pub-3648900737756323 कुछ अलग सा

मंगलवार, 7 सितंबर 2010

कैसा कैसा ऐसा भी होता है :-)

अरजेंटाइना के ब्यूनस आयर्स के एक मदिरालाय में श्रीमान गोमेज ने एक अनोखी शर्त जीती। उसने शीर्षासन करते हुए बीयर की दस बोतलें पी ड़ालीं।

अपने यहां जनहित में अखबारों में बहुत कुछ छपता रहता है। ऐसे ही जरमनी की एक पत्रिका में अपने पाठकों के लाभ के लिए एक लेख छापा "बिना टिकट लिए रेल यात्रा कैसे करें"। यह अलग बात है कि रेलवे ने पत्रिका पर हजारों पौंड़ का मामला दायर कर दिया, अपने नुक्सान की भरपाई के लिए।

मलेशिया के ब्रिलियंट यंग ने अपने नाम को सार्थक कर दिया। 68 साल की उम्र में उनके तीसरी बार दांतों की पंक्ति निकली।

टोंगा के मछुआरे एलोटे साबू ने अपनी प्रेमिका को मछली पकड़ने वाले जाल में ड़ाल कर समुद्र में फेंक दिया, इतना ध्यान रखा कि ड़ूबे नहीं, पर धमकी देता रहा कि जब तक उससे विवाह को राजी नहीं हो जाएगी वह उसे समुद्र से बाहर नहीं निकालेगा। अदालत ने साबू पर भारी जुर्माना ठोक ड़ाला।

सलमान खान कुछ कहना चाहेंगे ????? :-)

रविवार, 5 सितंबर 2010

शिक्षक दिवस पर ई-मेलीय गुरु मन्त्र

When Snake is alive, Snake eats Ants. When Snake is dead, Ants eat Snake. Time can turn at any time. Don't neglect anyone in your life........ .

Never make the same mistake twice, There are so many new ones, Try a different one each day.

A good way to change someone's attitude is to change our own. Because, the same sun melts butter, also hardens clay! Life is as we think, so think beautifully.

Life is just like a sea, we are moving without end. Nothing stays with us, what remain is just the memories of some people who touched us as Waves.

Whenever you want to know how rich you are? Never count your currency, just try to Drop a Tear and count how many hands reach out to WIPE that- that is true richness.

Heart tells the eyes see less, because you see and I suffer lot। Eyes replied, feel less because you feel and I cry a lot.

Never change your originality for the sake of others, because no one can play your role better than you। So be yourself, because whatever you are, YOU are the best.

Baby mosquito came back after 1st time flying. His dad asked him "How do you feel?" He replied "It was wonderful, Everyone was clapping for me!" Now that's what I call Positive Attitude...............!

इंसान का दिमाग एक अजूबा है.

जापान, तरक्की का दूसरा नाम। एक ऐसा देश जिसने सालों-साल तरह-तरह के अजूबे आविष्कारों को जन्म दिया। भिन्न-भिन्न प्रकार के रोबोट, मशीनें, कम्पयूटर, टच स्क्रीन और न जाने किस-किस चीज की वहाँ इजाद हुई। पर वहीं अजीबोगरीब अंधविश्वास भी अपना अस्तित्व जमाए बैठे हैं। शायद हमारी ही तरह।

वहीं एक ऐसा स्मार्ट टायलेट बनाया गया है जो उसके अंदर पैर रखते ही आपका वजन, तापमान और रक्तचाप ज्ञात कर लेता है। उसका उपयोग करते-करते आपके शुगर लेवल और यूरीन की भी जांच हो जाती है। इतना ही नहीं यह सारी जानकारी तुरंत आप के कम्पयूटर तक पहुंचा दी जाती है। यह है जापान की कंपनी टोटो का करिश्मा।

दूसरी ओर क्या आपने ऐसी कोई तस्वीर या चित्र देखा या खींचा है जिसमें तीन जापानी एक साथ हों?
क्योंकि यह एक बहुत ही कठिन कार्य है। जापान में यह अंधविश्वास गहरे से पैठा है कि फोटो खिंचवाते समय दो लोगों के बीच में बैठने से अपशकुन होता है और बीच में बैठने वाले की मृत्यु हो जाती है। इसीलिए कोई भी जापानी फोटो खिंचवाते समय बीच में बैठना पसंद नहीं करता।

शनिवार, 4 सितंबर 2010

एक मंदिर जहां राजा का आना वर्जित है.

