मंगलवार, 20 नवंबर 2018

जयंति, पुण्यतिथि वही, जिससे राजनितिक लाभ मिल सके !

किसी को सरोजिनी नायडू, अरुणा आसफ अली, भीकाजी कामा, कमला देवी चट्टोपाध्याय जैसी अनेकानेक महिलाओं के बारे में भी कुछ जानकारी है ? क्या इन आदरणीय महिलाओं का देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में दिया गया योगदान किसी को भी याद नहीं ! या फिर इनकी जंयती या पुण्यतिथि कोई राजनितिक लाभ नहीं दे सकती इसलिए इन्हें याद ही नहीं किया जाता ! इस ओर तो कभी महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलवाने का शोर मचाने वाले, महिलाओं की हालत पर ग्लिसरिनी आंसू बहाने वाले, तथाकथित लेखक-लेखिकाओं, बुद्धिजीवियों, नाट्य-कर्मियों की तरफ से कोई बयान पढ़ा-सुना नहीं ! ऐसा क्यूँ ? क्या सिर्फ इसलिए क्यूंकि उससे नाहीं दाम मिलता है ना हीं नाम ! नाहीं कोई ''फ़ायदा''..................!

#हिन्दी_ब्लागिंग   
होता होगा किसी जमाने में राजनीती का मतलब देश की सेवा और देशवासियों का उत्थान ! पहले भी मताविरोध होता था, सबका अलग-अलग नजरिया था, अलग-अलग सोच भी थी, पर पक्ष-विपक्ष का ध्येय एक ही होता था, देश की तरक्की और देशवासियों को खुशहाली। पर आज यह अधिकाँश के लिए सिर्फ अपना और अपने कुटुंब को तारने का जरिया हो गया है। हर तरफ झूठ, फरेब, धोखा, छल का बोलबाला नजर आता है। ना कोई आस्था बची है ना हीं कोई निष्ठा ! ना किसी का लिहाज नाहीं किसी का सम्मान ! हरेक को सिर्फ सत्ता चाहिए ! वह भले ही कहीं से, किसी भी तरह, किसी के द्वारा भी मिले ! हालात ऐसे हो गए हैं कि कोई सच भी बोलता है तो लोग शक करने लगते हैं। कोई ईमानदारी से काम करना चाहता है तो उसमें भी खोट खोजा जाने लगा है। 

आज लोगों का विश्वास पूरी तरह से नेता बिरादरी से उठ गया है। ज्यादातर लोग उनकी चालों को समझने लगे हैं। उनके कहने को कोई गंभीरता से नहीं लेता ! ये बात महानुभाव लोग भी समझ गए हैं इसीलिए इन दिनों एक नया चलन सामने आया है ! वह यह कि चुनाव इत्यादि के समय, साफ़-सुथरी छवि वाले, किसी नामी खानदान से जुड़े, अराजनीतिक लोगों से कोई ऐसी बात कहलवाना जिससे उकसाने वाले की मंशा पूरी हो जाए ! इससे अजीब सा माहौल हो गया है ! कोई भी उठ कर कुछ भी कहने लगता है ! जैसे, नीयत कुछ भी हो, अभी भाजपा ने ग्वालियर की राजमाता सिंधिया की जन्मशती मनाई। ग्वालियर कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा की सीट है। उसे लगा होगा कि कहीं चुनावी ऊंट करवट ना बदल दे ! पर इस आयोजन का विरोध भी नहीं किया जा सकता। पर कुछ तो होना ही चाहिए था, शायद इसी लिए  अब एक व्यक्तव्य तारा भट्टाचार्य, की तरफ से आया या दिलवाया गया है कि ''मोदी सरकार राजमाता सिंधिया की जन्मशती मना रही है लेकिन ''कस्तूरबा गांधी जी'' की 150वीं जयंती मनाने के लिए कोई राष्ट्रीय समिति नहीं बनी !''

अभी सरदार पटेल की मूर्ति का विवाद थमा नहीं है, जिसमें बार-बार भाजपा पर आरोप लगता है कि उसने कांग्रेस के नेता को अपना बनाने की कोशिश की है। तो यदि इधर से कस्तूरबा जी की 150 जयंती का आयोजन भी कर दिया जाए तो विघ्नसंतोषी क्या गांधी जी का भी भगवाकरण करने का आरोप नहीं लगाएंगे ? क्योंकि गंदी राजनीती ने देश तो देश, नेताओं को भी बाँट कर रख दिया है। अब उनके कर्मों, उनके देश के लिए किए गए बलिदान, उनके त्याग की बात नहीं देखी जाती, सिर्फ उनके समय उनकी पार्टी को देख-दिखा कर उनका दर्जा तय किया जाता है। इसके साथ ही सवाल यह भी उठता है कि क्या इसके पहले ''बा'' की 50वीं या 100वीं जयंती मनाई गयी थी ? जो इसी बार अनदेखा होने की बात की जा रही है ! क्या इस बारे में कोई प्रस्ताव भेजा गया था या सिर्फ मौके को ताड़ कर आलोचना शुरू कर दी गयी है ! ज्यादा संभावना तो इसी बात की है कि चुनाव के कारण राजमाता के कार्यक्रम का विरोध भारी पड़ जाएगा इसलिए  इस बात को कहलवाया गया है ! जिसने भी यह बात उठवाई है क्या उसे सरोजिनी नायडू, अरुणा आसफ अली, भीकाजी कामा, कमला देवी चट्टोपाध्याय जैसी महिलाओं के बारे में भी कुछ जानकारी है ? ये तो कुछ नाम हैं, ऐसी अनगिनत महिलाओं ने अपनी जान, घर, परिवार की चिंता किए बगैर अपने आप को स्वतंत्रता के लिए होम कर दिया ! इसके बदले में उनके परिवार ने भी कभी देश से कुछ नहीं चाहा ! शायद इसी कारण उन्हें भुला भी दिया गया ! पर जिनके नाम याद भी हैं, उन आदरणीय महिलाओं की किसी को भी याद नहीं आती ? या फिर इनकी जंयती या पुण्यतिथि कोई राजनितिक लाभ नहीं दे सकती इसलिए इन्हें याद ही नहीं किया जाता ! इस ओर तो कभी महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलवाने का शोर मचाने वाले, महिलाओं की हालत पर ग्लिसरिनी आंसू बहाने वाले, तथाकथित लेखक लेखिकाओं, बुद्धिजीवियों, नाट्य-कर्मियों की तरफ से कोई बयान पढ़ा-सुना नहीं ! ऐसा क्यूँ ? क्या सिर्फ इसलिए क्यूंकि उससे नाहीं दाम मिलता है ना हीं नाम ! नाहीं कोई ''फ़ायदा'' !
इस पर भी कभी कोई सोचेगा, बात उठाएगा, धरना देगा ! शायद नहीं !!  

2 टिप्‍पणियां:

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व दूरदर्शन दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

हर्ष जी, आपका और ब्लॉग बुलेटिन का हार्दिक धन्यावाद

विशिष्ट पोस्ट

क्या सम्पाती का सूर्य के नजदीक पहुंचना, सिर्फ एक गल्प या कोरी कल्पना है ?

सम्पाती और जटायू का सूर्य  प्रयाण  कोई भावावेश में, अहम के अतिरेक में या अति उत्साह में उठा लिया गया कदम नहीं था।  अंतरिक्ष में जाना कोई ह...