उन दिनों गांधीजी तथा सरदार पटेल नरवदा जेल में थे। दोनों सुबह-सुबह नीम की दातुन किया करते थे। इसके लिए पटेल वहीं के पेड़ से रोज दातुन बना लिया करते थे। यह देख गांधीजी ने कहा, रोज-रोज दातुन लाने की जरूरत नहीं है। इस्तेमाल किया हुआ हिस्सा काट देने से दातुन बहुत दिनों तक चल सकती है। पटेल ने कहा, पर यहां नीम की बहुत सी टहनियां उपलब्ध हैं। गांधीजी ने कहा, हैं तो पर हम उनका दुरुपयोग तो नहीं कर सकते।
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एक बार गांधीजी तथा सरोजिनी नायड़ू आगा खां महल में थे। एक दिन सरोजिनीजी ने गांधीजी को अपने साथ बैड़मिंटन खेलने को कहा। सरोजिनीजी के दाहिने हाथ में कुछ तकलीफ थी सो उन्होंने अपने बायें हाथ में रैकेट थाम रखा था। इसे देख बापू ने भी अपने बायें हाथ में रैकेट पकड़ लिया। इसे देख सरोजिनीजी हंस पड़ीं और पूछने लगीं कि आपने बायें हाथ में रैकेट क्यों पकड़ा है? बापू बोले, तुमने भी तो बायें हाथ में ले रखा है। सरोजिनी बोलीं कि मेरे तो दाहीने हाथ में दर्द है इसलिए मैंने उसे बायें हाथ में लिया है। बापू ने तुरंत जवाब दिया, मैं तुम्हारी कमजोरी का लाभ नहीं उठाना चाहता।
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उन दिनों लाल बहादुर शास्त्री देश के प्रधान मंत्री थे। तभी एक प्रतिष्ठित व्यापारिक प्रतिष्ठान से उनके बड़े पुत्र हरिकृष्णजी को नौकरी की पेशकश की गयी। हरिकृष्णजी ने इसके बारे में अपने पिता लाल बहादुरजी को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव मेरे प्रधान मंत्री होने के कारण आया है अब यह तुम्हारे विवेक पर निर्भर करता है कि तुम यह काम करो या ना करो। यदि तुम समझते हो कि यह काम तुम्हारी लियाकत के अनुरूप है तो जरूर जाओ अन्यथा नहीं।हरिकृष्णजी ने भी बिना एक क्षण गवांए तुरंत संस्थान को मना कर दिया।






