गुरुवार, 30 जुलाई 2020

तब मैं भी उतने में बेचता हूँ

शीत युग की आहट से आशंकित गांव के सरपंच ने पूरे गांव की सुरक्षा के लिए फर्रुखाबाद का जरदोजी रफ़ल (शॉल) लेने की सोची। एक विश्वसनीय दूकान से 1670/- की दर से उसने अपनी जरुरत के हिसाब से खरीदी कर ली, जिसमें अतिरिक्त कलाकारी, कीटों से सुरक्षा तथा घर-पहुंच सेवा जैसी कई सुविधाएं भी सम्मिलित थीं..............!

#हिन्दी_ब्लागिंग 
एक समय कहीं एक सुखी, समृद्ध व खुशहाल गांव हुआ करता था। पर वक्त की मार और अपनों की रार ने उसे बदहाली के रास्ते पर धकेल दिया। फिर समय ने करवट ली ! लोगों में जागरूकता आई ! अपने पैरों पर खड़े होने की ठानी गई ! परिवेश सुधरने लगा ही था कि प्राकृतिक व ईर्ष्यालु और द्वेषी पड़ोसियों जनित संकट सर पर आ खड़े हुए ! ऐसी घडी में भी कुछ बार-बार मुंहकी खाए, समाज से नकार दिए गए कुंठित लोग, अपनी धरती और अपने लोगों की सहायता करने की बजाए अपनी नाजायज हरकतों से बाज नहीं आ रहे थे। उन्हीं की एक आत्मघाती हरकत की बानगी !

''शीत युग'' की आहट से आशंकित गांव के सरपंच ने पूरे गांव की सुरक्षा के लिए फर्रुखाबाद का जरदोजी रफ़ल (शॉल) लेने की सोची। एक विश्वसनीय दूकान से 1670/- की दर से उसने अपनी जरुरत के हिसाब से खरीदी कर ली, जिसमें अतिरिक्त कलाकारी, कीटों से सुरक्षा तथा घर-पहुंच सेवा जैसी कई सुविधाएं भी सम्मिलित थीं। पर वर्षों से उसके एक दिग्भ्रमित विरोधी को, अपनी आदतानुसार इस सौदे में भी ठगाई और मूर्खता की बू आने लगी ! उसने हो-हल्ला मचाया कि रफ़ल की कीमत सिर्फ 526/- होनी चाहिए थी। सरपंच गड़बड़ कर रहा है ! अपनी बात सिद्ध करने वह उस दुकानदार के पास गया और पूछा कि कुछ दिनों पहले तुम्हारे बगल वाला विक्रेता इसे 526/- में बेच रहा था तुम तिगुनी कीमत ले रहे हो ! विक्रेता ने पलट कर पूछा, तो आपने उसी समय उससे क्यों नहीं ले लिया था ? वह बोला, उस समय उसके पास माल नहीं था ! दुकानदार ने हस कर कहा, ''सर जी ! जब मेरे पास भी माल नहीं होता तो मैं भी 526/- में ही बेचता हूँ !'' बार-बार लज्जित होने और हास्य का पात्र बनने के बावजूद ऐसे लोग अपनी कुंठा और पूर्वाग्रहों से मुक्त नहीं हो पाते ! द्वेषवश, अपने मान-सम्मान की चिंता छोड़ दूसरे को बदनाम करने के लिए कोई नया शगूफा तलाशने लगते हैं।  काश, ये अपनी बुद्धि, कौशल और अनुभवों को जनहित के लिए उपयोग में ला अपने गुम होते नाम, सम्मान और स्थान को फिर से पाने में अपने समय का सदुपयोग कर पाते !!  

2 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बात शाल की हो रही है हमें हवाई जहाज नजर आ रहा है :) बहुत खूब

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

कहीं पे निग़ाहें, कहीं पे निशाना :-)

विशिष्ट पोस्ट

गिलहरी का पुल

फिर वह दिन भी आ गया जब पुल बन कर तैयार हो गया। उस दिन उससे जुड़े सारे लोग बहुत खुश थे। तभी एक महिला मजदूर सावित्री की नजर पुल की मुंडेर पर न...