मंगलवार, 23 जून 2015

दाढ़ी बनाएं, मूड़े नहीं

अपने चेहरे पर सब को नाज होता है, इसे हर कोई दिलकश बनाए रखना चाहता है।  पचासों तरह के जतन किए जाते हैं इसे संवारने के वास्ते। पर कभी-कभी जाने-अनजाने इस पर ज्यादती भी हो जाती है खासकर दाढ़ी बनाते समय, जब लोग समयाभाव के कारण इसे बनाने की बजाए "मूड़ने " लगते है ! 

पिछले रविवार को योग शिविर से लौटते हुए ठाकुर जी के यहां रुक गया। वे क्षौर-कर्म निपटा रहे थे। उसी दौरान देखा कि उन्होंने तीन बार चेहरे को रेजर से 'खुरचा'। जब मुंह वगैरह धो कर बैठे तो मैंने पूछा तीन-तीन बार क्यों दाढ़ी बनाते हैं ? जब कि यह काम ज्यादा से ज्यादा दो बार में हो जाता है। ठाकुर जी बोले, नहीं तीसरी बार ही चेहरा पूर्णतया बालों से मुक्त हो पाता है।   

तभी ऐसा लगा कि ढाढी को लेकर भी काफी असमंजस में हैं लोग ! वैसे तो हर इंसान अपने चहरे को सदा दिलकश देखना चाहता है, उसके लिए पचासों यत्न भी करता है। पर इसी सार-संभाल में उस पर ज्यादती भी

करता रहता है। अब दाढ़ी की ही बात को लें, जिन्हें रखने का शौक है वे तो उसे सजा-संवार कर ही रखते हैं। जिन्हें सफाचट रहना अच्छा लगता है, उनमें से कई नाई का द्वार खटखटाते हैं पर अधिकांश घर पर खुद ही इसे मुसीबत समझ कर हटाते रहते हैं। जैसे ठाकुर साहब जो दाढ़ी बना नहीं रहे थे उसे मूड़ रहे थे। बिना यह सोचे कि इस तरह चेहरे की चमड़ी पर विपरीत असर पड़ता है। दाढ़ी बनाते समय हरदम हलके हाथ से रेजर चलाना चाहिए नाकि दबाते हुए। 

दाढ़ी बनाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि चेहरे के बाल अच्छी तरह गीले हों, यदि उन्हें कम से कम तीन-चार मिनट तक भीगा रहने दिया जाए तो वे काफी पानी सोख लेते हैं और ढीले पड़ जाते हैं जिससे उन्हें आसानी से काटा जा सकता है। ऐसे में तो किसी क्रीम या साबुन की भी जरुरत नहीं रहती। यदि क्रीम लगा कर शेव की जाती है तो जरूरी नहीं कि वह मंहगी ही हो। क्रीम वह अच्छी होती है जो एक लेप की तरह बालों पर परत बनाए जिससे बालों को ज्यादा से ज्यादा नमी मिले, चमड़ी स्नेहित हो सके। इसके लिए रेजर के इस्तेमाल के पहले क्रीम को चेहरे पर डेढ़-दो मिनट तक लगा रहने देना चाहिए। ज्यादा झाग बनाने वाली क्रीम या साबुन ठीक नहीं रहते। उनसे बालों को यथोचित नमी नहीं मिल पाती।  ध्येय है बालों की नर्माहट, बाकी सब बेकार ही है। बाल जितने नरम होंगे उतना ही ब्लेड का घर्षण कम होगा, उतना ही चमड़ी का छिलना कम होगा, उतनी ही ब्लेड या रेजर की उम्र बढ़ेगी। सही बात तो यह है कि मंहगी क्रीम या साबुन लेने से अच्छा है कि एक बढ़िया रेजर लिया जाए। कोई जरूरी नहीं कि वह दो या तीन ब्लेड वाला हो पर हो अच्छे स्तर का। कई बार हम कुछ भोथरे हो जाने पर भी उसका इस्तेमाल करते रहते हैं जोकि चेहरे की त्वचा के लिए काफी हानिकारक होता है। ऐसे ही ब्लेड से त्वचा में जलन या खराश होने लगती है। इसीलिए एक निश्चित अवधि के बाद उसे बदल देना चाहिए। दाढ़ी बनाते समय भी उसे गर्म पानी में, हो सके तो डेटॉल मिले पानी में डुबा कर साफ करते रहना चाहिए जिससे उसमें लगे बाल, साबुन का लेप इत्यादि साफ हो जाएं। 

सबसे बड़ी बात यह है कि हम चेहरे के बालों की उगने की दिशा के बारे में अनजान होते हैं। सब को लगता है कि बाल एक ही दिशा में उगे हुए हैं जबकि ये अलग-अलग चेहरे पर अलग-अलग ढंग से अलग-अलग दिशा में उगते हैं। इसको आसानी से परखा जा सकता है। इसलिए बेहतर है कि रेजर या ब्लेड को सीधे-उलटे न चलाया जाए। कभी भी चहरे को अंडे के छिलके की तरह चिकना करने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए इससे चमड़ी की परत को बहुत नुकसान पहुंचता है। बालों का उगना एक सतत क्रिया है दाढ़ी बनाते ही बालों का बढ़ना फिर शुरू हो जाता है तो फिर क्यों चमड़ी पर जुल्म ढाना ! 

"शेव" करते समय यदि हम कुछ बातों का ध्यान रखें तो यह हमारे ही चेहरे के लिए फायदेमंद होगा। जैसे शेव के पहले बाल अच्छी तरह भीगे हुए हों। क्रीम या साबुन की परत चहरे पर डेढ़-दो मिनट लगी रहे। रेजर हलके हाथ से चलाया जाए। जिससे वह सिर्फ बालों को हटाए नाकि त्वचा को खुरचे। कभी भी सूखी और ठंडी त्वचा पर रेजर ना चलाएं। शेव के दौरान बीच-बीच में उसे साफ़ भी करते रहें। किसी और का रेजर इस्तेमाल ना करें। क्रीम को समय-समय पर बदलते रहें जिससे अपनी त्वचा के अनुरूप इसका चुनाव हो सके। शेव करने के बाद चेहरे को गुनगुने पानी से साफ़ कर कोई लोशन लगा लें। लोशन की जगह पानी में डेटॉल जैसी किसी चीज की कुछ बूँदें भी वही काम करेंगी। फिर ठंडे पानी के छींटे मार चेहरा धो लें।                    

1 टिप्पणी:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, जीना सब को नहीं आता - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !