बुधवार, 17 सितंबर 2008

बहुत से लोग जानते होंगे

एक ऐसा झंडा, जिसे एक बार लगने पर वर्षों ना चढ़ाया गया और ना उतारा गया, ना उसे आधा फ़हराया गया और नाही कभी सलामी दी गयी, यह था चाँद पर लगा अमेरिका का झंडा। जहां 12 अंतरिक्ष यात्रियों ने 170घंटे, करीब 100कीमी घूमते हुए बिताए। वे वहां से 400केजी मिट्टी तथा करीब 30000 फोटोग्राफ ले कर आए। 11 दिसम्बर 1972 का अपोलो 17 का अभियान, चंद्रमा पर अंतिम मानव अभियान था। जिसमे हैरिसन एच श्मिट ने चंन्द्रतल पर करीब 34किमी तक चंन्द्र बग्घी चला कर अपनी खोज पूरी की थी। वे वहां एक संदेश भी छोड कर आये थे जिसमें कहा गया था कि "दिसम्बर 1972 में धरतीवासियों द्वारा चंद्र अभियान पूरा किया गया और हमारा शांति संदेश चारों ओर फैले।"
चाँद पर कहे गये पहले शब्द तो पूरी दुनिया में मशहूर हैं पर वहां कहे गये अंतिम शब्द थे, कमांडर इयुगेन सरमन के - "अमेरिका का यह अभियान मानव जाति का भविष्य निर्धारित करेगा"।

मंगलवार, 16 सितंबर 2008

दिल, इसे कमजोर ना समझें

हमारे शरीर की सबसे मजबूत मांसपेशीयां दिल की होती हैं। माँ के पेट में 18वें दिन से जो यह काम करना शुरु करता है तो जीवन भर धडकता रहता है। सौ साल की उम्र पाए इंसान में यह करीब पांच अरब बार धडक चुका होता है। यह एक मिनट में 72 बार धडकता है और एक साल में करीब तीन करोड़ सत्तर लाख बार और साठ साल की औसत आयु में करीब 220 करोड़ बार धडक चुका होता है। अब तक यह 1800 टन खून 62000 मील लंबी रक्तनलिकायों में ढ़केलता है, जिन्हें अगर जोडा जाए तो सारी दुनिया का ढ़ाई बार चक्कर लग जाए। हमारे आराम करते समय भी यह प्रति मिनट 6 लीटर खून पंप करता है यानी 6 से 10 टन रोज। पूरे जीवन काल में यह ड़ेढ़ से अढ़ाई लाख टन खून पंप कर चुका होता है। ऐसा नहीं है कि यह आराम नहीं करता। दिल की धड़कन '49सेकंड तक रहती है फिर '31 सेकंड का आराम देकर दूसरी धड़कन पैदा होती है। यह "औरिकल्स" के संकुचन से आरम्भ होती है, जबकी इस बीच "वैंट्रिकल्स" आराम करते हैं। "औरिकल्स" को संकुचन में '11 से '14सेकंड का समय लगता है फिर वे '66सेकंड तक आराम करते हैं। यानि 24 घंटे में साढ़े तीन से चार घंटे काम और 20 घंटे आराम। वहीं "वैंटिकल्स" को संकुचन में '27 से '35सेकंड लगते हैं जिसके बाद वह '45 से '53 सेकंड तक आराम करते हैं। यानि 24 घंटे में साढ़े आठ से दस घंटे काम और साढ़े तेरह से 15 घंटे आराम।

बच्चे के जन्म के समय दिल एक मिनट में 140 बार धडकता है। उम्र के साथ-साथ यह गति कम होती चली जाती है जो व्यस्क होते-होते एक मिनट में 72 बार रह जाती है। हां श्रम करते समय यह अढ़ाई गुना बढ़ सकती है। हमारे शरीर में दिल खून का एक दौरा 23 सेकंड में पूरा करवा देता है। यानि एक दिन में करीब 3700 चक्कर लगवा देता है।

है ना आश्चर्यजनक प्रभू की देन ? यदि हम इसके साथ छेडखानी ना करें तो यह हमारा साथ सौ साल से भी ज्यादा दिनों तक देती रह सकती है। क्या कोई मानव निर्मित मशीन इसकी बराबरी कर सकती है ?

