शुक्रवार, 2 जुलाई 2021

दिल्ली का सिंघु बॉर्डर ! कौन था यह सिंघु

चर्मकार परिवार का वह युवक जन-जन का नायक बन गया ! क्या जाट, क्या राजपूत, क्या ब्राह्मण सभी उसके मुरीद हो गए ! उसने भी बिना भेद-भाव के समाज सेवा में खुद को समर्पित कर दिया ! उसी के सम्मान स्वरुप उस जगह का नाम, जहां सात दिनों तक लड़ाई चली थी, सिंघु बॉर्डर रख दिया गया। वर्षों बाद इस गुमनाम सी जगह और सिंघुराम को इस किसान आंदोलन के धरने ने पूरे देश में विख्यात कर दिया.................!! 

#हिन्दी_ब्लागिंग 

हरियाणा और उत्तरप्रदेश के मैदानी इलाकों से घिरी दिल्ली में प्रवेश के लिए दसियों मार्ग हैं जो अलग-अलग बॉर्डर के नाम से जाने जाते हैं। सुविधा के लिए तकरीबन सारे नाम सीमा पर स्थित जगहों, गावों या उपनगरों के नाम पर ही रखे जाते रहे हैं। जैसे बदरपुर, सिंघु, नोएडा, फरीदाबाद, गाजीपुर, टिकरी, गुरुग्राम, औचंदी, झड़ौदा, कुंडली बॉर्डर इत्यादि। मुख्य मार्ग पर पड़ने वाली सीमाओं के नामों से तो सभी परिचित होते ही हैं, पर महीनों से चलने वाले किसान आंदोलन ने कुछ अनजाने से नामों को भी प्रसिद्धि दिलवा दी। ऐसा ही एक नाम है सिंघु बॉर्डर ! जो करनाल बायपास की तरफ से हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर का एक चेक पोस्ट है। शुरू में आम इंसान की तो छोड़ें अखबारों तक में इसे अज्ञानता के कारण सिंघु की जगह सिंधु बॉर्डर  कहा जाता रहा था। अभी भी अधिकांश लोगों को इस नाम के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है ! कौन था सिंघु, जिसके नाम पर इस जगह का नामकरण कर दिया गया !  


बात करीब 70-72 साल पहले 1949 के आस-पास की है। कानून व्यवस्था अभी पूरी तरह व्यवस्थित नहीं हो पाई थी। राज्यों की सीमाओं पर चोरी-डकैती, लूट-पाट, राहजनी की वारदातें होती रहती थीं। अपराधियों के वारदात के बाद एक राज्य से दूसरे में चले जाने पर पुलिस के लिए मामला पेचीदा हो जाता था। लोग रोज-रोज की इन घटनाओं से बुरी तरह तंग आ चुके थे। ऐसे ही माहौल में जब एक ठग गिरोह ने हरियाणा में एक बड़ी वारदात को अंजाम देते हुए सैकड़ों मवेशियों, बैलगाड़ियों और रसद-पानी के साथ-साथ घरों के सामान को चुरा, दिल्ली की तरफ ले जाने की कोशिश की, तब कैथल जिले के कवारतन गांव के निवासी सिंघुराम, जिनका पूरा नाम सिंघुराम सिंहमार टोरी था, ने के गांवों के आदमियों और अपने साथियों को इकठ्ठा कर उन डकैतों के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। कहते हैं कि लगातार सात दिनों तक लाठी-बल्लम से लड़ी गई लड़ाई में सिंघुराम और उनके साथयों ने पचासों ठगों को मार गिराया और सारा सामान व पशु वगैरह जिन गरीबों के थे उन्हें वापस दिलवा दिए ! पर इस झगडे और शांति व्यवस्था को भंग करने के जुर्म में उन्हें जेल की सजा भी मिली।  

कहा जाता है कि जेल से आने के बाद यह चर्मकार परिवार का युवक जन-जन का नायक बन गया ! क्या जाट, क्या राजपूत, क्या ब्राह्मण सभी उसके मुरीद हो गए ! उसने भी बिना भेद-भाव के समाज सेवा में खुद को समर्पित कर दिया ! आज से करीब पांच साल पहले उनका निधन हो गया ! उन्हीं के सम्मान स्वरुप उस जगह का नाम, जहां सात दिनों तक लड़ाई चली थी, सिंघु बॉर्डर रख दिया गया। वर्षों बाद इस गुमनाम सी जगह और सिंघुराम को इस किसान आंदोलन के धरने ने पूरे देश में विख्यात कर दिया !  

साभार अंतर्जाल 

24 टिप्‍पणियां:

MANOJ KAYAL ने कहा…

बहुत ही सुंदर जानकारी

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर जानकारी

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

मनोज जी
हार्दिक आभार

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

सुशील जी
अनेकानेक धन्यवाद

Jyoti Dehliwal ने कहा…

सुंदर जानकारी।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

ज्योति जी
बहुत-बहुत धन्यवाद

Kamini Sinha ने कहा…

अच्छी जानकारी दी आपने,दिल्ली की होते हुए भी मुझे नहीं पता था,धन्यवाद आपका ऐसे व्यक्तित्व से परिचय करवाने के लिए। सादर नमन

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

कामिनी जी
सदा स्वागत है आपका

Jigyasa Singh ने कहा…

बहुत सही,सटीक जानकारी के लिए आपका बहुत बहुत आभार।

अनीता सैनी ने कहा…

जी नमस्ते ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (०३-0७-२०२१) को
'सघन तिमिर में' (चर्चा अंक- ४११४)
पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

हार्दिक आभार, जिज्ञासा जी

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

अनीता जी
रचना के चयन हेतु अनेकानेक धन्यवाद

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

ये जानकारी तो सबको होनी चाहिए । बढ़िया पोस्ट ।

ठगों को हरा कर जो सुरक्षा की गई तो इनाम स्वरूप जेल मिली ।

तब सरकार कहाँ थी । प्रश्न पूछने वाला कोई नहीं ।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

संगीता जी
ठगों को जरूर हराया था पर शायद शांति भंग करने और कानून अपने हाथ में लेने के एवज में सजा हुई होगी

Kadam Sharma ने कहा…

अनोखी और अनजानी जानकारी ¡

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

आभार, कदम जी

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

अच्छी जानकारी !!

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

पूरण जी
ब्लाॅग पर आपका सदा स्वागत है

मन की वीणा ने कहा…

बहुत सुंदर जानकारी , सच हम अखबार , समाचार सब देखकर भी कितनी जानकारियों से दूर हैं ।
बहुत शानदार पोस्ट।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

बहुत-बहुत धन्यवाद, कुसुम जी

Meena Bhardwaj ने कहा…

आपके लेखों द्वारा सदैव बेहतरीन और सीखप्रद जानकारी मिलती है । हृदय से आभार एक नई जानकारी देते लेख हेतु।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

मीना जी
उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। ब्लॉग पर सदा स्वागत है

रेणु ने कहा…

जननायक सिंघुराम के बारे में रोचक जानकारी दी आपने गगन जी |मुझे ये जानकारी थी ही नहीं | कितनी अच्छी और ज्ञानवर्धक जानकारी है | आभार बहुत कम है इसके लिए | फिर भी हार्दिक आभार |

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

रेणु जी
उत्साहवर्धन करने हेतु अनेकानेक धन्यवाद

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