सोमवार, 21 अगस्त 2017

गैजेट्स पर निर्भरता हमें अपंग ना बना दे

सुबह की फ्लाइट के लिए रात दो बजे प्रवेश की हिदायत दी गयी थी। डेढ़ बजे रात 'कैब' का इंतजाम कर रवानगी करवा दी ।  उनके जाने के बाद शयन-शय्या पर पहुंचा ही था कि कुछ देर के लिए बिजली गायब हो गयी साथ ही कॉर्ड-लेस भी सेंस-लेस हो गया। बिजली आने पर कैब चालाक का फोन मिला कि आपका फोन नहीं लग रहा था इधर मेरे नेट बंद होने की वजह से मेरा जी.पी.एस. काम नहीं कर रहा है ! अब आप इंतजार करेंगे या गाडी छोड़ना चाहेंगे ?

आजकल "गैजेट्स" पर हमारी निर्भरता भविष्य में खतरनाक रूप ले सकती है। हम समझ नहीं पा रहे हैं पर धीरे-धीरे परवश होते चले जा रहे हैं। बहुत पहले "मैन्ड्रेक जादूगर कॉमिक्स" में एक कहानी थी जिसमें रोबॉट इंसान को अपने वश में कर गुलाम बना लेते हैं। मशीन इंसान पर पूरी तौर से हावी हो जाती है। इस पर शायद फिल्म भी बन चुकी है। प्राथमिक स्तर पर ऐसी कुछ घटनाओं की शुरुआत हो भी चुकी है। हालांकि नए गैजेट्स के अपार फायदे हैं पर इन्होंने ही कई बातों का भट्ठा भी बैठा दिया है। अबाल-वृद्ध सब उसके शिकंजे में कसते चले जा रहे हैं। याद कीजिए कुछ ही सालों पहले जब घर में स्थिर फोन हुआ करता था तो घर के प्रत्येक सदस्य को दस-पांच जरुरी नंबर तो याद रहते ही थे, आज कइयों को अपना नंबर ही याद नहीं रहता क्योंकि इसकी जिम्मेवारी चलित फोन ने ले ली है और जब किसी कारणवश उसकी यादाश्त लुप्त हो जाती है तो कैसी परिस्थिति सामने आती है वही बताने जा रहा हूँ।                  

अभी दो दिन पहले पंजाब निवासी मेरे मामाजी ने अपनी बेटी के पास नार्वे जाने की खबर मुझे दी। उड़ान सुबह पांच बजे की थी। कुछ समय मेरे साथ बिताने के लिए वे अपने पुत्र के साथ एक दिन पहले दिल्ली आ गए। मैं उन्हें लेने नई दिल्ली स्टेशन गया था, पर कुछ हुआ और उनका फोन लगना बंद हो गया, स्थिति अपंगता सी हो गयी। घर फोन कर उनसे बात करने को कहा, वह फोन भी ना लगे ! फिर बेटे राम को कॉन्टेक्ट करने को कहा, फिर किसी तरह संचार विभाग की मेहरबानी से संपर्क हुआ और उन्हें ले मैं घर पहुंचा। 

सुबह की फ्लाइट के लिए रात दो बजे प्रवेश की हिदायत दी गयी थी। डेढ़ बजे रात 'कैब' का इंतजाम कर रवानगी करवा दी गयी।  उनके जाने के बाद शयन-शय्या पर पहुंचा ही था कि कुछ देर के लिए बिजली गायब हो गयी साथ ही कॉर्ड-लेस भी सेंस-लेस हो गया। बिजली आने पर कैब चालाक का फोन मिला कि आपका फोन नहीं लग रहा था इधर मेरे नेट बंद होने की वजह से मेरा जी.पी.एस. काम नहीं कर रहा है ! अब आप इंतजार करेंगे या
गाडी छोड़ना चाहेंगे ? मेरे पूछने पर कि क्या उसे रास्ता नहीं पता ? तो उसने बताया कि वह गाजियाबाद में काम करता है इधर के मार्गों की उसे जानकारी नहीं है। मैंने उसे धौला कुआं का रास्ता बताया तो उसने अपनी पोजीशन पंखा रोड की बताई क्योंकि "उसकी गाइड" ने बंद होने के पहले द्वारका का रास्ता सुझाया था। कार सवार दोनों रास्ते से अंजान, रात के दो बजे कोई कुत्ता तक सड़क पर नजर नहीं आ रहा था, नाहीं कोई पुलिस बूथ, समय निकलता जा रहा था। ऐसे में मुझे यही सूझा कि गाडी निकाल खुद ही चला जाए "रेस्क्यू आप्रेशन" पर। जल्दी-जल्दी चालाक को जहां है वहीँ रुकने को कहा और रात्रि-विहार पर निकला ही था कि उसका फोन आ गया कि नेट शुरू हो गया है। सुन कर सर से तनाव दूर हुआ राहत की सांस ली और वापस घर आ बिस्तर पर जा गिरा। तीन बजते-बजते उन लोगों के पोर्ट पहुँच जाने की खबर भी मिल गयी। तब सोना हो पाया।

