शुक्रवार, 5 मार्च 2010

कामदेव से कोई भी नहीं जीत सकता

एक गांव में एक पंडितजी अपनी पत्नि और बेटी के साथ रहते थे। आसपास के गांवों में पूजा-पाठ तथा कथा वाचन कर किसी तरह अपने इस छोटे से परिवार का निर्वाह करते थे। जब भी कभी वह अपनी कथा समाप्त करते तो अंत में यह जरूर कहते थे कि कामदेव बहुत शक्तिशाली हैं उनसे कोई भी नहीं जीत सकता, फिर भी इंसान को संयमित होना चाहिए।

एक दिन जब वह कथा समाप्त कर प्रवचन देकर हटे तो वहीं से गुजरते एक साधू ने, जो अपने आप को बड़ा तपस्वी समझता था, उन्हें चुन्नौती दी कि जो कहते हो उसे सिद्ध करो नहीं तो कथा कहना बंद कर दो। पंडितजी सीधे-साधे इंसान थे वे सुनी-सुनाई कथाएं बांचा करते थे। अब उनकी प्रतिष्ठा दांव पर थी। वे चुप-चाप उदास हो घर जा कर लेट रहे। उनकी कन्या ने उनकी यह हालत देख कारण पूछा तो पंडितजी ने सारी बात बता दी। सारी बात सुन वह बोली आप चिंता ना करें, मैं आपकी बात सिद्ध कर दिखाउंगी।

दुसरे दिन शाम को उसने स्वादिष्ट भोजन बनाया और खूब सज-धज कर साधू के ठिकाने की ओर भोजन की थाली ले चल पड़ी। दैवयोग से उसी समय बुंदाबांदी भी शुरु हो गयी। उसने साधू के पास जा कर कहा, मैने आपकी बहुत ख्याति सुन रखी है। मुझे आप दिक्षा दीजिए। मैं आपकी शरण में हूं और आप के लिए प्रसाद लाई हूं। कृपया ग्रहण करें।
स्वादिष्ट भोजन, सुंदर कन्या, सुहानी शाम, साधू महाराज का मन ड़ोल उठा। वह कुछ आगे बढते कि कन्या ने कहा कि मुझे ड़र लग रहा है कि कोई आ ना जाए। कृपया बाहर देख लें कोई है तो नहीं। साधू जैसे ही कोठरी से बाहर निकला, कन्या ने दरवाजा बंद कर लिया। यह देख पहले तो साधू ने दरवाजा खोलने का अनुरोध किया फिर धमकाने लगा। पर जब इस पर भी दरवाजा नहीं खुला तो वह कुटिया की छत पर चढ गया और उपर सुराख करने लगा। एक छोटा सा छेद होते ही वह अंदर आने की कोशिश में उसी में फंस कर रह गया। उसे उसी अवस्था में छोड़ कन्या दौड़ते हुए गयी और अपने पिता और गांव वालों को बोली कि अब जा कर साधू से पूछिए कि कामदेव में कितनी ताकत होती है? सबने वैसा ही किया। अपने सामने सब लोगों को देख साधु बुरी तरह शर्मिंदा हुआ और बोला मुझे क्षमा करें। मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी। मैं हार मानता हूं। कामदेव बहुत शक्तिशाली हैं, उनसे कोई भी नहीं जीत सकता।

11 टिप्‍पणियां:

Vivek Rastogi ने कहा…

वाकई बिल्कुल सत्य, अगर मन पर काबू नहीं है तो कुछ नहीं हो सकता।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

सत्य वचन .

Amitraghat ने कहा…

"शानदार कहानी.."
amitraghat.blogspot.com

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 06.03.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

मजा आ गया। आज कल तो बहुत सबूत हैं इस कथन के। इन दिनों टीवी देख लीजिए। कामदेव और साधु छाए हुए हैं।

jayanti jain ने कहा…

One cannot fight with his biology

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

रोचक ! सबको जीतता है यह अनंग ! सच है ।
आभार ।

जी.के. अवधिया ने कहा…

सुन्दर बोधकथा!

राज भाटिय़ा ने कहा…

बिलकुल सच कहा आप ने. धन्यवाद

वन्दना ने कहा…

sach kaha aapne.

Anil Pusadkar ने कहा…

sach kaha sharma ji.

विशिष्ट पोस्ट

कोई तो कारण होगा, धर्म स्थलों में प्रवेश के प्रतिबंध का !!

अभी कुछ दिनों पहले कुछ तथाकथित आधुनिक महिलाओं ने सोशल मिडिया पर गर्व से यह  स्वीकारा था कि माह के उन  कुछ ख़ास दिनों में भी वे मंदिर जात...