pub-3648900737756323 कुछ अलग सा: ये तो इंतिहा है, है कि नहीं ?

बुधवार, 12 अक्टूबर 2011

ये तो इंतिहा है, है कि नहीं ?

खुद ही को कर लिया इतना "बुलंद" कि अब खुदा भी पूछ रहा है कि, अबे! उतरोगे कैसे ?
आप कोई सहायता कर सकते हों तो जरूर करें।

4 टिप्‍पणियां:

SANDEEP PANWAR ने कहा…

ये बकरियाँ भी ऐसी-ऐसी जगह चढ जाती है जहाँ हम कल्पना भी नहीं कर सकते है।

Asha Joglekar ने कहा…

वाह खुदा को भी पूछना पड गया । बहुत सुंदर मजेदार प्रस्तुति ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जहाँ दुनिया डरी,
वहाँ पहुँची बकरी।

anshumala ने कहा…

क्या बक-री है !

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