pub-3648900737756323 कुछ अलग सा: भाग्य
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शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

यूट्यूब पर चाय पीता, एक लड़का

यूट्यूब पर अक्सर किसी मीम या फनी शॉर्ट्स के अंत में चाय का कप पकड़े, एक लड़का खुल कर स्वाभाविक हंसी हँसते हुए दिख जाता है ! कौन है ये ? ये वो है, जो बताता है कि यदि नीयत साफ हो और साथ देने वाला, मित्र नेक और सच्चा हो, तो मंजिल मिल ही जाती है। गरीबी के कारण इसके जिन हाथों ने कलम छोड़ सफाई का कपड़ा थामा था, आज उन्हीं हाथों में कामयाबी की चाबी है। आज वो लाखों दिलों पर राज कर रहा है ! यह उपलब्धि अरुण जैसे हजारों बालक-बालिकाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है................!

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

कदीर कब किस पर मेहरबान हो जाए, कब रूठ जाए, शायद देवता भी नहीं जानते ! घर से अपने विशाल व्यवसाय को संभालने निकला करोड़पति शाम को कंगाल हो लौट सकता है ! वहीं एक अनजान, गुमनाम व्यक्ति रातों-रात दुनिया में मशहूर हो सकता है ! ऐसे अनगिनत उदाहरण अक्सर सामने आते रहते हैं ! ऐसा ही उस लड़के के साथ हुआ जो दो जून की रोटी के जुगाड़ के लिए ट्रक के सहायक के रूप में काम किया करता था !   

संक्रामक हंसी 
ते लंगाना के एक छोटे से गांव में रहने वाला एक लड़का राजा यानी अरुण कुमार ! परिवार की माली हालत ठीक ना होने के कारण मात्र चौथी कक्षा के बाद उसे पढ़ाई छोड़नी पड़ी। काम की तलाश में उसकी भेंट होती है नेहरू नाम के एक ट्रक ड्राइवर से ! नेहरू ने अरुण को ट्रक पर क्लीनर की नौकरी दी। दोनों साथ मिलकर देश के विभिन्न हिस्सों में ट्रक से सामान लाते-ले जाते रहे ! समय बीतता गया ! 

अरुण कुमार 
चानक एक दिन भाग्य की देवी की नजर इन पर भी पड़ी ! नेहरू को यात्रा के दौरान मोबाइल पर छोटी-छोटी रीलें बनाकर सोशल मीडिया पर डालने का शौक था ! एक दिन हाईवे के किनारे चाय पीते हुए अरुण किसी बात पर बड़ी जोर से हंस पड़ा, संयोगवश वह हँसी नेहरू के कैमरे में कैद हो गई ! जब नेहरू ने अपना वीडियो यूट्यूब पर डाला तब तो उतनी प्रतिक्रिया नहीं मिली। परंतु फिर किसी ने चाय के कप के साथ अरुण की हंसी की छोटी सी क्लिप को अपने फनी वीडियो के अंत में लगा दिया ! फिर वही हुआ जो आज सबके सामने है ! वह स्वाभाविक, दिल खोलकर हंसने वाला पल देखते-देखते वायरल हो गया ! लोग इस हंसी को बार-बार देखने और अपने वीडियो में जोड़ने लगे। धीरे-धीरे यह क्लिप तकरीबन हर मीम और रील का हिस्सा बन गई। आज यह हंसी इंटरनेट पर खुशी और फन का सबसे बड़ा सिंबल मानी जा रही है।

नेक इंसान, नेहरू 
तना ही नहीं नेहरू ने अरुण की आर्थिक सहायता की और उसे फिर से पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया ! काम के बोझ के बावजूद अरुण ने मेहनत की और 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा सफलतापूर्वक पास की ! आज वह कंटेंट क्रिएटर बन चुका है। उसकी एक पहचान बन चुकी है ! 

मेहनत के साथ भाग्य भी जरुरी है 
गर नीयत साफ हो और साथ देने वाला, सच्चा मित्र हो, तो मंजिल मिल ही जाती है। गरीबी के कारण जिन हाथों ने कलम छोड़ सफाई का कपड़ा थामा था, आज उन्हीं हाथों में कामयाबी की चाबी है। आज वो लाखों दिलों पर राज कर रहा है ! यह उपलब्धि अरुण जैसे हजारों बालक-बालिकाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है !  

@अंतर्जाल का हार्दिक आभार 🙏

बुधवार, 13 अप्रैल 2022

कर्म पर भारी पड़ती, किस्मत

समर ने इस बार लहसुन की अच्छी फसल ली थी सो वही ले कर वह विदेश रवाना हो गया। गंतव्य पर पहुंच कर उसने भी अपना सामान वहां के लोगों को दिखाया। भगवान की कृपा, लहसुन का स्वाद तो उन लोगों को इतना भाया कि वे सब प्याज को भी भूल गए ! इतने दिव्य स्वाद से परिचित करवाने के कारण वे सब अपने को समर का ऋणी मानने लग गए। पर उन लोगों के सामने एक धर्मसंकट आ खड़ा हुआ कि इतनी अच्छी चीज का मोल वे लोग किस कीमती वस्तु से चुकाएं....! उनके लिये सोने का कोई मोल तो था ही नहीं  ! तो क्या करें ? तभी वहां के मुखिया ने सब को सुझाया कि सोने से कीमती चीज तो अभी उनके पास कुछ दिनों पहले ही आई है...........!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

