pub-3648900737756323 कुछ अलग सा: नागराज कॉमिक्स
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गुरुवार, 8 जुलाई 2021

सोनू सूद, कुछ कही कुछ अनकही

बहुत से ऐसे लोग हैं जो सर्वस्व देकर भी गुमनाम रहना चाहते हैं, बिना किसी अपेक्षा के समाज की  सेवा करते रहते हैं ! अब राजकुमार राव को ही ले लीजिए, फिल्मों में आए उन्हें ज्यादा समय नहीं हुआ ! धन-यश के मामले में सोनू से कोसों पीछे भी हैं पर उन्होंने भी इस आपदा में बिना किसी शोर-शराबे के पांच करोड़ रुपयों का दान किया ! कितने लोगों को पता चला ! कुछ होते हैं जो देते हैं तो बदले में कुछ अपेक्षा भी रखते हैं ! लब्बोलुआब यह है कि किसी ने चाहे कैसे भी, यदि कुछ दिया तो मुसीबत में किसी जरूरतमंद की सहायता तो हुई ही ! फिर चाहे देने वाले की मंशा कुछ भी हो...................!!

#हिन्दी_ब्लागिंग 
दो-तीन से लगातार चल रही बरसात की झडी आज सोमवार को जा कर कहीं थमी थी। मौसम सुहाना हो गया था। सुबह के ग्यारह बज रहे थे। कल इतवार की छुट्टी के बाद बाजार खुलने लगे थे। वैसे भी पंजाब के इस कस्बाई शहर मोगा में जरुरत के सामान को छोड़ बाकी दुकानें तकरीबन ग्यारह बजे के आस-पास ही खुलती थीं। लाला शक्ति सागर सूद भी अपनी कपडे की दूकान, बॉम्बे क्लॉथ हाउस, की साफ़-सफाई करवा, सामान वगैरह व्यवस्थित कर बैठे ही थे कि एक युवक दौड़ता हुआ आया और दूर से ही चिल्ला कर बोलने लगा, लालाजी बधाई हो ! पुत्तर दे पेओ बण गए ओ !'' लाला शक्ति सूद ने खुशखबरी सुनते ही अपनी मोटरसाइकिल उठाई और उसी क्षण घर की ओर रवाना हो लिए ! दिन था, 30 जुलाई, 1973, घडी दोपहर के बारह बजा रही थी !
लब्बोलुआब यह है कि किसी ने चाहे कैसे भी, यदि कुछ दिया, तो मुसीबत में किसी जरूरतमंद की सहायता तो हुई ही ! फिर देने वाले की मंशा चाहे कुछ भी हो 
व्यवसाई पिता शांति सागर सूद और शिक्षिका सरोज सूद की दूसरी संतान को सब लाड से सोणा पुत्तर, सोणा पुत्तर कह कर बुलाते थे ! समय के साथ वही संबोधन कुछ बदल कर सोनू हो, बच्चे का नाम ही बन गया ! यह संबोधन सबकी जुबान पर ऐसा चढ़ा कि फिर किसी को कुछ और नाम रखने का कभी विचार ही नहीं आया ! स्कूल-कॉलेज-कर्म क्षेत्र सभी जगह इस नाम ने ही पहचान बनाई ! यहां तक कि 2020 की महामारी रूपी आपदा में तो यह बड़े-बड़े दानवीरों को पीछे छोड़ जन-जन का सगा बन गया !
सोनू सूद नागराज के गेटअप में 
बचपन से ही सोनू को लोगों के आकर्षण का केंद्र बनना और किसी भी तरह चर्चा में बने रहना बहुत भाता था। फिल्मों के प्रति भी उसका बहुत रुझान था । उसके प्रिय कलाकार हॉलीवुड के स्टार सिल्वेस्टर स्टैलोन और अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर थे । उनकी बॉडी बिल्डिंग से प्रभावित हो इसने भी अपने शरीर को वैसा ही बनाने की ठान ली, जिसमें वह सफल भी रहा। एक्टिंग में उसके आदर्श सदा से ही अमिताभ बच्चन रहे।सेक्रेड हार्ट स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही सोनू का रुझान फिल्मों की तरफ हो गया था। पर माँ के अनुशासन के कारण उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी और स्कूल के बाद नागपुर के यशवंतराव कालेज से अपनी इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग की डिग्री भी प्राप्त कर ली पर फिल्मों में काम करने की चाहत कम नहीं हुई ! एक्टिंग का कीड़ा उसे लगातार काटे जा रहा था !