सोमवार, 15 सितंबर 2008

दस साल बाद की दुनिया

वर्तमान समय बदलाव का समय है, हर पांच दस सालों में नयी-नयी इजादें सामने आती चली जा रही हैं। आने वाले दस सालों में भी हमारी दुनिया की तस्वीर में कुछ नये बदलाव आने वाले हैं। जिनमें प्रमुख हैं --

1:- विज्ञापन आकाश में छा जाएंगे। जी हां आकाश में लेज़र के जरिए विज्ञापन दिखाने की तकनीक पर बाकायदा काम चल रहा है।
2:- कैंसर और एड्स का निदान संभव हो जाएगा।
3:- विमानों का रूप उडनतश्तरी की तरह हो जाएगा। इसके उपर भारतीय मूल के सुब्रत राय शोध कर रहे हैं। उन्होंने इस विमान को "वीव" नाम दिया है।
4:- आने वाले समय में कारें हाइड्रोजन गैस से चलेंगी। हाइड्रोजन इंजन काम करेंगे प्रोटोन एक्सचेंज में बने फ़्यूल सेल से। जमाना होगा छोटी कारों का। नयी तकनीक जीवन को सुविधाजनक और सुरक्षित बना देगी।
5:- जोखिम के काम रोबोट करने लग जाएंगे। खान, निर्माण, बिजली, नाभिकीय संयंत्रों, हथियारों के परीक्षण, सेना, ट्रैफ़िक पुलिस जैसे स्थानों में रोबोट्स छा जाएंगे। अफसोस की बात यह हो जाएगी कि इन पर किसी नेता या उनके चमचों की धौंस नहीं चलेगी। आपको यह जान कर हैरानी के साथ-साथ खुशी भी होगी कि बहुत सी भारतीय कंपनियां घरेलू रोबोट के विकास में जुटी हुई हैं।
6:- प्रदूषण रहित सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होने लगेगा।
7:- बुढ़ापे को रोकना तो नहीं पर जवानी को देर तक कायम रखना संभव हो जाएगा। शरीर पर बढ़ती उम्र के असर को काफी हद तक कम करने में सफ़लता मिल जाएगी।
8:- हो सकता है कि किसी अंजान सभ्यता के रेडिओ संदेश पाने में हम सफ़ल रहें। यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी ने तीन ऐसे सौरमंडल खोज निकाले हैं, जिनमें दर्जनों विशाल ग्रह मौजूद हैं। इनमें से 45 प्रकाश वर्ष दूर तो एक सितारा ऐसा है, जिसकी पृथ्वी जैसे तीन ग्रह परिक्रमा कर रहे हैं। पृथ्वी जैसा एक ग्रह तो महज 15 प्रकाश वर्ष दूर मिला है।
9:- कंप्युटर और भी शक्तीशाली हो जाएंगे। ऊर्जा की खपत काफी घट जाएगी। यह संभव हो पाएगा गैलियम नाईट्राइड से जो सिलिकन चिप का स्थान ले लेगा।

पर अच्छाइयों के साथ-साथ हमें कुछ बुराईयों का भी सामना करना पडेगा जैसे, पानी की कमी का सामना करना पड सकता है। आक्सीजन खरीदनी पड सकती है। कुछ नयी बिमारियां सामने आ सकती हैं। संतानोत्पति की क्षमता घटने का डर है। सार्स और बर्ड फ्लू के अलावा चेचक,प्लेग, मलेरिया, और हैजा जैसी पुरानी बिमारियां नये रूप में धावा बोल सकती हैं। रोबोट के आने से घरेलू नौकरों की वजह से होने वाले अपराध तो कम हो जायेंगे पर किसी और जोखिम के बारे में तो अभी सिर्फ़ अंदाजा ही लगाया जा सकता है। फिर भी हमें यही आशा रखनी है कि इंसान सारी मुसीबतों से पार पाने का रास्ता निकाल ही लेगा।

