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शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025

नाम में बहुत कुछ रखा है 😇

संयोगवश, कांग्रेस के प्रतिनिधित्व वाले इस इलाके में 9 और 11 दिसंबर को होने वाले केरल के पंचायत चुनावों में कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में से एक श्रीमती सोनिया गाँधी का नामधारी BJP का उम्मीदवार बन सीधे कांग्रेस के उम्मीदवार से ही मुकाबला कर रहा है। उधर हमारे बंगाल में TMC के दो विधायकों का एक ही नाम, हुमायूं कबीर होने से वहां अफरा-तफरी का माहौल है, लोग असमंजस में हैं, क्योंकि नाम में बहुत कुछ रखा है भाई ............!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

नाम में क्या रखा है ! ऐसा लिखने-कहने वाला भी अपनी हर रचना के नीचे अपना नाम जरूर लिखता था ! नाम में बहुत कुछ रखा है, इसीलिए हमारे यहां इसे संस्कारों में स्थान दिया गया है ! अभी भी बहुत से स्थानों में नामकरण संस्कार बड़े समारोह से किए-मनाए जाते हैं ! पर समय भी तो बदल रहा है, उसके साथ ही मान्यताएं, आस्थाए, परम्पराएं भी बदल रही हैं ! नामकरण भी इनसे अछूता नहीं रह पाया है ! अब अजीबोगरीब, अर्थहीन, परिस्थिति, प्रेरणा मूलक नाम रखे जाने लगे हैं ! जो आगे चल कर कभी-कभी नामधारक के लिए भी असामान्य या हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न कर देते हैं ! 

आज आ कर देखो  
अभी एक खबर आई कि श्रीमती सोनिया गांधी बीजेपी की टिकट पर केरल के मुन्नार जिले के नल्लथन्नी इलाके से पंचायत का चुनाव लड़ेंगी ! सभी को लगा कि ऐसे ही भ्रामक या पीत पत्रकारिता के तहत अफवाह होगी ! फिर खोज-खबर ली जाने लगी और जब सच्चाई सामने आई तो पता चला कि खबर में नाम तो सही है पर व्यक्ति कोई और है ! 
मुन्नार की सोनिया गाँधी 
हुआ क्या कि केरल के आगामी पंचायत चुनावों में BJP ने केरल के मुन्नार में पंचायत चुनाव के लिए नल्लथन्नी वार्ड से जिसे प्रत्याशी बनाया है उनका नाम भी सोनिया गांधी है, जो कांग्रेस और CPI(M) के खिलाफ लोकल पंचायत चुनाव लड़ रही हैं। उनके पिता, स्वर्गीय दुरे राज, जो एक समर्पित कांग्रेसी कार्यकर्त्ता थे तथा तत्कालीन कांग्रेस प्रेसिडेंट श्रीमती सोनिया गांधी से बहुत प्रभावित थे, उन्होंने अपनी बेटी का नाम सोनिया गांधी रख दिया ! जो वहां के लोगों के लिए बहुत दिनों तक कौतुक का विषय भी बना रहा !
प्रचार 
मय का खेल, इन सोनिया जी की शादी सुभाष जी से हुई जो BJP पंचायत जनरल सेक्रेटरी हैं ! धीरे-धीरे सोनिया जी खुद भी BJP की विचारधारा से सहमत होती हुईं उसमें शामिल हो गईं। अब उन्हीं नल्लथन्नी कल्लर की 34 साल की सोनिया गांधी को BJP ने मुन्नार पंचायत के नल्लथन्नी वार्ड 16 से नॉमिनेट किया है। एक ही झटके में वे पूरे देश में प्रसिद्ध हो गईं ! किस्मत का खेल !
बताओ भला 
संयोगवश, कांग्रेस के प्रतिनिधित्व वाले इस इलाके में 9 और 11 दिसंबर को होने वाले केरल के पंचायत चुनावों में कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में से एक श्रीमती सोनिया गाँधी का नामधारी, BJP का उम्मीदवार बन, सीधे कांग्रेस के ही उम्मीदवार से मुकाबला कर रहा है। अब देखने वाली रोचक बात यह है कि क्या सोनिया गांधी का नाम BJP के लिए फायदेमंद साबित होगा या वोटरों को सिर्फ भ्रमित करेगा ! परिणाम जो भी हो पर इस चुनाव ने एक ऐसे नाटिका का मंचन कर दिया है जिसके रिजल्ट का सभी को इंतजार रहेगा !
सच है 
परोक्त चुनाव के रिजल्ट के प्रतीक्षा के बीच ही एक और नाम में बहुत कुछ रखा है वाली बात हो गयी ! अपने बंगाल में दो-दो हुमायूं कबीरों को लेकर अफरा-तफरी मच गई ! मजे की बात यह कि दोनों TMC पार्टी के विधायक हैं ! एक मुर्शिदाबाद जिले से तो दूसरा डेबरा इलाके से ! कुछ दिनों पहले मुर्शिदाबाद वाले विधायक हुमायूं कबीर ने अपना एक धर्मस्थल बनवाने की घोषणा कर दी ! लोगों और समाज की ओर से पैसे और सहायता आनी शुरू हो गई !  
वही हो ना 
रेशानी तब शुरू हुई जब डेबरा वाले हुमायूं कबीर के फोन की घंटी इसी बाबत लगातार बजने लगी ! दूर-दूर से, अन्य परदेशों से लोग पैसा भेजने के लिए उससे बैंक एकाउंट न. या क्यू.आर कोड मांगने लगे ! वह बताते-बताते परेशान हो गया कि भाई मैं वो वाला हुमायूं कबीर नहीं हूँ ! वो मुर्शिदाबाद वाला हुमायूँ है, जिसे आप खोज रहे हैं ! पर फोन की घंटी है कि बजे जा रही है, बजे जा रही है ! क्योंकि उसके लिए तो नाम ही  कुछ रखा है ! 

