बुधवार, 15 दिसंबर 2010

भारत में ऐसा भी

गांव - अंजनी, जिला - मैनपुरी, राज्य - उत्तर प्रदेश।
हनुमानजी की माता अंजनी के नाम पर बसे इस गांव में दूध बेचना पाप समझा जाता है। आज जबकी देश में पानी भी खरीद कर पीना पडता है, इस दो हजार भैंसों वाले गांव में यदि कोई चोरी-छिपे दूध बेचता पाया जाता है तो उसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पडती है नहीं तो गांव छोड कर जाना पडता है। हजारों लीटर दूध का उत्पादन करने वाला यह गांव सार्वजनिक उत्सवों या कार्यक्रमों में मुफ़्त दूध दे उस जमाने की याद ताजा करता रहता है, जब कहा जाता था कि इस देश में दूध की नदियां बहा करती थीं। यहां की आबादी मेँ 99 प्रतिशत यदुवंशियों का है जो दूध बेचने को बेटा बेचने जैसा जघन्य काम मानते हैं। यह गांव आर्थिक रूप से काफी संपन्न है।
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नाम - जब्बार हुसैन , उम्र - 66 साल, निवास - फ़तहपुर बिंदकी।
लगन हो तो हुसैन साहब की तरह। 42 बार हाईस्कूल की परीक्षा में फ़ेल हो जाने के बावजूद इन्होंने हिम्मत नहीं हारी है और एक बार फिर ये पूरे जोशोखरोश के साथ परीक्षा की तैयारियों में जुटे हुए हैं। उनकी जिद है कि वह हाईस्कूल की परीक्षा जरूर पास करेंगे वह भी बिना गलत तरीकों को अपनाये। इस जनून के चलते उनकी बीवी ने उनसे तलाक ले लिया है पर हुसैन साहब अपनी धुन पर कायम हैं। इसके चलते उन्होंने जूतों की दुकान की, ट्युशन लगाई, कडी मेहनत की। उनके हौसले बुलंद हैं, वह एक-न-एक दिन अपनी मंजिल जरूर पा लेंगे। आमीन ।

11 टिप्‍पणियां:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

गगन शर्मा जी, सब से पहले तो आप का बहुत बहुत आभार सभी मैनपुरी वासीयों की ओर से कि आप ने हमारे यहाँ की खबर को अपने ब्लॉग में स्थान दे कर सम्मानित किया ! एक मैनपुरी वासी होने ही हेसियत से यह मेरे लिए भी एक सम्मान की बात है ! बहुत बहुत धन्यवाद !

हमारी ओर से भी जब्बार हुसैन साहब को हार्दिक शुभकामनाएं !

राज भाटिय़ा ने कहा…

मैन पुरी की खबर हमारे लिये नयी हे, सब मैन पुरी वासियो को मेरा धन्यवाद, ओर हुसैन साहब को पास करवा दो जी, हमारी शुभकामनायें
आप का धन्यवाद इस जानकारी के लिये

वन्दना महतो ! ने कहा…

भारत में एक कोना अब भी ऐसा है यह जानकर बेहद खुशी हुई.

PST ने कहा…

वाह, सचमुच आपका ब्लॉग कुछ अलग सा है..
बुराई ढूंढती दुनिया में, आपका यह सकारात्मक प्रयास, कुछ अलग सा लगा.. बधाई.
:
प्रियंक ठाकुर
www.meri-rachna.blogspot.com

नीरज जाट जी ने कहा…

जब्बार के बारे में पहले क्यों नहीं बताया?
जा जब्बार, मौज कर। इस बार अगर तू पेपर देगा तो पास हुआ पडा है। जाट का आशीर्वाद साथ है तेरे।

वन्दना ने कहा…

दोनो ही गज़ब के जज़्बे हैं।

Tarkeshwar Giri ने कहा…

Mainpuri ke bare jankar khushi hui, lekin jabbar saheb ke bare main pata tha.

Ye jabbar saheb bhi ajeeb admi hai, apne aapko mandbuddhi manne main kya harj hai.


Baki jab JAT ne ashirvad de hi diya hai to dekhte hain

Tarkeshwar Giri ने कहा…

Mainpuri ke bare jankar khushi hui, lekin jabbar saheb ke bare main pata tha.

Ye jabbar saheb bhi ajeeb admi hai, apne aapko mandbuddhi manne main kya harj hai.


Baki jab JAT ne ashirvad de hi diya hai to dekhte hain

Rahul Singh ने कहा…

दोनों कहानी कुछ नहीं बहुत अलग सी हैं.

वन्दना ने कहा…

इस बार के चर्चा मंच पर आपके लिये कुछ विशेष
आकर्षण है तो एक बार आइये जरूर और देखिये
क्या आपको ये आकर्षण बांध पाया ……………
आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (20/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.uchcharan.com

खबरों की दुनियाँ ने कहा…

इस देश का मान कहीं तो कोई बचा कर रखा है ,जानकर अच्छा लगा । अच्छी पोस्ट , शुभकामनाएं । पढ़िए "खबरों की दुनियाँ"