तथ्य व कर्म जो खबर नहीं बनना चाहते

गांव - अंजनी, जिला - मैनपुरी, राज्य - उत्तर प्रदेश।
हनुमानजी की माता अंजनी के नाम पर बसे इस गांव में दूध बेचना पाप समझा जाता है। आज जबकी देश में पानी भी खरीद कर पीना पडता है, इस दो हजार भैंसों वाले गांव में यदि कोई चोरी-छिपे दूध बेचता पाया जाता है तो उसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पडती है नहीं तो गांव छोड कर जाना पडता है। हजारों लीटर दूध का उत्पादन करने वाला यह गांव सार्वजनिक उत्सवों या कार्यक्रमों में मुफ़्त दूध दे उस जमाने की याद ताजा करता रहता है, जब कहा जाता था कि इस देश में दूध की नदियां बहा करती थीं। यहां की आबादी मेँ 99 प्रतिशत यदुवंशियों का है जो दूध बेचने को बेटा बेचने जैसा जघन्य काम मानते हैं। यह गांव आर्थिक रूप से काफी संपन्न है।
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नाम - जब्बार हुसैन , उम्र - 66 साल, निवास - फ़तहपुर बिंदकी।
लगन हो तो हुसैन साहब की तरह। 42 बार हाईस्कूल की परीक्षा में फ़ेल हो जाने के बावजूद इन्होंने हिम्मत नहीं हारी है और एक बार फिर ये पूरे जोशोखरोश के साथ परीक्षा की तैयारियों में जुटे हुए हैं। उनकी जिद है कि वह हाईस्कूल की परीक्षा जरूर पास करेंगे वह भी बिना गलत तरीकों को अपनाये। इस जनून के चलते उनकी बीवी ने उनसे तलाक ले लिया है पर हुसैन साहब अपनी धुन पर कायम हैं। इसके चलते उन्होंने जूतों की दुकान की, ट्युशन लगाई, कडी मेहनत की। उनके हौसले बुलंद हैं, वह एक-न-एक दिन अपनी मंजिल जरूर पा लेंगे। आमीन ।
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सही समय पर इलाज ना हो पाने के कारण कमला अमरनानी के पति तथा पुत्र की असमय मौत हो गयी थी। उस भीषण दुख से उबरते हुए उन्होंने ऐसे लोगों की मदद करने का संकल्प लिया जो किसी भी कारणवश अपनों की जिंदगी बचा पाने में असमर्थ होते हैं। उल्हास नगर में गरीबों के बीच माता के नाम से लोकप्रिय कमलाजी से शहर के रिश्वतखोर डाक्टर भी घबड़ाते हैं। यदी उन्हें किसी भी डाक्टर के रिश्वत लेने या अपने काम के प्रति लापरवाह होने का पता चलता है तो फिर उस डाक्टर की खैर नहीं रहती। 44 साल पहले उन्होंने डाक्टरों की हड़ताल के कारण अपने पति और पुत्र को खोया था और अब वे नहीं चाहती कि उनकी तरह किसी और को उस विभीषीका का सामना करना पड़े। आज 96 साल की उम्र में भी वे पूरी तरह सक्रिय हैं।
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अमेरिकी सेना में तैनात सार्जेंन्ट जानी कैंपेंन इराक गया तो था लोगों की मौत का पैगाम लेकर, पर इंसान के मन को कौन जान सका है। अपने इराक अभियान के दौरान जानी की मुलाकात वहां के राहत कैंप में एक आंख की बिमारी से ग्रस्त बच्ची, जाहिरा, से हुई, जिसका इलाज हो सकता था। जानी ने अपने गृह नगर में अपने दोस्तों और नगरवासियों से अपील कर एक बडी राशी एकत्र कर उसे अस्पताल में भर्ती करवाया। आप्रेशन सफ़ल रहा। आज जाहिरा दुनिया देख सकती है। उसकी दादी कहती है कि युद्ध चाहे तबाही लाया हो, पर मेरी पोती के लिये उसी फौज का सिपाही भगवान बन कर आया।
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बैंकाक में तीन पहिया स्कूटर को "टुक-टुक" कहते हैं। इसी पर सवार हो कर जो हवस्टर और एन्टोनियो बोलिंगब्रोक केंट ने बैंकाक से ब्रिटेन तक 12 हजार मील की यात्रा सिर्फ़ इस लिए की जिससे मानसिक तौर पर विकलांगों की सहायता की जा सके। इसमे वे सफ़ल भी रहीं और उन्होंने 50 हजार पौंड जुटा अपना मिशन पूरा किया।