@आभार अंतर्जाल 

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2022

बाबिया, एक शाकाहारी मगरमच्छ

मंदिर के पदाधिकारियों के अनुसार वर्षों पहले भी इस झील में एक मगरमच्छ रहता था।  जिसे बाबिया कह कर पुकारा जाता था। 1942 में उसे एक ब्रिटिश अधिकारी मार कर अपने साथ ले गया था ! पर कुछ ही दिनों बाद उसकी सांप के काटने से मौत हो गयी थी ! इस घटना के बाद आश्चर्यजनक रूप से झील में एक और मादा मगर दिखाई पड़ने लगी ! भक्तों ने उसका नाम भी बाबिया रख दिया ! वह यही बाबिया थी, जिसने भक्तों तथा मंदिर द्वारा प्रदत्त प्रसाद पर ही अपनी तक़रीबन दो तिहाई जिंदगी  गुजार दी ! पर जाते-जाते भी वह यह संदेश दे गई कि कदाचार से सदाचार, आचरण बदलते ही जीव वंदनीय हो जाता है ...........!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

मगरमच्छ, वह भी शाकाहारी ! सहसा विश्वास ही नहीं होता ! यह ठीक वैसा ही लगता है जैसे कोई कहे कि शेर घास खा कर जिंदा है ! ज्यादातर पानी में रहने वाले, इस डरावने उभयचर का नाम सुनते ही डर से रोंगटे खड़े हो जाते हैं ! जिस प्राणी से पानी में शेर और हाथी जैसे ताकतवर जानवर भी सामना करने से कतराएं ! जिसके खूंखार दांत एक झटके में किसी के भी टुकड़े-टुकड़े कर सकने में सक्षम हों ! जो पानी में रहने वाले जीवों का काल हो ! वह शाकाहारी .....! पर हमारा संसार भरा पड़ा है, विस्मित करने वाले  आश्चर्यजनक, अविश्वसनीय, हैरतंगेज कारनामों से ! इस जगत में क्या कुछ नहीं हो सकता !

