यूट्यूब पर अक्सर किसी मीम या फनी शॉर्ट्स के अंत में चाय का कप पकड़े, एक लड़का खुल कर स्वाभाविक हंसी हँसते हुए दिख जाता है ! कौन है ये ? ये वो है, जो बताता है कि यदि नीयत साफ हो और साथ देने वाला, मित्र नेक और सच्चा हो, तो मंजिल मिल ही जाती है। गरीबी के कारण इसके जिन हाथों ने कलम छोड़ सफाई का कपड़ा थामा था, आज उन्हीं हाथों में कामयाबी की चाबी है। आज वो लाखों दिलों पर राज कर रहा है ! यह उपलब्धि अरुण जैसे हजारों बालक-बालिकाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है................!
#हिन्दी_ब्लॉगिंग
त कदीर कब किस पर मेहरबान हो जाए, कब रूठ जाए, शायद देवता भी नहीं जानते ! घर से अपने विशाल व्यवसाय को संभालने निकला करोड़पति शाम को कंगाल हो लौट सकता है ! वहीं एक अनजान, गुमनाम व्यक्ति रातों-रात दुनिया में मशहूर हो सकता है ! ऐसे अनगिनत उदाहरण अक्सर सामने आते रहते हैं ! ऐसा ही उस लड़के के साथ हुआ जो दो जून की रोटी के जुगाड़ के लिए ट्रक के सहायक के रूप में काम किया करता था !
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| संक्रामक हंसी |
ते लंगाना के एक छोटे से गांव में रहने वाला एक लड़का राजा यानी अरुण कुमार ! परिवार की माली हालत ठीक ना होने के कारण मात्र चौथी कक्षा के बाद उसे पढ़ाई छोड़नी पड़ी। काम की तलाश में उसकी भेंट होती है नेहरू नाम के एक ट्रक ड्राइवर से ! नेहरू ने अरुण को ट्रक पर क्लीनर की नौकरी दी। दोनों साथ मिलकर देश के विभिन्न हिस्सों में ट्रक से सामान लाते-ले जाते रहे ! समय बीतता गया !  |
| अरुण कुमार |
अ चानक एक दिन भाग्य की देवी की नजर इन पर भी पड़ी ! नेहरू को यात्रा के दौरान मोबाइल पर छोटी-छोटी रीलें बनाकर सोशल मीडिया पर डालने का शौक था ! एक दिन हाईवे के किनारे चाय पीते हुए अरुण किसी बात पर बड़ी जोर से हंस पड़ा, संयोगवश वह हँसी नेहरू के कैमरे में कैद हो गई ! जब नेहरू ने अपना वीडियो यूट्यूब पर डाला तब तो उतनी प्रतिक्रिया नहीं मिली। परंतु फिर किसी ने चाय के कप के साथ अरुण की हंसी की छोटी सी क्लिप को अपने फनी वीडियो के अंत में लगा दिया ! फिर वही हुआ जो आज सबके सामने है ! वह स्वाभाविक, दिल खोलकर हंसने वाला पल देखते-देखते वायरल हो गया ! लोग इस हंसी को बार-बार देखने और अपने वीडियो में जोड़ने लगे। धीरे-धीरे यह क्लिप तकरीबन हर मीम और रील का हिस्सा बन गई। आज यह हंसी इंटरनेट पर खुशी और फन का सबसे बड़ा सिंबल मानी जा रही है। |
| नेक इंसान, नेहरू |
इ तना ही नहीं नेहरू ने अरुण की आर्थिक सहायता की और उसे फिर से पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया ! काम के बोझ के बावजूद अरुण ने मेहनत की और 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा सफलतापूर्वक पास की ! आज वह कंटेंट क्रिएटर बन चुका है। उसकी एक पहचान बन चुकी है !  |
| मेहनत के साथ भाग्य भी जरुरी है |
अ गर नीयत साफ हो और साथ देने वाला, सच्चा मित्र हो, तो मंजिल मिल ही जाती है। गरीबी के कारण जिन हाथों ने कलम छोड़ सफाई का कपड़ा थामा था, आज उन्हीं हाथों में कामयाबी की चाबी है। आज वो लाखों दिलों पर राज कर रहा है ! यह उपलब्धि अरुण जैसे हजारों बालक-बालिकाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है ! @अंतर्जाल का हार्दिक आभार 🙏
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