कहानी कुछ पुरानी जरूर है पर है बड़ी दिलचस्प। जो यह बताती है कि कर्म के साथ किस्मत का सांमजस्य होना कितना जरुरी  होता है ! बात उन दिनों की है जब आधुनिक संचार व्यवस्था का नाम भी लोगों ने नहीं सुना था ! लोग आने-जाने वालों, व्यापारियों, घुम्मकड़ों, सैलानियों से ही देश विदेश की खबरें, जानकारियां प्राप्त करते रहते थे। ऐसे ही अपने आस-पास के व्यापारियों की माली हालत अचानक सुधरते देख छोटी-मोटी खेती-बाड़ी करने वाले जमुना दास ने अपने पड़ोसी की मिन्नत चिरौरी कर उसकी खुशहाली का राज जान ही लिया। पड़ोसी ने बताया कि दूर देश के राज में बहुत खुशहाली है। वहां इतना सोना है कि लोग रोज जरूरत की मामूली से मामूली आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी सोने का उपयोग करते हैं। वहां हर चीज सोने की है। सोना मिट्टी के मोल मिलता है !

ऐसी बातें सुन जमुना दास भी उस देश की जानकारी ले, वहां जाने को उद्यत हो गया। पर उसके पास जमा-पूंजी तो थी नहीं। फिर भी इस बार उसकी प्याज की फसल ठीक-ठाक हुई थी ! भगवान् का नाम ले, उसी की बोरियां जहाज पर लदवा, वह अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गया। उसकी तकदीर का चमत्कार कि वहां के लोगों को मसाले वगैरह की जानकारी बिलकुल नहीं थी ! प्याज को चखना तो दूर उन्होंने उसका नाम तक भी नहीं सुना था। जब जमुना दास ने उसका उपयोग बताया तो उसका स्वाद चख कर वे लोग खूशी से पागल हो गए ! पलक झपकते, मिनटों में ही जमुना दास का सारा का सारा प्याज खत्म हो गया। बदले में वहाँ के लोगों ने उसकी बोरियों को सोने से भर दिया। जमुना दास वापस अपने घर लौट आया। उसके तो वारे-न्यारे हो चुके थे। अब वह जमुना दास नहीं सेठ जमुना दास कहलाने लग गया था।
यहाँ देखें तो जमुना दास और समर ने अपनी तरफ से पुरजोर कर्म किए किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती ! विदेशियों ने भी अपनी और से बिना भेदभाव के भरपूर सहायता की, पर किस्मत
उसकी जिंदगी और हालात बदलते देख उसके पड़ोसी समर से भी नहीं रहा गया। एक दिन वह भी हाथ जोड़े जमुना दास के पास आया और एक ही यात्रा में मालामाल होने का राज पूछने लगा। उन दिनों लोगों के दिलों में आज की तरह द्वेष-भाव ने जगह नहीं बनाई थी। पड़ोसी, रिश्तेदारों की बढोत्तरी से, किसी की भलाई कर लोग खुश ही हुआ करते थे। जमुना दास ने भी समर को सारी बातें तथा हिदायतें विस्तार से बता-समझा दीं और उसे भी विदेश जाने को  प्रोत्साहित किया। पर यहां भी वही बात थी, समर की जमा-पूँजी भी उसकी खेती ही थी। संयोग से उसने इस बार लहसुन की अच्छी फसल ली थी, सो उसी को ले कर वह भी स्वर्ण देश को रवाना हो गया।

गंतव्य स्थल पहुंच कर उसने भी अपना सामान वहां के लोगों को दिखाया। भगवान की कृपा, लहसुन का स्वाद तो वहाँ के लोगों को इतना भाया कि वे सब प्याज को भी भूल गए ! इतने दिव्य स्वाद से परिचित करवाने के कारण वे सब अपने को समर का ऋणी मानने लग गए ! उसका खूब मान-सम्मान हुआ ! पर उन लोगों के सामने एक धर्मसंकट आ खड़ा हुआ कि इतनी बेहतरीन, लाजवाब वस्तु का मोल वे किस वस्तु से चुकाएं.... ! उनके लिए सोने का कोई मोल नहीं था ! इतनी दिव्य और अच्छी चीज का मोल भी वे लोग किसी बेशकीमती चीज से चुकाना चाहते थे। वे लोग इसी पेशोपेश में थे कि करें तो क्या करें, जिससे इस व्यापारी के एहसान का बदला उचित रूप से चुकाया जा सके ! 

काफी सोच-विचार के बाद वहां के मुखिया को एक उपाय सूझा !  उसने सबको सुझाया कि हमारे पास सोने से भी कीमती चीज तो अभी कुछ दिनों पहले ही आई है। उसी को इस व्यापारी को दे देते हैं। क्योंकि इतनी स्वादिष्ट चीज के बदले किसी अनमोल वस्तु को दे कर ही इस व्यापारी का एहसान चुकाया जा सकता है। सभी को यह सलाह बहुत पसंद आई और उन्होंने समर के थैलों को प्याज से भर अपने आप को ऋण मुक्त कर लिया।  

अब यहाँ देखें तो जमुना दास और समर ने अपनी तरफ से पुरजोर कर्म किए किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती ! विदेशियों ने भी अपनी और से बिना भेदभाव के भरपूर सहायता की, पर किस्मत, किस पर, किस तरह मुस्कुराई............!!  
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बेचारा समर !!

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