बाबिया 

केरल के कासरगोड जिले के माजेश्वरम नामक स्थान में  स्थित आनंदपद्मनाभ स्वामी मंदिर ! ऐसी मान्यता है कि पद्मनाभस्वामी जी का पूजास्थल तिरुवंतपुरम में जरूर है पर उनका मूलस्थान यह मंदिर है। इसी की एक गुफा में प्रभु अंतर्ध्यान हुए थे ! इसी की झील में एक मादा मगरमच्छ रहा करती थी, नाम था बाबिया ! लोक मत है कि बाबिया इस मंदिर और इसकी गुफा की रखवाली  पिछले सत्तर साल से करती आ रही थी। मंदिर प्रशासन के अनुसार वह पूर्णतया शाकाहारी थी और सिर्फ मंदिर का प्रसाद ही खाती थी। यहां तक कि उसने झील में रहने वाले किसी अन्य प्राणी को किसी भी तरह का कभी भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाया ! इतने सालों में किसी ने भी उसे मछली तक खाते नहीं देखा ! 

आनंदपद्मनाभ मंदिरऔर झील 

प्रसाद ग्रहण

अद्भुत 
मंदिर के पदाधिकारियों के अनुसार वर्षों पहले भी इस झील में एक मगरमच्छ रहता था।  जिसे बाबिया कह कर पुकारा जाता था। 1942 में उसे एक ब्रिटिश अधिकारी मार कर अपने साथ ले गया था ! पर कुछ ही दिनों बाद उस अधिकारी की सांप के काटने से मौत हो गयी थी ! इस घटना के बाद आश्चर्यजनक रूप से झील में फिर एक मादा मगर दिखाई पड़ने लगी ! भक्तों ने उसका नाम भी बाबिया रख दिया ! यह वही बाबिया थी, जिसने भक्तों तथा मंदिर द्वारा प्रदत्त प्रसाद पर ही अपनी तकरीबन दो तिहाई जिंदगी  गुजार दी ! प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार सुबह और शाम की पूजा के बाद आरतियों की घंटियों के साथ ही वह भोजन ग्रहण करने के लिए झील के किनारे आ जाती थी, पर कभी भी उसने किसी को नुक्सान तो दूर की बात डराने तक की कोशिश नहीं की ! यही कारण है कि उसको देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती थी ! अब तो यह माना जाने लगा था कि उसकी एक झलक देखे बिना इस मंदिर की यात्रा अधूरी है ! 


उमड़ते लोग 
मंदिर प्रशासन के अनुसार करीब अस्सी साल की बाबिया की पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट में उसकी मौत बढ़ती उम्र से संबंधित कारणों से हुई बताई गई है। इधर कुछ समय से वह बीमार चल रही थी और  09 अक्टूबर 2022, रविवार को उसकी इहलीला समाप्त हो गई ! पर जाते-जाते भी वह यह संदेश दे गई कि कदाचार से सदाचार, आचरण बदलते ही जीव वंदनीय हो जाता है ! कुछ ही समय में उसकी मौत की खबर चारों ओर फैल गई ! लाखों लोगों का हुजूम मंदिर की ओर उमड़ पड़ा ! मंदिर प्रशासन ने उस दिन मंदिर बंद रख उसके मृत शरीर को फ्रीजर में रखवा दिया, जिससे लोग उसके अंतिम दर्शन कर सकें ! दो दिन बाद पूरे विधि-विधान से उसका दाह संस्कार किया गया और मंदिर की बाहरी दिवार के साथ उसकी समाधि बना दी गई ! जहां बाद में उसका स्मारक बनाने पर भी विचार चल रहा है ! इसके साथ ही लोगों का विश्वास है मंदिर की रखवाली के लिए बाबिया की जगह कोई और जरूर आएगा, जैसे बाबिया आई थी ! 

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