भारतीय सिनेमा के संगीत के स्वर्ण काल का आखिरी रौशन चिराग, देश की सबसे पसंदीदा, लोकप्रिय, चहेती, पार्श्वगायिका आशा ताई ! कल ही उनके हृदयाघात की खबर आई थी ! आज वे देश के सभी संगीत प्रेमियों को गम में डूबा छोड़, अलविदा कह गयीं ! एक युग का अंत ! किसी भी दिवंगत के लिए सदा कहा जाता है कि प्रभु उसकी आत्मा को शांति प्रदान करें, पर ऐसी विभूतियां जब परमपिता के पास वापस पहुंचती होंगी तो मेरा यह विश्वास है कि उनकी उपस्थिति से देवलोक को ही एक दैवीय शांति और उनकी उपस्थिति का सुखद एहसास होता होगा ! ........अश्रुपूरित श्रद्धांजलि 🙏🙏
#हिन्दी_ब्लॉगिंग
भारतीय फिल्मों का यदि उनके संगीत के नजरिए से आकलन किया जाए तो 1950 से लेकर तकरीबन 1980 तक का समय स्वर्णिम काल रहा। एक से एक बढ़ कर दिग्गज संगीत निदेशक, लेखक, गायक कलाकार इस समय में हुए ! किसी की किसी से कोई तुलना नहीं ! सबकी अपनी-अपनी खासियत, सबका अपना-अपना अलग अंदाज, सबकी अपनी-अपनी विशेषता ! परंतु एक-दूसरे से अलग अंदाज रखते हुए भी एक-दूसरे के पूरक ! हर दिल अजीज ! खुली किताब ! उनके बारे में इतना सब जाना जाता है कि अलग से और कुछ भी कहने, लिखने, बताने के लिए कुछ भी नया नहीं है !
| सदा याद रहेंगी |
पर क्या समय ने कभी किसी को बक्शा है ? एक-एक कर सभी इस लोक में अपना कर्म पूरा कर विधाता के चरणों में जा विराजे ! आज आशा जी भी वहां अपनी बहनों, भाइयों, साथी कलाकारों के पास अपने निर्धारित स्थान पर जा विराजीं ! वे सब भले ही भौतिक शरीर के साथ हमारे बीच ना हों, पर उनकी कला की उपस्थिति, समय को भी मात देते हुए सदा-सदा के लिए हमारे बीच बनी रहेगी !
किसी भी दिवंगत के लिए सदा कहा जाता है कि प्रभु उसकी आत्मा को शांति प्रदान करें, पर ऐसी विभूतियां जब परमपिता के पास वापस पहुंचती होंगी तो मेरा यह विश्वास है कि उनकी उपस्थिति से देवलोक को ही एक दैवीय शांति और उनकी उपस्थिति का सुखद एहसास होता होगा !
प्रभु भूलोक पर हृदयनाथ जी, उषा जी सहित उनके परिवार, उनके परिजनों को इस दुखद घड़ी को सहन करने हेतु संबल प्रदान करें !
ॐ शांति 🙏
5 टिप्पणियां:
भावपूर्ण श्रद्धांजली 🙏🙏
अश्रुपूरित श्रद्धाञ्जली
नमन
कुमाउनी कवि शेर सिंह "अनपढ़" की पंक्तियां है "द्वी दिनाका डयार शेरूआ यो दुनी में " दो दिन का रहना है इस दुनिया में | नमन |
https://www.youtube.com/shorts/ucbHF8G2mi0
सच में 1950 से 1980 का दौर संगीत का गोल्डन टाइम था, हर कलाकार अपने आप में पूरा यूनिवर्स था। आज जब आशा जी के जाने की बात सुनते हैं, तो एक खालीपन सा लगता है, लेकिन उनके गाने अभी भी वही सुकून देते हैं। मुझे अच्छा लगा कि आपने उनकी कला को याद रखते हुए इतनी सादगी से बात कही।
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