कभी-कभी आपने देखा होगा कि क्रिकेट में बुरी तरह हार जाने के बावजूद एक ऐसा विज्ञापन आता रहता था, जिसमें इरफान की बाल आग उगल रही होती है, विरेन्द्र सहवाग के बैट से छू कर बाल मैदान के बाहर जा रही होती है और धोनी असंभव सा कैच लेने में सफल होता है और आप भारत की हार, जिसने टीम को प्रतियोगिता से बाहर करवा दिया था, को याद कर कुढते रहते हैं।
ऐसा ही कुछ पिछले एक पखवाड़े से मेरे साथ हो रहा था, #दीपिका_पादुकोंण_को_खम-खा-कर #BSNL का प्रचार करते देख। उसके अनुसार #BSNL पूरे "इंडिया" को लाइटिनिंग युग में ले जायेगा। हर चीज विद्युत की तेजी से सम्पन्न हो जाया करेगी। अब बताईये जिसका फोन पिछले 14 दिनों से कोमा में पड़ा हो, जिसका चोंगा घर का हर सदस्य दिन में दर्जनों बार धड़कन वापस आने की उम्मीद से उठाता हो, जिसकी मधुर ध्वनी सुनने के लिये सब के कान चौबीसों घंटे उसकी ओर लगे हों उनके दिल पर क्या बीतती होगी यह सब देख-सुन कर। जी हां पूरे चौदह दिनों से मेरा फोन कोमा में है। इसके डाक्टरों को पूछ-पूछ कर हार गया कि ऐसा कौन सा फ्लू इसे हो गया है जो इसकी बोलती बंद है। पर आज तक किसी डाक्टर ने सही जवाब दिया है जो यह बताते। रोज कल-कल करते कितने कल निकल गये यह सच साबित करते हुए कि क्या कभी कल भी आया है।
इधर यह हालत है कि मैं आप लोगों से ना मिल पाने की वजह से गम खाये जा रहा हूं। यह जानते हुए भी कि मेरे वहां ना जाने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता, पर वहां ना होने की वजह से मुझे जो फर्क पड़ा उसे कैसे बताऊं। सोचता हूं कि क्यूं एक छोटे से इलाके के कुछ सौ फोनों को सुधारने में सैकड़ों घंटे लग जाते हैं सरकारी मशीनरी को। जब की ना इस बार इतना पानी ही बरसा कि जल-थल हो जाये। दूसरी ओर निजी कंपनियों के कर्मचारी दिन-रात एक कर देते हैं एक-एक फोन को काम करवाते रखने के लिये। उत्तर भी मिल जाता है इस कहानी से -
एक बार एक शेर एक खरगोश को अपना शिकार बनाने के लिये उस पर झपटा। काफी दौड़ने के बाद भी वह शेर के हाथ नहीं आया। उसके लौटने पर शेरनी ने पूछा कि तुम एक अदने से खरगोश को क्यों नहीं पकड़ पाये? शेर ने जवाब दिया , मैडम वह अपनी जिंदगी बचाने के लिये दौड़ रहा था, जबकि मैं उसे खाने के लिये।
ऐसा ही कुछ पिछले एक पखवाड़े से मेरे साथ हो रहा था, #दीपिका_पादुकोंण_को_खम-खा-कर #BSNL का प्रचार करते देख। उसके अनुसार #BSNL पूरे "इंडिया" को लाइटिनिंग युग में ले जायेगा। हर चीज विद्युत की तेजी से सम्पन्न हो जाया करेगी। अब बताईये जिसका फोन पिछले 14 दिनों से कोमा में पड़ा हो, जिसका चोंगा घर का हर सदस्य दिन में दर्जनों बार धड़कन वापस आने की उम्मीद से उठाता हो, जिसकी मधुर ध्वनी सुनने के लिये सब के कान चौबीसों घंटे उसकी ओर लगे हों उनके दिल पर क्या बीतती होगी यह सब देख-सुन कर। जी हां पूरे चौदह दिनों से मेरा फोन कोमा में है। इसके डाक्टरों को पूछ-पूछ कर हार गया कि ऐसा कौन सा फ्लू इसे हो गया है जो इसकी बोलती बंद है। पर आज तक किसी डाक्टर ने सही जवाब दिया है जो यह बताते। रोज कल-कल करते कितने कल निकल गये यह सच साबित करते हुए कि क्या कभी कल भी आया है।
इधर यह हालत है कि मैं आप लोगों से ना मिल पाने की वजह से गम खाये जा रहा हूं। यह जानते हुए भी कि मेरे वहां ना जाने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता, पर वहां ना होने की वजह से मुझे जो फर्क पड़ा उसे कैसे बताऊं। सोचता हूं कि क्यूं एक छोटे से इलाके के कुछ सौ फोनों को सुधारने में सैकड़ों घंटे लग जाते हैं सरकारी मशीनरी को। जब की ना इस बार इतना पानी ही बरसा कि जल-थल हो जाये। दूसरी ओर निजी कंपनियों के कर्मचारी दिन-रात एक कर देते हैं एक-एक फोन को काम करवाते रखने के लिये। उत्तर भी मिल जाता है इस कहानी से -
एक बार एक शेर एक खरगोश को अपना शिकार बनाने के लिये उस पर झपटा। काफी दौड़ने के बाद भी वह शेर के हाथ नहीं आया। उसके लौटने पर शेरनी ने पूछा कि तुम एक अदने से खरगोश को क्यों नहीं पकड़ पाये? शेर ने जवाब दिया , मैडम वह अपनी जिंदगी बचाने के लिये दौड़ रहा था, जबकि मैं उसे खाने के लिये।