शनिवार, 6 सितंबर 2008

टेंशन से शर्तिया राहत पायें, इन्हें आजमायें

शिक्षक दिवस पर दिल्ली में बच्चों को हवाई यात्रा का आंनद दिलाने के लिए सरकार ने हेलिकाप्टर मुहैया करवाया। एक बार में दो बच्चे और एक शिक्षक को घूमाने का इंतजाम था। अभी कुछ ही ट्रिप लगी थीं कि एक स्थानीय नेताजी भी पहुंच गये और उन्होंने भी घूमने की इच्छा जाहिर की। मजबूरीवश एक बच्चे को हटा उनका इंतजाम किया गया। पर इस बार हेलिकाप्टर के उडते ही उसमे खराबी आ गयी। पायलट ने बताया कि सिर्फ़ तीन ही पैराशूट हैं, चूंकी सरकार को मेरी बहुत जरूरत है सो मैं एक ले कर कूदता हूं और वह कूद गया। इधर नेताजी बोले कि देश को मेरी बहुत जरूरत है सो एक मुझे चाहिए यह कह कर उन्होंने आव देखा ना ताव वे भी यह जा वह जा। ऐसी मुसीबत में भी शिक्षक ने अपनी मर्यादा कायम रक्खी और बच्चे से कहा, बेटा, मैंने तो अपनी जिंदगी जी ली। तुम देश का भविष्य हो तुम बाकी बचा पैराशूट ले कर कूद जाओ। बच्चे ने जवाब दिया नहीं सर हम दोनों ही कूदेंगें। शिक्षक बोले कैसे। तो छात्र ने बताया कि नेताजी मेरा स्कूल बैग ले कर कूद गये हैं।
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बाढ़ग्रस्त इलाके में तैनात कर्मचारियों से वायूसेना ने पूछा कि लोगों को निकालने के लिये कितनी ट्रिप लगेंगी। जवाब दिया गया कि तीस-एक ट्रिप में गांव खाली हो जायेगा। बचाव अभियान शुरु हो गया। एक-दो-तीन-पांच-दस-बीस, पचास फेरे लगने के बाद भी लोग नज़र आते रहे, तो सेना ने पुछा कि आपने तीस फेरों की बात कही थी यहां तो पचास फेरों के बाद भी लोग बचे हुए हैं ऐसा कैसे।नीचे से आवाज आयी कि सर, गांव वाले पहली बार हेलिकप्टर में बैठे हैं तो जैसे ही उन्हें बचाव क्षेत्र में छोड़ कर आते हैं, वे फिर तैर कर वापस यहीं पहुंच जाते हैं।
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नमस्ते सर, मैं आपका पियानो ठीक करने आया हूं। पर मैने तो आप को नहीं बुलवाया। नहीं सर, आपके पडोसियों ने मुझे बुलवाया है।
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अरे भाई, ये सेव कैसे दिये। सर साठ रुपये किलो। पर वह तुम्हारा सामने वाला तो पचास में दे रहा है। तो सर उसीसे ले लिजीए। ले तो लेता पर उसके पास खत्म हो गये हैं। सर जब मेरे पास खत्म हो जाते हैं तो मैं भी पचास में देता हूं ।
