके लिए मुहूर्त और इमारत में खामियां दिखलवा कर भ्रमित करना चाहते हो लोगों को ? वह भी अपनी तुच्छ कामनाओं के लिए ? तुम हो क्या ? तुम्हारा वजूद क्या है ? औकात क्या है तुम्हारी ! तुम.... तुम मुहूर्त बनाओगे उसके लिए जो खुद मुहूर्त बनाता है ! जो इतना शुभ है कि शुभ उसके चरणों में अपना शीश झुकाता है ! तुमने या तुम्हारे खानदान में भी किसी ने गीता पढ़ी है, जिसमें उसने ने खुद कहा है कि मैं इस सम्पूर्ण जगत का धारण-पोषण करने वाला हूं। पिता, माता, पितामह मैं ही हूं। देवताओं का गुरू भी मैं ही हूं। सबका स्वामी भी मैं ही हूं और तुम चले हो उसके लिए शुभ मुहूर्त की गणना करने .....! 

अविवेक, अहम्, घमंड, सत्तामद जब सर पर सवार होते हैं, तो मनुष्य अधमावस्था को प्राप्त हो जाता है ! मदांधता में  पतन अवश्यंभावी है चाहे वह कोई सम्राट हो, ऋषि हो, ज्ञानी हो, रावण हो या फिर शंकराचार्य ही क्यों ना हो ! आदि शंकराचार्य जी को यह कल्पना जरूर रही होगी कि भविष्य में मेरी धरोहर अयोग्य हाथों में भी जा सकती है पर उस वक्त पीठों का निर्माण भी अति आवश्यक था ! 

आज कल के विवाद में पामर लोगों द्वारा जिन प्रतिष्ठित नामों को भी घसीट लिया गया है उन आदरणीयों को भी तो एक बार जांच लेनी चाहिए थी कि हमारे नाम का कौन, कैसा, किस नियति से प्रयोग कर रहा है ? धर्म के बारे में उनका इतिहास क्या रहा है ? इतिहास ना खंगाल पाते तो सिर्फ तीन -चार महीनों का ही लेखा-जोखा देख लेते ! वर्षों की कमाई इज्जत, नाम, मर्यादा, प्रतिष्ठा दो दिनों में भू-लुंठित हो गई ! आज तो आम जनता यही समझ रही है कि पांच सौ सालों से भी ज्यादा समय तक महाराज ने प्रभु की सुध नहीं ली ! ठंड-गर्मी-आंधी-तूफान में एक टेंट में पड़े राम का ख्याल ना आया ! जबकि उसी राम की बदौलत खुद सोने के सिंहासनों पर विराजमान हो दुनिया भर की सुविधाओं का लाभ लेते रहे ! आज उन्हें निमत्रंण पर मान-अपमान नजर आ रहा है ! दुनिया को ज्ञान बांटने वाले खुद कैसे ऐसे अज्ञानी हो गए ! जब सारा देश राममय हुआ पड़ा है ! जड़-चेतन कोई भी विरोध का कोई स्वर सुनना नहीं चाहता तब ऐसा रवैया......! सब प्रभु की इच्छा है, वे यही चाहते होंगें !

जय श्री राम, जय-जय राम 

शनिवार, 30 दिसंबर 2023

निमंत्रण

अपने रसूख के कारण जिन्होंने एक बार हमारे पुश्तैनी मकान को राजमार्ग का हिस्सा बता गिरवाने की साजिश तक कर दी थी, वो हमारे रिश्ते के ताऊ जी, जिन्होंने बाकायदा ऐलान कर दिया था कि इनके परिवार में संतान की कल्पना भी नहीं की जा सकती, आज उनके मुंह में दही जम गया है ...........! 

