pub-3648900737756323 कुछ अलग सा: चेले
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मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

व्यक्ति पूजा

मैं अमित जी के ब्लॉग को फॉलो नहीं करता, पर उस दिन मैं जिज्ञासावश उनके ''बिग-अड्डे'' पर गया तो वहां उस रचना को भी विचरते पाया ! असमंजस और गहरा गया ! पर तभी मेरी नजर उस रचना के प्रकाशित होने की तारीख पर पड़ी, जो मेरे ब्लॉग के दूसरे यानी अगले दिन की थी ! मन से बोझ सा उतर गया ! लौट कर अमित जी के उस प्रशंसक की टिपण्णी पर टिप्पणी की कि "महोदय वह रचना मेरी नहीं थी, मैंने इस बात को इंगित भी किया है, पर मेरे ब्लॉग पर छपने के बाद दूसरे दिन अमित जी ने उसे अवतरित किया है, तो किसने किस की............😕"   

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

व्यक्ति पूजा का जैसा हाल वर्तमान में है, वैसा शायद ही कभी रहा हो ! आज अधिकांश लोग किसी के भी नाम, दाम या व्यक्तित्व के मायाजाल में फंस कर उसके मुरीद बन जाते हैं ! उन्हें सामने वाले की मानसिकता, उसकी नैतिकता, उसके चरित्र से कोई मतलब नहीं होता, उनके लिए अपने आदर्श के मुख से निकली बात ही ब्रह्म-वाक्य होती है !  ये लोग उसके विरुद्ध कोई सच्ची बात भी सुनना भी गवारा नहीं करते ! इतना ही नहीं अपने अगड़े का प्रतिद्वंद्वी उन्हें दुश्मन सरीखा नजर आने लगता है। यह बात आज चहूं ओर नजर आ रही है !   

पराकाष्ठा 
"निज प्रशस्ति, केहि लाग न नीका !" इसीलिए ऐसे चाटुकारों की वजह से सामने वाला भी अपने को कुछ का कुछ समझ, एक अलग ही जगत में विचरने लगता है ! अपने चेले-चपाटियों के मनगढ़ंत, मिथ्या आख्यानों को ही सच मान बैठता है ! झूठ के कोहरे में सच उससे कोसों दूर हो जाता है ! उसे अपने  सिवा सब हेय  नजर आने लगते हैं ! हालांकी अंततोगत्वा यही उसके पतन का कारण भी बनता है ! 

परजीवी 

आज के प्रसंग से कुछ-कुछ मेल खाता हुआ अपने ब्लॉगिंग से संबंधित एक प्रसंग याद आ गया ! बहुत समय पहले मैंने एक मित्र द्वारा भेजी गई एक सुंदर रचना को अपने ब्लॉग पर भी डाल दिया था ! दूसरे ही दिन उस पर अमिताभ जी के एक प्रशंसक ने टिप्पणी कर आपत्ति जाहिर कर दी थी कि वह रचना अमित जी की है, उसे आपने कैसे ले लिया ?  मैं भी असमंजस में पड़ गया कि ऐसी गलती कैसे हो गई ! हालांकि लेखक का नाम ज्ञात ना होने की वजह से मैंने अंतर्जाल का आभार प्रगट किया भी था !

ब्लॉगिंग 

मैं अमित जी के ब्लॉग को फॉलो नहीं करता, पर उस दिन मैंने जिज्ञासावश उनके ''बिग-अड्डे'' पर गया तो वहां उस रचना को भी विचरते पाया, असमंजस और गहरा गया ! पर तभी मेरी नजर उस रचना के प्रकाशित होने की तारीख पर पड़ी, जो मेरे ब्लॉग के दूसरे यानी अगले दिन की थी ! मन से बोझ सा उतर गया ! लौट कर अमित जी के उस प्रशंसक की टिपण्णी पर टिप्पणी की कि महोदय वह रचना मेरी नहीं थी, मैंने इस बात को इंगित भी किया है, पर मेरे ब्लॉग पर छपने के बाद दूसरे दिन अमित जी ने उसे अवतरित किया है, तो किसने किस की  ली........?   

यहां जरा प्रसंगवश मुख्य विषय से भटकना हो गया है ! इसलिए बताता चलूं कि अमित जी का मैं भी प्रशंसक रहा हूँ ! उनकी विद्वता, उनकी हिंदी-अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अद्भुत पकड़, उनकी विनम्रता जैसी खासियतें उनमें तथा अन्य अभिनेताओं में फर्क दर्शाती हैं ! इस प्रसंग से उपरोक्त विषय का भी कोई खास संबंध नहीं है, उनको तो ऐसी बातों का आभास भी नहीं होगा ! पर उनके दीवाने फैन, मुरीद कुछ-कुछ ऊपर वालों जैसे ही हैं, जिन्हें लगता है कि बॉस ने जो लिख दिया, वहीं से लिखाई शुरू होती है 😇😀

@चित्रों के लिए अंतर्जाल का आभार 

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व्यक्ति पूजा

मैं अमित जी के ब्लॉग को फॉलो नहीं करता, पर उस दिन मैं जिज्ञासावश उनके ''बिग-अड्डे'' पर गया तो वहां उस रचना को भी विचरते पाया...