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बेटे की नौकरी चेन्नाई मे लग गयी। अच्छी पगार थी, सो उसने पांच हजार की एक साडी माँ के लिये ले ली। पर वह माँ का स्वभाव जानता था, सो उसने साडी के साथ एक पत्र भी भेज दिया कि पहली पगार से यह साडी भेज रहा हूं, दिखने में मंहगी है पर सिर्फ़ दो हजार की है, कैसी लगी बतलाना। अगले हफ़्ते ही माँ का फोन आ गया, बेटा खुश रहो। साडी बहुत ही अच्छी थी। मैने उसे तीन हजार में बेच दिया है, तुरंत वैसी दस साडियां और भिजवा दे, अच्छी मांग है।
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बसंती बीरू के साथ शहर चली गयी तो मासी और धन्नो के लिए रामपुर में तांगा चलाने का जिम्मा संता ने ले लिया था। बरसात के दिन थे, संता ठाकुर की पेंशन लाने वाले को ले रामपुर जा रहा था कि अचानक तांगे का चक्का कीचड़ में फंस गया। संता ने काफ़ी कोशिश की पर सफ़ल ना हो सका। अंत में वह नीचे उतरा और धन्नो के पास जा बोलने लगा कि चल मेरे शेरू, शाब्बाश मेरे हीरे, जोर लगा मेरे कालू, चल मेरी धन्नो। उसके इतना कहते ही धन्नो ने जोर लगाया और तांगे का चक्का बाहर आ गया। यह देख सुन यात्री ने पूछा कि तुमने चार-चार घोड़ों के नाम क्युं लिए जब कि यहां सिर्फ़ धन्नो ही है तो संता बोला, जनाब इसे अब दिखाई नहीं पड़ता है। इसे यदि पता चल जाए कि ये अकेली तांगा खींच रही है तो एक कदम भी आगे नहीं बढ़ती है सो--------
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एक बार धन्नो बिमार पड़ गयी तो संता वैद्यजी के पास उसकी दवाई लेने गया। वैद्यजी ने उसे एक पुडिया दी और कहा कि इसे एक नली में रख देना और नली का एक सिरा धन्नो के मुंह मे रख जोर से फूंक मार देना, दवा अंदर चली जायेगी। दूसरे दिन संता फिर वैद्यजी के पास आया, उसका सारा शरीर लाल हो गया था, मुंह सूजा हुआ था। उसकी यह हालत देख वैद्यजी ने पूछा, अरे यह क्या हो गया तुम्हे? संता बोला, धन्नो ने पहले ही फूंक मार दी।
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संता कभी-कभी धन्नो को किराये पर भी देता था। एक बार एक ऐसा आदमी उससे घोडी लेने आया जिससे संता की पटती नहीं थी। संता ने अभी इंकार किया ही था कि अंदर से हिनहिनाने की आवाज आई। ग्राहक बोला कि घोडी अंदर है फ़िर भी तुम झूठ बोल रहे हो। संता बोला, कि कैसे इंसान हो आदमी की बात का विश्वास नहीं करते और जानवर की बात का भरोसा करते हो।
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एक पागल एक बिल्ली को रगड़-रगड़ कर नहला रहा था। एक भले आदमी ने उसे ऐसे करते देखा तो उससे बोला कि ऐसे तो बिल्ली मर जायेगी। पागल बोला नहाने से कोई नहीं मरता है। कुछ देर बाद वही आदमी उधर से फ़िर निकला तो कपड़े सुखाने की तार पर बिल्ली को लटकता देख पागल से बोला, देखा मैंने कहा था ना कि बिल्ली मर जायेगी। यह सुन पागल ने जवाब दिया कि वह नहलाने से थोड़ी ही मरी है, वह तो निचोड़ने से मरी है।
