इन्हें देखिए और बताइये कि जब यह सब बन रहा था तो बनाने वाले का ध्यान कहां था :-)






इस ब्लॉग में एक छोटी सी कोशिश की गई है कि अपने संस्मरणों के साथ-साथ समाज में चली आ रही मान्यताओं, कथा-कहानियों को, बगैर किसी पूर्वाग्रह के, एक अलग नजरिए से देखने, समझने और सामने लाने की ! इसके साथ ही यह कोशिश भी रहेगी कि कुछ अलग सी, रोचक, अविदित सी जानकारी मिलते ही उसे साझा कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके ! अब इसमें इसको सफलता मिले, ना मिले, प्रयास तो सदा जारी रहेगा !
माता के समान कोई छाया नहीं, माता के समान कोई सहारा नहीं, माता के समान कोई रक्षक नहीं, माता के समान कोई शिक्षक नहीं और माता के ममत्व के समान ...
6 टिप्पणियां:
सच में कुछ अलग सा ...
एक से बढ़कर एक... दिमाग साथ में लाते तो बात ही क्या थी
पागल हर देश मे मिलते हे:)लेकिन इतने सारे जरुर यह सब रिश्ते मै भाई होंगे
एक से बढ़कर एक...
कहाँ से इकट्ठे किये जी :)
मजा आ गया
प्रणाम
Gajab, waise paint karane ka tarika behatareen hai
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