#हिन्दी_ब्लागिंग 

मेरे बेटे का पहला जन्मदिन आने वाला है ! परिवार के सभी सदस्यों, सगे-संबंधियों में अपार उत्साह है ! हर तरह के रीति-रिवाज पूरे विधि-विधान से संपन्न किए जा रहे हैं ! हों भी क्यों ना! वर्षों के बाद ऐसी ख़ुशी प्रभु ने हमें बक्शी है ! हमारे समाजसेवी परिवार की समाज में प्रतिष्ठा है ! लोगों से काफी मेल-जोल है ! इसीलिए शिशु के अन्नप्राशन पर किस-किस को निमंत्रण देना है, इस बात पर जब चर्चा शुरू हुई तो माँ का कहना था कि वर्षों बाद ऐसा शुभ अवसर आया है, सभी जान-पहचान वालों और रिश्तेदारों को न्योता भेजना चाहिए ! हमारे बाबूजी कुछ असमंजस में हैं ! उनको अतीत की घटनाएं और उनसे उपजी वैमनस्यता के कारण लग रहा है कि कुछ लोग नहीं आएंगे ! 

काफी सालों से हमारी बिरादरी में कुछ लोगों के बीच आपसी अनबन चल रही है ! रिश्तेदारी होते हुए भी एक दूसरे की उन्नति देख लोगों को जलन होने लगती है ! जरा-जरा सी बात पर कोर्ट-कचहरी की नौबत आ जाती है !  

मेरी शादी के बाद काफी दिनों तक घर में बच्चे की किलकारी नहीं गूंजने को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैलाई गईं ! पहले तो हमारे कहीं संबंध ही ना हों इसके षड्यंत्र रचे गए, जो बुरी तरह असफल रहे ! फिर हमारे परिवार को लेकर झूठी कहानियां गढ़ी गईं, अफवाहें फैलाई गईं, जिन्हें समझदार लोगों ने सिरे से नकार दिया ! एक लंबे अरसे के बाद पंच परमेश्वर की तरफ से भी हमें न्याय मिला, झूठे मामले-मुकदमें खारिज हो गए और प्रभु की दया से हमारा घर-परिवार खुशहाल होता चला गया ! 

कुछ समय पश्चात ईश्वर का एक अंश हमारे यहां भी अवतरित हुआ ! बस, फिर क्या था ! इस खबर से हमारे बैरी रिश्तेदारों को तो जैसे सांप सूंघ गया ! हमारी निपूती बुआ तो उसके बारे में सुनते ही पागलों की तरह बिदकने लगी ! अंटसंट कहना उनकी आदत में शुमार हो गया ! बच्चे का कोई जिक्र भी कर दे तो काटने को तैयार ! अपने रसूख के कारण जिन्होंने एक बार हमारे पुश्तैनी मकान को राजमार्ग का हिस्सा बता गिरवाने की साजिश कर दी थी, वो हमारे रिश्ते के ताऊ जी, जिन्होंने बाकायदा ऐलान कर दिया था कि इनके परिवार में संतान की कल्पना भी नहीं की जा सकती, वे आज मुंह में दही जमाए बैठे हैं ! कई और ऐसे हैं, जो रिश्तेदार हमारे हैं पर अपने दोस्तों, जिनसे हमारी नहीं पटती पर उनकी रोजी-रोटी का जरिया हैं, उनको खुश करने की खातिर असमंजस में हैं कि बबुआ के यहां जाएं कि नहीं ! कुछ इस ताक में हैं कि देखें बुलाते भी हैं कि नहीं ! एक हमारा नजदीकी परिवार, बाप कह रहा है कि नहीं जाना है, बेटा कह रहा है मैं तो जाऊंगा ! दो-एक इस परिस्थिति से बचने के लिए काम का बहाना कर शहर ही छोड़ गए ! कुछ अपनी करनियों को याद कर पेशोपेश में हैं कि अब किस मुंह को ले कर जाएं, उन्हें वे तमाम बातें याद आ रही हैं जो हमारे परेशानी भरे दिनों में उन्होंने उगल दी थीं ! तो कुल मिला कर एक बड़ी ही पेचीदा परिस्थिति आन पड़ी है, हमारी बिरादरी के सामने !

पर जो भी हो हम, हमारा परिवार, हमारे हितैषी, हमारे शुभचिंतक परमानंद में हैं ! उधर हमारी माँ घोर आशावादी और क्षमाशील हैं ! उन्होंने कह दिया है, ऐसे शुभ अवसर का निमंत्रण तो सबको जाएगा, जिसे आना हो आएगा, जिसे नहीं आना उसकी इच्छा ! हम अपनी तरफ से कोई शिकायत का मौका नहीं देंगे ! बाकि भगवान सबको सद्बुद्धि दे !  

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