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एक सज्जन अपनी पत्नि का दाह-संस्कार कर लौट रहे थे। संगी साथी साथ-साथ चलते हुए उन्हें दिलासा देते जा रहे थे। इतने में मौसम बदलना शुरू हो गया। आंधी-पानी जैसा माहौल बन गया, बिजली चमकने लगी, बादल गर्जने लगे। सज्जन धीरे से बुदबुदाए - लगता है उपर पहुंच गयी। *******************************************************
पोता दादाजी से जिद कर रहा था कि शहर में सर्कस आया हुआ है हमें ले चलिए। दादाजी उसे समझा रहे थे कि बेटा सभी सर्कस एक जैसे ही होते हैं। वही जोकर, वही भालू, वही उछलते-कूदते लड़के। पर पोता मान ही नहीं रहा था। बोला, नहीं दादाजी मेरा दोस्त बता रहा था, इस वाले में लड़कियां बिकनी पहन कर घोड़ों की पीठ पर खड़े होकर डांस करती हैं। दादाजी की आंखों में चमक आ गयी। बोले, अब इतनी जिद करते हो तो चलो। मैंने भी एक अर्से से घोड़े नहीं देखे हैं।
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भाटिया जी ने अपने स्कूल की छत गिरने की बात तो बताई, पर उसके बाद वाली बात शायद भूल गये। हुआ क्या कि छत के कारण स्कूल की छुट्टी हो गयी तो बहुत से बच्चे पास लगी सर्कस देखने चले गये। जिनमें राज जी और अपने ताऊ जी के साथ संता तथा बंता भी थे। यह आज तक राज की बात ही रही आज भी घर पर पता ना चले सो मैने इन दोनों का नाम ना ले सिर्फ संता बंता का ही नाम लिया है।
सर्कस शुरु हुआ। तरह-तरह के खेल देख सभी खुश हो रहे थे। तभी घोषणा हुई कि अब सबसे खतरनाक खेल होने जा रहा है। खेल के बीच में कोई ताली ना बजाये।
खेल शुरु हुआ। एक बड़े से सीधे खड़े चक्र पर एक लड़की को बांध कर चक्के को घुमा दिया गया। इधर एक उस्ताद टाईप के आदमी ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध कर लड़की पर धारदार चाकू फेंकने शुरु किये। चाकू जा-जा कर लड़की को बिना छुए लकड़ी के चक्के में धंसते गये। यहां तक की बीस एक चाकूओं से लड़की पूरी तरह घिर गयी पर उसे खरोंच तक नहीं आयी। खेल खत्म हुआ, सबने खड़े हो कर तालियां बजा कर कलाकारों की प्रशंसा की।
पर संता और बंता चुप चाप खड़े थे। उनकी समझ में यह नहीं आ रहा था कि जब एक भी चाकू निशाने पर नहीं लगा तो तालियां किस बात की भाई।
*विघ्नहर्ता आप सब को स्वस्थ एवं प्रसन्न रखें*