नेपाल में विष्णु भगवान का एक ऐसा मंदिर है जिसमें वहां के राजा को भी प्रवेश की मनाही है। जिसका कारण राजा खुद है।

राजधानी काठमांड़ू से नौ कि.मी. दूर भगवान विष्णु की करीब 12 फुट लम्बी लेटी हुई अवस्था में एक मूर्ती पानी के कुंड़ में स्थापित है। जिसे बूढा नीलकंठ के नाम से जाना जाता है। इसकी रोज विधिवत पूजा अर्चना होती है पर यहां नेपाल के राजा और उनके परिवार का आना वर्जित है।
कहते हैं कि 17वीं शताब्दी में राजा प्रतापमल्ल रोज भगवान के दर्शन करने हनुमान ढोका स्थित अपने महल से यहां आया करते थे। फिर उन्हें रोज नौ-दस कि.मी. आना-जाना असुविधाजनक लगने लगा तो उन्होंने नीलकंठ भगवान की एक प्रतिमूर्ती अपने महल में स्थापित करवा ली। इससे भगवान नाराज हो गये और उन्होंने राजा को श्राप दे दिया कि अब से तुम या तुम्हारा कोई भी उत्तराधिकारी यदि बूढा नीलकंठ हमारे दर्शन करने आएगा तो वह मृत्यु को प्राप्त होगा। तब से आज तक राजपरिवार का कोई भी सदस्य वहां जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया है।

भगवान विष्णु के इसी स्वरूप की एक और मूर्ती राजधानी के निकट बालाजू उद्यान में भी स्थित है जो पहली मूर्तियों से अपेक्षाकृत कुछ छोटी है। राजपरिवार के सदस्य यहां दर्शन करने जाते हैं। नवम्बर माह में यहां बड़ा भारी मेला लगता है जहां दूर-दूर से लोग अपनी मनौतियां ले कर आते हैं। इस मंदिर की भी काफी मान्यता है।

शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

जादू-टोने से ग्रस्त हैं बहुतेरे देश

जादू-टोने का चलन हमारे ही देश में नहीं विश्व के बहुतेरे देशों में व्याप्त है। इसकी परंपरा दुनिया की प्राय: सभी आदिम जातियों में पायी जाती रही है। आज भी जहां-जहां ऐसी जातियों का अस्तित्व है वहां-वहां टोने-टोटके का भी वर्चस्व मिलता है।

अमेरिका में किये गये एक सर्वेक्षण के अनुसार ज्योतिष, भूत-प्रेत, आत्माओं, टोने-टोटके पर पुरुषों से ज्यादा महिलाएं विश्वास करती हैं।

इंग्लैंड़ में जादू-टोने की परंपरा अठारहवीं सदी तक बहुत प्रचलित रही। सरकार द्वारा कठोर कानूनी प्रतिबंध लगाये जाने के बावजूद इसे खत्म नहीं किया जा सका। सत्रहवीं सदी में यहां जादूगरनियों पर सर्वाधिक मुकदमे चलाये गये।

आज भी विश्व में हवाई द्वीप एक ऐसा देश है जहां टोने-टोटकों पर सर्वाधिक विश्वास किया जाता है। वहां लोगों का मानना है कि द्वीप पर सदा दुष्ट आत्माएं मंड़राती रहती हैं। यहां के पुलिस वाले भी अपने साथ हथियारों के अलावा "टी" नामक पेड़ की पत्तियों को नमक लगा कर रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे बुरी आत्माएं पास नहीं आतीं।

हमारे यहां सम्राट अशोक के समय में जादू-टोने का बहुत प्रचलन था। इसके बढते प्रभाव से अशोक चिंतित रहा करता था। उसने इसके विरुद्ध आदेश पारित किये तथा शिलालेखों पर भी खुदवाया कि यह सब बेकार की बातें हैं इन पर विश्वास ना किया जाये। पर प्रजा ने इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

