
इस ब्लॉग में एक छोटी सी कोशिश की गई है कि अपने संस्मरणों के साथ-साथ समाज में चली आ रही मान्यताओं, कथा-कहानियों को, बगैर किसी पूर्वाग्रह के, एक अलग नजरिए से देखने, समझने और सामने लाने की ! इसके साथ ही यह कोशिश भी रहेगी कि कुछ अलग सी, रोचक, अविदित सी जानकारी मिलते ही उसे साझा कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके ! अब इसमें इसको सफलता मिले, ना मिले, प्रयास तो सदा जारी रहेगा !
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10 टिप्पणियां:
ताऊ की कार्यशाला में गये थे क्या?
मुझे तो अचार पसंद आया :)
सोनिया अम्मा ने अपने हाथों से बनाया है.
जो खाए ......... हाजमा सुधर जाये.
या
इटैलियन कम्पनी का स्वादिष्ट अचार.
चखे जो एक बार.... खरीदे बार-बार.
........ कौन-सा स्लोगन पसंद आया?
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नोट : 'सुधर' मा मतलब 'बिगड़' समझें.
और नोट में आये 'मा' को का समझें.
इस आचार की चेकिंग अब बाबा राम देव करेगा, तभी खायेगे...
अचार की ये बरनी हमारे पास भी आई थी जी, हमने टेस्ट करने राज भाटिया जी के पास भेज दी, उन्हे अचार टेस्ट करने का बरसों का अनुभव है।:)
पिछले सात सालों से हर भारतीय चाहे-अनचाहे खा ही रहा है :)
प्रणाम
यह भी एक विजय!बहुत अच्छी aa - chaar जबाब नहीं ! धन्यवाद
अब समझ में आया कि ताऊ का अचार चोरी होकर कहां पहुंच गया?:)
रामराम
bahut sunder achar ...
jai baba banaras...
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