मंगलवार, 2 सितंबर 2008

लक्ष्मीजी; अपने कमलासन को बचाएं!

अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को चमकाने के लिए मां सं वि मंत्री श्री अर्जुन सिंह ने तरह-तरह के पांसे फेंके, पर हर दांव उल्टा ही पडा। कभी दस जनपथ से झिडकियां मिलीं कभी कोर्ट ने डांट पिलाई। परन्तु अपने ठाकुर साहब कर्मठ हैं लगे हुए हैं कुछ नया कर हाई कमान की नज़रों में जगह बना अपनी अगली पीढ़ी का स्थान सुरक्षित करने के लिए।
अब उन्होंने अपने सबसे बड़े दुश्मन के खिलाफ़ कदम उठाया है। भाजपा को परिदृश्य से हटाने का सपना देखने वाले सिंह साहब ने एक नया फ़रमान जारी कर सभी 980 केंद्रीय विद्यालयों को अपना स्कूल लोगो "कमल का फूल" बदलने का आदेश दिया है, जो स्वाभाविक तौर से भाजपा की याद दिलाता रहता है। विडंबना देखिए कि यह चिन्ह भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने तैयार करवाया था। अब उन्हें कहां पता था कि प्रकृति की इस अनमोल भेंट को सांप्रदायिकता का प्रतीक मान लिया जायेगा।
अब कौन किसे समझाए कि कमल को बदलने से या भगवा रंग हटाने से यदी बदलाव आ जाता तो इन जेलों, इन कोर्टों, पुलिस आदि की क्या जरूरत रह जाती।
अब तो यही ड़र है कि सदियों से कमल के आसन पर विराजमान लक्ष्मीजी को भी कहीं अपने अपने आसन को बदलने का नोटिस ना मिल जाए।

शुक्रवार, 29 अगस्त 2008

शम्मी कपूर, भारत के पहले इंटरनेट गुरु

शम्मी कपूर! जी हां, शम्मी कपूर। बहुत से लोगों को यह जान कर हैरत होगी कि शम्मीजी 1988 से कम्प्यूटर और इंटरनेट का लगातार इस्तेमाल करते आ रहे हैं। इस तरह भारत में इस टेक्नोलोजी का सबसे पहले उपयोग करने वाले इने-गिने लोगों में उनका स्थान है। आज यह 80 वर्षीय इंसान फ़िल्म जगत का सबसे अधिक पारंगत कम्प्यूटर यूजर है।
जब पहली बार वे कम्प्यूटर और प्रिंटर घर लाए थे तो दिन भर उस पर अपने प्रयोग करते रहते थे। एक बार उनके दामाद केतन देसाई के साथ अनिल अंबानी उनके घर आए तो सारा ताम-झाम देख कुछ समझ ना पाये और पूछ बैठे कि क्या शम्मी अंकल ने घर पर ही डेस्क-टाप पब्लिशिंग शुरू कर दी है। इतने बडे ओद्योगिक समूह रिलायंस के अनिल अंबानी द्वारा ऐसा सवाल यह दर्शाता है कि उस जमाने में पर्सनल कम्प्यूटर नाम की किसी चीज से लोग कितने अनभिज्ञ थे। इसीसे यह तथ्य भी पुख्ता होता है कि शम्मीजी भारत में कम्प्यूटर और इंटरनेट के घरेलू उपयोग को बढ़ावा देने वाले रहे हैं। इसीलिए उन्हें भारत का पहला इंटरनेट गुरू या साइबरमैन कह कर पुकारा जाता है। इसी शौक से उन्हें अपने पचास साल पुराने दोस्त, जो विभाजन के पश्चात पाकिस्तान चले गये थे, से संपर्क साधने का मौका मिला और आज दोनो दोस्तों की फिर खूब छनती है इंटरनेट पर।
इस तकनीक को धन्यवाद जिसने इस दोस्ती को फिर जिंदा कर दिया। यही तकनीक आज बहुत से ऐसे लोगों को दुबारा मिलाने की जिम्मेदार है जो किन्हीं कारणों से एक दुसरे से बिछुड गये हैं।

विशिष्ट पोस्ट

जिसने सबसे ज्यादा विभिन्न रोगग्रस्त पात्रों का किरदार निभाया

अनेकों बार  Autism, Dyslexia, Progeria, Paraplegia, Alzheimer, Amnesia, Schizophrenia जैसी अनेक  बीमारियों पर, जिनका नाम भी आम लोगों ने सुना...