मध्य युग मे भी जब राजपूत युद्ध में लड़ने जाते थे तो वे अपनी विजय के लिये तंत्र-मंत्र व जादू-टोने का भी सहारा लेते थे। इसके लिए वे विभिन्न तरह के कवच धारण किया करते थे। इनमें शिव कवच, देवी कवच, नारायण कवच तथा पंचमुखी हनुमान कवच प्रमुख थे।

गुरुवार, 2 सितंबर 2010

प्रेम प्रसंग, फिल्मी दुनिया के

आजकल फिल्मी दुनिया में इश्क भी एक जरिया या माध्यम हो गया है। अपनी सहूलियत, अपने मतलब, अपने फायदे के लिये इसका उपयोग होने लगा है। इश्क में से प्रेम की गहराई गायब हो गयी है। मौजूदा पीढी की वफादारी एक शुक्रवार से दूसरे शुक्रवार तक सीमित हो कर रह गयी है। सामाजिक या पारिवारिक मर्यादाओं का इस दुनिया में कोई स्थान नहीं रह गया है। हमारा लचर कानून भी इनके दरवाजे की दहलीज लांघने की हिम्मत नहीं कर पाता है। आज किसी विवाहित प्रेमी का बसा बसाया घर उजाड़ने में किसी अभिनेत्री को कोई परहेज, ड़र या गम नहीं होता। अब तो बात और भी आगे बढ गयी है "लीव इन रिलेशनशिप" तक।

ऐसा नहीं है कि प्रेम प्रसंग पहले नहीं होते थे। समझ लीजिए कि फिल्मों की शुरुआत के साथ-साथ ही इस रोग का भी जन्म हो गया था। पर उस समय यह मतलब पूरा करने का जरिया ना हो कर आपसी समझ थी, लगाव था, साथ-साथ रहने की ललक थी। बहुत पीछे ना जाते हुए आजादी के बाद के कुछ जाने-माने नामों का जिक्र करते हैं। जिनमें कुछ सफल रहे तो कुछ दुखांत।

जद्दन बाई और मोहन बाबू : जद्दन बाई सुप्रसिद्ध अभिनेत्री नर्गिस की मां थीं। वह अपने समय की मशहूर गायिका थीं। मोहन बाबू पंजाब से थे। दुनिया, धर्म, परिवारवालों की इच्छा के विरुद्ध जा कर दोनों ने विवाह कर लिया था। जो सदा सुखमय रहा था।

किशोर शाहू तथा स्नेहप्रभा प्रधान : किशोर शाहू जाने माने अभिनेता (दम मारो दम, गाइड) तथा फिल्म निर्माता थे तथा स्नेहलता उनकी नायिका, दोनों ने प्रेम विवाह किया था जो सफल नहीं हो सका था। दोनों में तलाक हो गया था।

राज कपूर और नर्गिस : शादी-शुदा होने के बावजूद राज कपूर का नर्गिस के साथ लगाव जग जाहिर था। पर सामाजिक-पारिवारिक दवाब के कारण यह कोई और नाम धारण ना कर सका था।

शम्मी कपूर व गीता बाली : शम्मी कपूर शुरु से ही विद्रोही स्वभाव के रहे थे। हजार अड़चनों के बावजूद उन्होंने गीता बाली से विवाह रचा ड़ाला था। पर गीता बाली की कुछ समय बाद बिमारी से मृत्यु हो गयी थी।

देवानंद और सुरैया : शायद फिल्मी दुनिया की यह सबसे दुखद कहानी रही है। दोनों के लाख प्रयासों के बावजूद उनकी शादी नहीं हो सकी। देव ने तो बाद में शादी कर ली पर सुरैया जीवनपर्यंत कुवांरी ही रही।

