शनिवार, 1 मई 2021

क्रिकेट और कोरोना

जिस तरह क्रिकेट में रन बनाने के लिए सबसे आवश्यक चुस्त शरीर और बेहतरीन बल्ला होना सबसे जरुरी है उसी तरह कोरोना से निपटने के लिए भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी और डॉक्टरी प्रोटोकॉल का पालन ही सबसे जरुरी है। आज मीडिया पर हर तीसरा इंसान अपने गले में दो सौ रूपए का स्टेथोस्कोप लटकाए डॉक्टर बन कोरोना का शर्तिया इलाज बताए जा रहा है ! ऐसी सुनी-सुनाई बातों, मीडिया पर धकेले जा रहे नुस्खों या गुगलिया ज्ञान द्वारा कुछ भी आजमा लेना और उस पर ज्यादा ध्यान देना, किसी को भी हार की कगार पर ले जा सकता है.........!

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अभी देश में क्रिकेट और कोरोना दोनों का दौर जारी है। कुछ लोग भले ही क्रिकेट को भी एक तरह की बिमारी ही मानते हों पर वैसे इसमें और कोरोना में दूर-दूर का कोई रिश्ता नहीं है ! पर कुछ ऐसी बातें हैं, जो कोरोना से बचाव में  क्रिकेट के खेल से समझी या सीखी जा सकती हैं ! 

क्रिकेट में जीतने के लिए सबसे बड़ी अहमियत रन बनाने की होती है। उन्हीं के कमी-बेशी से हार-जीत निर्धारित की जाती है। रन बनाने के लिए जो दो चीजें सबसे जरुरी होती हैं उनमें पहला है चुस्त शरीर ! जो अपनी तेज निगाहें, दिमाग और बाकी शरीर के अवयवों के ताल-मेल, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता से खेल को अपने पक्ष में करने में अहम् भूमिका  निभाता है। दूसरा है बैट। विशेषज्ञ द्वारा अच्छी तरह तराशा गया हर मानक पर खरा उतरने वाला बेहतरीन मजबूत लकड़ी से बना बल्ला ! बस इन दोनों के अलावा और जो कुछ भी ताम-झाम होता है वह सब गौण है। फिर वह चाहे ग्लव्स हों ! पैड हों ! गार्ड हों ! हेल्मेट हो ! जूते हों या कुछ भी ! यह कोई मायने नहीं रखता कि आपने किस कंपनी के पैड, ग्लव्स या जूते पहने हैं ! उनकी लाइनिंग कैसी है ! उनकी पैडिंग नरम रबर की है या स्पंज की ! यह सब चीजें एक अतिरिक्त आत्मविश्वास जरूर देती हैं जो निश्चिन्त हो खेलने में सहायक होता है ! पर इनके बिना भी रन बनाए जा सकते हैं जो सिर्फ और सिर्फ बल्ले और शरीर के तालमेल से ही संभव है। 

जिस तरह क्रिकेट में रन बनाने के लिए सबसे आवश्यक चुस्त शरीर और बेहतरीन बल्ला होना सबसे जरुरी है उसी तरह कोरोना से निपटने के लिए भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी और डॉक्टरी प्रोटोकॉल का पालन सबसे जरुरी है। इनके अलावा सुनी-सुनाई बातों, मीडिया पर धकेले जा रहे नुस्खों या गुगलिया ज्ञान द्वारा कुछ भी आजमा लेना और उस पर ज्यादा ध्यान देना, हार की कगार पर ले जा सकता है।आज मीडिया पर कोरोना से लड़ने के सैंकड़ों उपायों की बाढ़ सी आई हुई है ! हर तीसरा इंसान अपने गले में दो सौ रूपए का स्टेथोस्कोप लटकाए, डॉक्टर बन कोरोना का शर्तिया इलाज बताए जा रहा है ! आम इंसान इतना डरा और आतंकित है कि वह हर ऐसे इलाज को, बिना उसका परिणाम जाने, बिना उसकी प्रामाणिकता परखे, बिना सोचे-समझे उसे आजमाने को तत्पर हो जाता है ! जबकि ऐसे अभी तक बताए जा रहे नुस्खे, भले ही किसी भी पैथी के हों, रोग को हराने में कारगर नहीं हैं। इनसे शरीर को कुछ अतिरिक्त सुरक्षा भले ही मिल जाती हो ! रोग से लड़ने में सहायक भले ही हो जाते हों, पर रोग मुक्ति दिलाना अभी इनके बस का सिद्ध नहीं हुआ है। आज जब यह भयंकर बिमारी पूरी तरह से अभी तक बेकाबू है तो ऐसे में कुछ भी उपाय कर लेना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। 

इसलिए रोग से मुक्त होने के लिए सरकार और डॉक्टरों द्वारा जारी निर्देश ही एकमात्र उपाय हैं ! यदि आप कोई और भी उपाय कर रहे हैं तो करें, हो सकता है कि उससे आत्मविश्वास में वृद्धि हो पर ''प्रोटोकॉल'' का पालन भी जरूर करते रहें ! किसी भी हालत में उसे दरकिनार ना करें ! क्योंकि यही वह बल्ला है जो इस खेल में आपको जीत दिला सकता है !  

4 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

कोरोना भी चकित होगा कि क्या क्या ज्ञान बाँटा जा रहा ।
सटीक विश्लेषण ।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

संगीता जी
घबड़ा भी रहा होगा,पता नहीं कौन सा नुस्खा उसका सफाया कर दे

Kadam Sharma ने कहा…

Bahut sundar vishleshan

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

धन्यवाद, कदम जी
सामयिक लगा इसलिए साझा कर लिया

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