सोमवार, 13 जून 2011

हमारे मामले में तो भगवान भी लाचार हैं।

खबर विश्वसनीय सूत्रों से ही मिली थी, पर विश्वास नही हो पाया था कि ऐसा भी हो सकता है। खबर आपके सामने है और फ़ैसला आपके हाथ में। हर बारहवें साल सावन के महीने मे मेघा नक्षत्र के उदय होने के पूर्व एक मुहूर्त बनता है जिसमे प्रभू का दरबार धरती वासियों के लिए कुछ देर के लिये खोला जाता है। इसका पता अभी-अभी 2G की बखिया उधेड़ते समय अचानक ही साईंस दानों को लगा था। आनन-फानन में देशों में विचार-विमर्श हुआ, और तय पाया गया कि इस मौके का पूरा लाभ उठाना चाहिए। कमेटी बनी जिसने लाटरी सिस्टम लागू कर दिया। पहली बारी में भारत, अमेरीका तथा जापान के तीन नुमांईदों को उपर जाने का वीसा मिला। तीनों को एक जैसा ही सवाल पूछने की इजाजत थी। पहले अमेरीकन ने पूछा कि मेरे देश से भ्रष्टाचार कब खत्म होगा, प्रभू ने जवाब दिया कि सौ साल लगेंगे। अमेरीकन की आंखों मे आंसू आ गये। फिर यही सवाल जापानी ने भी किया उसको उत्तर मिला कि अभी पचास साल लगेंगे। जापानी भी उदास हो गया कि उसके देश को आदर्श बनने मे अभी समय लगेगा। अंत मे भारतवासी ने जब वही सवाल पूछा तो पहले तो प्रभू चुप रहे फिर उदास स्वर में धीरे-धीरे बोले कि, इस भूमि से पता नहीं मुझे इतना लगाव क्यूं है? जितना मैं इसका ध्यान रखता हूं उतनी ही मुझे निराशा होने लगी है। अब तो वहां के लोग भी कहने लगे हैं कि यह देश "भगवान के भरोसे ही चल रहा है।" इतना कह वे फ़ूट-फ़ूट कर रो पड़े।

अब आज के जमाने मे कौन ऐसी बात पर विश्वास करता है। पर यह खबर सोलह आने? मेरा मतलब है सौ पैसे सच है। विश्वास ना हो तो अंतर-जाल पर रशिया की अखबारों की खबर पढ लें।

6 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

भगवान की लाचारी देख आँखें नम हो आई...कंटःअ अवरुद्ध हो उठा...कुछ लिखा ही नहीं जा रहा है टिप्पणी में...भाव समझ जाना और इन्हें आंसूओं के मोती मानना....बिखरे वाले. :)

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

सत्य कहा ईश्वर ने.

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

अब तो भगवान भी परेशान है कि कहीं भारतवासी चित्रगुप्त को भी भ्रश्टाचारी न बना दें और सारे नेता स्वर्ग में आ जाएं। उन्हें अपना सिंहासन डोलता नज़र आ रहा है.... सात समन्दर डोल गया...:)

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

भगवान की दशा समझी जा सकती है ...

P.N. Subramanian ने कहा…

भगवान् के पास भ्रह्मस्त्र है. कब तक रोते फिरेंगे.

Chetan ने कहा…

khud n ro kar apradhiyon ko rulaen to baat hai