दिलीप कुमार और मधुबाला : मधुबाला का प्रेम प्रसंग पहले प्रेमनाथ के साथ था। पर अपने दोस्त दिलीप कुमार के कारण प्रेम नाथ ने अपने पैर पीछे खींच लिए थे। पर फिर भी मधुबाला के घर वालों की वजह से दिलीप और उसका निकाह नहीं हो सका था।
नाम तो बहुत सारे हैं, रणधीर कपूर-बबीता, ऋषी कपूर-डिंपल, अमिताभ-रेखा, अक्षय-रविना, अभिषेक-करिश्मा, और और और, जो साथ साथ काम करते-करते एक दूसरे में अपना जीवन साथी खोजते रहे। जिसमे कुछ सफल रहे तो कुछ असफल । बहुतों ने लायक ना होते हुए भी अपनी प्रेमिकाओं के लिए ढेरों फिल्में गढ डालीं जैसे चेतन आनंद और प्रिया राजवंश या व्ही. शांताराम और संध्या। यह दुनिया ही अजूबा है जिसमें ऐसी बातें होती रही थीं, होती रही हैं और होती रहेंगी।

बुधवार, 1 सितंबर 2010

है मथुरा तीनों लोकों से न्यारी पर वृन्दावन की है बलिहारी

दिल्ली से करीब 150 कि. मी. की दूरी पर स्थित मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्म भूमि है। पर उनका कर्म स्थल वृंदावन है जो मथुरा से सिर्फ 10 कि.मी. उत्तर-पश्चिम में यमुना के किनारे बसा हुआ है। तुलसी के पौधों की भरमार होने के कारण इस जगह का नाम वृंदावन पड़ गया। यह ब्रज का ह्रदय स्थल है। भक्तगण यहां आकर आनंद सागर में ड़ुबकी लगा कर कृत्य-कृत्य हो जाते हैं। हर कृष्ण भक्त की इच्छा होती है जीवन में कम से कम एक बार यहां आकर धन्य होने की।
यही वह जगह है जहां प्रभू ने अपने बाल्यकाल और किशोरावस्था में अनगिनत लीलाएं कर जन जीवन को सुगम बनाया था। यहां आकर पता चलता है कि प्रेम और भक्ति का साम्राज्य किसे कहते हैं। दर्शनार्थियों के लिए यहां बहुत सारे नये और प्राचीन मंदिर हैं।

श्री गोविंद मंदिर : यह बहुत प्राचीन मंदिर है। इसे जयपुर के राजा मानसिंह ने बनवाया था।

श्री रंगजी का मंदिर : दक्षिणी स्थापत्य शैली पर बने इस अति सुंदर और विशाल मंदिर को बनने में करीब सात साल लगे थे। मंदिर प्रांगण में स्थित सोने का ध्वज स्तंभ देखने लायक है।

बांके बिहारीजी का मंदिर : स्वामी हरिदासजी द्वारा निर्मित यह एक और दर्शनीय मंदिर है। यहां स्थापित अति आकर्षक मूर्ति को चमत्कारी माना जाता है।

राधा गोविंदजी का मंदिर : इसे ग्वालियर के महाराज जीवाजी राव सिंधिया ने अपने गुरु के आदेश पर 1860 में बनवाया था। इसे ब्रह्मचारीजी का मंदिर भी कहते हैं।

युगल किशोर मंदिर : इस मंदिर की मूर्ति भी बहुत सुंदर और मनोहारी है।

लाला बाबू का मंदिर : बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जमींदार कृष्णचंद्र द्वारा निर्मित यह मंदिर भी देखने वालों को मोह लेता है। अपने निर्माता के उपनाम पर यह मंदिर प्रसिद्ध है।

श्रीकृष्ण-बलराम मंदिर : इसे कृष्ण भावना संघ समुदाय द्वारा बनवाया गया है। यहां अनेक विदेशी भक्त वैष्णव धर्म में दीक्षित होकर निवास करते हैं। इसीलिए इसे अंग्रेजों का मंदिर भी कहा जाता है।

इन प्रमुख मंदिरों के अलावा भी अनेकोंनेक मंदिर वृंदावन में देखने लायक हैं जैसे जयपुर वाला मंदिर, पगला बाबा का मंदिर, जानकी-वल्लभ मंदिर, शालिग्राम मंदिर, गोपेश्वर मंदिर, राधा रमण मंदिर तथा कांच का मंदिर आदि।
इसलिए जब भी जाएं समय हाथ में रख कर जाएं हड़बड़ी में बहुत कुछ देखने से छूट सकता है।

जय श्रीकृष्ण।
बोलो बांके बिहारी की जय।
सबको जन्माष्टमी की ढेरों शुभकामनाएं।

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