सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

एक प्राकृतिक और चमत्कारिक औषधि इसबगोल


आज के भाग-दौड के जमाने में खुद को चुस्त-दुरुस्त रखना टेढी खीर है। ना ढंग से खाना हो पाता है ना सोना। हर समय अफरा-तफरी, पीछे छूट जाने का भय, काम का तनाव, भागते-भागते ही दिन-दोपहर-शाम निकलते जाते हैं। पर शरीर को चलाए रखने के लिए भोजन की भी जरूरत पडती है। ऐसे में जो मिला खा कर काम चलाते हैं, अधिकांश लोग। नतीजा खराब पाचन, पेट की गडबड, अपच और कब्ज जैसी तकलीफें। फिर उनके लिए तरह-तरह की दवाएं या फिर डाक्टर के चक्कर।

आदमी की आधी से ज्यादा बिमारियों का कारण पेट है। यदि यह सुचारु रुप से काम करता रहे तो अधिकांश रोग पास ही ना फटकें। तुरंत राहत पाने के लिए बाजार में सैंकडों दवाएं उपलब्ध हैं, पर उनका कुछ न कुछ गलत प्रभाव भी होता ही है। प्रचार की धुंध में बहुत सारी प्राकृतिक औषधियों को लोग भुला बैठे थे पर उनकी उपयोगिता उन्हें फिर लोकप्रिय बनाने में सफल रही है।
 गलत खान-पान से उपजी व्याधियों को दूर करने की एक ऐसी ही अचूक, प्राकृतिक और चमत्कारिक औषधि है "इसबगोल की भूसी"।

यह एक महीन पत्तों वाला झाडीनुमा पौधा है। इसकी शाखाओं पर फूल आते हैं जिनमें एक सफेद पतली झिल्ली में पौधे के बीज लिपटे होते हैं। यह झिल्ली ही इसबगोल की भूसी है। इसके औषधिय महत्व को हर चिकित्सा प्रणाली में स्वीकार किया गया है। इन्हें शीतल, मलावरोध को दूर करने वालाकब्जअतिसारपेचिश और आंत के रोगों के लिए बहुत उपयोगी पाया गया है। इसमें म्यूसिलेज नामक तत्व पाया जाता है जो पानी के साथ मिल कर स्वादरहित लसीली तथा चिकनी जेली में बदल जाता है जो पेट में पानी सोख कर अपने आकार से तिगुनी हो जाती है जिससे आंतें और सक्रिय हो पचे पदार्थों को आगे बढाने लगती हैं। यह भूसी शरीर से 'टाक्सिंस और बैक्टीरिया' को भी शरीर से बाहर कर देती है। इसके लसीलेपन के कारण मरोड और पेचिश में भी आराम मिलता है। इस पौधे के बीज भी काफी उपयोगी होते हैं। जो बवासीर में काफी
लाभदायक होते हैं। इसकी भूसी को दूध या पानी के साथ लिया जा सकता है। सामान्यत: भूसी का प्रयोग रात सोने के पहले किया जाता है। सामान्यत: एक से दो चम्मच की मात्रा  प्रयाप्त होती है।

मैं खुद वर्षों से जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग करता आ रहा हूं और आज तक ना इसकी आदत पडी है और ना ही किसी तरह का विपरीत असर महसूस हुआ है। तो जब कभी भी पाचन संबंधी कोइ परेशानी महसूस हो तो बेझिझक इसबगोल की भूसी का इस्तेमाल कर देखें, फायदा ही होगा। 

5 टिप्‍पणियां:

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

बढिया सलाह, इस्तेमाल करके देखो फ़िर विश्वास करो :)

Archana ने कहा…

दादी का नुस्खा ...आजमाया हुआ है ,सौ आने सही...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच कहा, पेट ही सब बीमारियों का मूल है...

P.N. Subramanian ने कहा…

हमने भी आजमाया है. बिलकुल सही कह रहे हैं.

gyanprakash singh ने कहा…

आप की बात सही है आपका बहुत बहुत धन्यवाद