                            https://www.youtube.com/watch?v=PXLzpVpx12A
                                     (सोनू सूद अभिनीत नागराज की विडिओ क्लिपिंग )
एक्टिंग के कीड़े का इलाज सिर्फ मुंबई में ही संभव था ! सो जाना तो बनता ही था ! पर वहां इलाज इतना आसान भी नहीं था ! कहते हैं मुंबई किसी को भी सफलता देने के पहले उसका कठोर से कठोर इम्तिहान लेती है। जिसमें लियाकत होती है वही सफल होता है ! सोनू ने भी कई पापड बेले ! 1999 में तम‍िल फिल्म कल्लाझागर से एक्ट‍िंग डेब्यू किया था ! साल 2001 में शहीद-ए-आजम फिल्म में भगत सिंह के किरदार से बॉलीवुड में एंट्री की थी ! इसके बाद और भी आधा दर्जन से ऊपर फिल्मों में काम किया पर फिर भी कोई ख़ास पहचान नहीं बन पाई। इसी बीच नागराज कॉमिक्स के प्रमोशन के लिए चमकती आँखों और गहरे हरे रंग के कॉस्ट्यूम में एक विज्ञापन फिल्म भी की, जिसको करने का बाद में अफ़सोस भी बहुत हुआ: पर पेट जो ना करवाए वही कम ! आखिर सफलता की देवी मुस्कुराई और युवा, चंद्रमुखी, आश‍िक बनाया आपने, जोधा अकबर, सिंह इज किंग, एक विवाह ऐसा भी, दबंग, आर राजकुमार, गब्बर इज बैक जैसी एक के बाद एक सफल होती फ़िल्में मिलती चली गईं ! मोगा जिले का वही छोटा सा सोनू नाम चल निकला ! पर जहां शोहरत होती है वहां विवाद भी होता है ! सोनू की बढ़ती शोहरत ने भी विवाद को जन्म देना ही था, दिया ! बहुत से लोगों का मानना था कि महामारी के आपातकाल को सोनू ने अपने हक़ में भुनाया ! नाम कमाने के इस मौके को हाथों-हाथ लपका गया ! 

समय के लिए तो अपने लिए भी समय नहीं होता ! वह निर्बाध रूप से चलता रहता है ! इस दौरान बहुत कुछ बदल जाता है ! आमूल-चूल परिवर्तन हो जाते हैं ! पर सोनू की छुटपन से ही चर्चित होने की लालसा में समय के साथ भी कोई बदलाव नहीं आया ! लाइमलाइट में आने का कोई भी मौका उसने नहीं छोड़ा ! चाहे फिल्मों का कोई सीन हो या फिर अपने सहकर्मियों के साथ विवाद ! कुछ लोगों की नज़र में यह बात थी भी ! तो जब ऐसा ही एक अवसर, कोरोना की महामारी के दौरान उसके हाथ लगा, जिसे खूब भुनाया गया ! प्रचार और प्रसार ऐसा हुआ जैसे इस एक अकेले ने ही लोगों की सहायता की हो ! क्योंकि होती है कुछ लोगों में खबरों में बने रहने की लालसा ! कुछ लोगों को यह बात नागवार गुजरी ! पर क्यों यह तो वही लोग जानें ! 

संसार में हर तरह के लोग होते हैं ! बहुत से ऐसे लोग हैं जो सर्वस्व देकर भी गुमनाम रहना चाहते हैं ! बिना किसी अपेक्षा के समाज और लोगों की सेवा-सहायता करते रहते हैं ! अब राजकुमार राव को ही ले लीजिए, फिल्मों में आए उन्हें ज्यादा समय नहीं हुआ ! धन-यश के मामले में सोनू से कोसों पीछे भी हैं पर उन्होंने भी इस आपदा में बिना किसी शोर-शराबे के पांच करोड़ रुपयों का दान किया ! कितने लोगों को पता चला ! कुछ होते हैं जो देते हैं तो बदले में कुछ अपेक्षा भी रखते हैं और कुछ लोग सिर्फ विघ्नसंतोषी होते हैं जो हर अच्छाई में भी बुराई ढूंढने में खपे रहते हैं। लब्बोलुआब यह है कि किसी ने चाहे कैसे भी, यदि कुछ दिया तो मुसीबत में किसी जरूरतमंद की सहायता तो हुई ही ! फिर चाहे देने वाले की मंशा कुछ भी हो ! लोग कुछ भी कहें ! उनका क्या है, वे तो वैसे भी कहते ही रहते हैं !!

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