बात छोटी सी ही थी यह भी कहा जा सकता है कि आधुनिक टेक्निक के कारण ही बात बन सकी पर यह घटना हमारी, दिन पर दिन  मशीनों पर निर्भर होती जाती, जिंदगी को भविष्य का आइना भी दिखा रही है !!
#हिन्दी_ब्लागिंग   

14 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (22-08-2017) को "सभ्यता पर ज़ुल्म ढाती है सुरा" (चर्चा अंक 2704) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (22-08-2017) को "सभ्यता पर ज़ुल्म ढाती है सुरा" (चर्चा अंक 2704) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

धन्यवाद शास्त्री जी

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन उस्ताद बिस्मिला खां और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

हर्षवर्धन जी आपका व ब्लॉग बुलेटिन का हार्दिक धन्यवाद

iBlogger ने कहा…

नाम वही, काम वही लेकिन हमारा पता बदल गया है। आदरणीय ब्लॉगर आपने अपने ब्लॉग पर iBlogger का सूची प्रदर्शक लगाया हुआ है कृपया उसे यहां दिए गये लिंक पर जाकर नया कोड लगा लें ताकि आप हमारे साथ जुड़ें रहे।
इस लिंक पर जाएं :::::
http://www.iblogger.prachidigital.in/p/multi-topical-blogs.html

Anita ने कहा…

सोचने पर मजबूर करती पोस्ट

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

सुचना के लिए धन्यवाद

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

अनिता जी,
स्वागत है, सदा

vibha rani Shrivastava ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 26 अगस्त 2017 को लिंक की जाएगी ....
http://halchalwith5links.blogspot.in
पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!


गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

विभा जी, आता जरुर बाबे के चक्कर में पन्चकुला में फसा हुआ हूँ 😃

sweta sinha ने कहा…

सच में ऐसी ही एक घटना मेरे साथ भी हो चुकी है,विचारणीय लेखन आपका गगन जी।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

धन्यवाद, श्वेता जी

Dr.Brijesh Gupta ने कहा…

हरी ॐ प्रभु...!!
सभी मित्रो को नमस्कार....!!
अलग अलग लोगो की अलग अलग टिप्पणियॉ देख कर अपना अनुभव बताने की इच्छा हुई है सो लिख रहा हूँ......!!
आपको जो जानकारी मिली जीस बिजली के तेल के सम्बन्ध में ठीक है लेकिन अधूरी है....वास्तव में बिजली का तेल वो नही होता जिसे पुराने ट्रांसफॉर्मरों से निकाला जाता है बल्कि चिकित्सकीय प्रयोगशालाओ और औषधि निर्माणशालाओं में पूरी तरह से वैज्ञानिक विधियों द्वारा तेल विशेष में निर्धारित वोल्टेज का करन्ट एक निर्धारित समयावधि के लिए पास किया जाता है जिससे तेल में मेडिसिनल प्रोपर्टीज डेवलप हो जाती है....इस तेल को और अधिक प्रभाव कारी बनाने हेतु इसमें कुछ आयुर्वेदिक औषधियों का समावेश भी किया जाता है जिससे इस तेल में कुछ विशेष औषधीय गुण आ जाते है जैसे दर्द निवारण,घाव भरने, त्वचा के पोषक गुण,रंग निखारने,झुर्रियां मिटाने वाले आदि..!
जबकि ट्रांसफॉर्मर आयल विशेष प्रकार के खनिज तेल हैं जो की ल्यूब्रिकेंट और कूलिंग के काम आते ना की दर्द निवारक या अन्य औषधीय प्रयोग के.....हां लेकिन उच्च वोल्टेज के करन्ट को लगातार लम्बे समय तक उसमे से पास होने की वजह से उसमे हो सकता है की दर्द निवारक क्षमता आ गयी हो जिसकी वजह से आपके मित्र को दर्द में राहत मिली हो.....लेकिन ये तेल चिकित्सा कार्य के लिए विश्वसनीय नही हो सकता....ऐसा मेरा मत है...!!
मैं अपने चिकित्सकीय व्यवहार में कई वर्षो से इस तेल का प्रयोग मरीजो पर करता हूँ वह भी तब जब और किसी दवाई का पूरा प्रभाव नही हो पाता तब.....जोड़ो के दर्दों में तो कई रोगियो में घुटना बदलना की कवायदें शुरू हो चुकी थी उस समय हमने इसे मालिश के लिए दिया और लोगों को खूब आराम हुआ है.....यदि आप को या किसी भी मित्र को विश्वसनीय चिकित्सकीय गुणों से भरपूर बिजली का तेल चाहिए तो मेरे नम्बर पर संपर्क कर सकते है.....+91 93181 98899, +91 93181 90467.
Email: drguptaonline@gmail.com, ashrmhomoeocare@gmail.com

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