शनिवार, 30 जनवरी 2010

हँसी के मोती :) :) :) :)

बार में बंते के साथ बैठा संता उचाट सा था। बंता के बहुत पूछने पर बोला कि यार तेरी भाभी से तंग आ गया हूं, रोज-रोज के क्लेश से जीना मुश्किल हो गया है। जी तो करता है कि उठा कर खिड़की से बाहर फेंक दूं।
तो फेंक दो ना, एक बार में झंझट खत्म होगा। दो पेग चढा चुके बंता ने सलाह दी।
अरे यार, फेंक तो दूं, पर मेरा फ्लैट ग्राउण्ड़ फ्लोर पर है, जब वह फेंकने के बाद अंदर आयेगी तो तुझे तो क्या मुझे भी नहीं पता मेरा क्या होगा।
संता ने सिहरते हुए खुलासा किया।

बाऊजी बार से पूरी तरह टुन्न हो कर बाहर निकले तो गेटकीपर ने सलाम ठोका। बाऊजी ने खुश हो पूछा, आज तक तुम्हें सबसे ज्यादा कितनी टिप मिली है?
हुजुर, सौ रुपये।
अच्छा, यह लो दो सौ रुपये, खुश?
जी साहब। एक जोरदार सलाम के साथ गेटकीपर ने जवाब दिया।
तभी बाऊ जी को कुछ याद आया। उन्होंने पलट कर फिर पूछा, ये सौ रुपये तुम्हें किस कंजूस ने दिये थे?
आपने ही कल दिये थे हुजूर।

प्रवचन करने के बाद पंड़ितजी शराब की बुराईयां बताते हुए बोले कि यह ऐसी चीज है कि यदि पैर से भी छू जाए तो आदमी नरक में जाता है। इतना कह कर उन्होंने संता को इंगित कर पूछा कि हां भाई क्या समझे?
संता ने खड़े हो कर जवाब दिया, पंड़ितजी ऐसी चीज को कोई लात मारेगा तो वह नरक में ही तो जाएगा।

सबेरे-सबेरे पत्नि ने अखबार ला कर पति को दिखाया, लो देखो शराब की कितनी बुराईयां छपी हैं।
अच्छा! कल से बंद। पति ने कहा।
सचमुच शराब बंद? पत्नि ने खुश हो पूछा।
अरे शराब नहीं यह अखबार।
पति ने बुरा सा मुंह बना कर जवाब दिया।

7 टिप्‍पणियां:

Rajey Sha ने कहा…

मजेदार चुटकुले पढ़वाने के लि‍ये धन्‍यवाद।

Udan Tashtari ने कहा…

हा हा!! अखबार बंद! :)

ललित शर्मा ने कहा…

हा हा हा, जरुर साब! अखबार बंद है।:)

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

मजेदार । आभार ।

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

.... सुबह-सुबह चुटकुले...बहुत सुन्दर!!!

डॉ महेश सिन्हा ने कहा…

सुबह की शुरुआत हास्य के साथ

नेहा पाठक ने कहा…

maza aa gaya