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शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

हौसला और उत्साह हो तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता

फ़ुटबाल में तो वह माहिर था पर उसे क्रिकेट खेलना ज्यादा भाता था; कारण, फ़ुटबाल में क्लास से कुछ ही घंटों की मुक्ति मिलती थी, वहीं क्रिकेट में दिन भर की मोहलत तो मिलती ही थी साथ में अच्छा खेलने पर एक-दो दिनों के लिए मास्साब की डांट से भी छुटकारा मिल जाता था। यह रहस्योघाटन बड़े होने पर खुद उसने ही किया था  ! कौन है वह ? जो क्रिकेट पिच पर कभी भी रन आउट नहीं हुआ !अपनी फिटनेस के कारण कभी भी खेल से बाहर नहीं हुआ ! जिसके रनों और विकेटों का रेकार्ड तोड़ना अभी भी दूभर बना हुआ है...............! 
   
#हिन्दी_ब्लागिंग 
डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल चंडीगढ़ में पढ़ने वाला एक लड़का, जिसे स्कूल के नाम से ही बुखार चढ़ जाता था। उसका दिमाग सदा क्लास में न जाने और पढ़ाई से बचने के बहाने ढूंढा करता था। उस जमाने में सामान्यता हर अभिभावक यही चाहता था कि उसके बच्चे पढ़ाई में ही ध्यान दें जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके ! पर यहां लाख समझाने का भी कोई असर नहीं हो  रहा था। वैसे पढ़ाई में वह चाहे जैसा भी था, पर खेलों में सदा अव्वल रहने वाला वह किशोर स्कूल में फ़ुटबाल और क्रिकेट दोनों खेला करता था। फ़ुटबाल में तो वह माहिर था पर उसे क्रिकेट खेलना ज्यादा भाता था; कारण फ़ुटबाल में क्लास से कुछ घंटों की ही मुक्ति मिलती थी, वहीं क्रिकेट में दिन भर की मोहलत तो मिलती ही थी साथ में अच्छा खेलने पर एक-दो दिनों के लिए मास्साब की डांट से भी छुटकारा मिल जाता था। यह रहस्योघाटन बड़े होने पर खुद उसने किया।
   
अब जब यह पक्का हो गया कि क्रिकेट खेलने में ही ज्यादा भलाई है, तो उसने इस खेल में नियमित भाग लेना शुरू कर दिया। उसके खेल से उसकी उम्र को देखते हुए उसके सीनियर्स भी काफी प्रभावित थे। प्रोत्साहन मिलने पर उस युवक की प्रतिभा को पंख लग गए। उसने बॉलिंग और बैंटिंग दोनों में हाथ आजमाए और महारत हासिल कर ली। भाग्य की देवी मुस्कुराई और उसका चयन हरियाणा की टीम में हो गया। अपने पहले ही मैच में छह विकेट ले उसने अपनी टीम को पंजाब पर विजय दिलाई। यह तो शुरुआत थी, इसके बाद जम्मू-कश्मीर वाले मैच में आठ विकेट पैंतीस रन फिर बंगाल के विरुद्ध सात विकेट और बीस रन, फिर दिल्ली के खिलाफ 193 की नाबाद पारी ने उसे लोगों की नज़रों में ला खड़ा किया। अब उसका एकमात्र लक्ष्य देश के लिए खेलना था। जिसमें हौसला और उत्साह होता है उसका कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। सो उसने भी अपनी क़ाबलियत के दम पर 1978 में भारत की टेस्ट टीम में स्थान बना कर अपना पहला मैच पकिस्तान के साथ खेल ही लिया ! फिर उसके बाद कभी पीछे मुड कर नहीं देखा।  उसकी ख्याति देश की सीमा फलांग विदेशों में जा पहुंची।
  
हरियाणा तूफान के नाम से पहचाने जाने वाले इस क्रिकेटर को क्रिकेट पिच पर कभी भी रन आउट होते हुए नहीं देखा गया। अपनी फिटनेस पर इसका इतना ध्यान था कि सेहत की वजह से यह कभी भी खेल से बाहर नहीं हुआ। इसका पांच हजार रन और चार सौ से ऊपर विकेटों का रेकार्ड अभी तक कोई भी आलराउंडर छू तक नहीं पाया है। आज उसके नाम को दुनिया के क्रिकेट में उच्च एवं सम्मानीय दर्जा प्राप्त है। भारत के क्रिकेट के इतिहास में इस शख्स ने वह कारनामा कर दिखाया जिसको किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। 


क्या क्रिकेट टीम के कप्तान और कोच रहे, अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री, पद्मभूषण, विज्डन, आईसीसी क्रिकेट हॉल ऑफ फेम, भारतीय सेना का लेफ्टिनेंट कर्नल का पद फिर एनडीटीवी द्वारा भारत में 25 सबसे महान वैश्विक जीवित महापुरूष का खिताब पाने वाले इस इंसान का नाम बताना अभी भी जरुरी है ? यदि है; तो वे हैं कपिल देव रामलाल निखंज।  


संदर्भ, श्री रघुरामन, दैनिक भास्कर

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