गुरुवार, 26 दिसंबर 2013

पति पत्नी और घोड़ा "आप" पर लागू थोडा-थोडा


ठीक यही हाल आज केजरीवाल और उनके दल का है। लोग ताक लगाए बैठे रहते हैं कि ये बंदा कुछ भी करे हमें "कमेंट" करना ही है। अब देखना यह है कि कहीं तानों से घबड़ा कर पति-पत्नी घोड़े को ही तो नहीं सर पर उठा लेते :-)  

आज दिल्ली में केजरीवाल की हालत और उन पर होते शब्द बाणों के प्रहार से एक पुरानी कहानी याद आ रही है।  
एक बार एक व्यक्ति अपनी पत्नी और अपने घोड़े के साथ भ्रमण पर निकलता है। घोड़े के साथ दोनों पैदल चल रहे थे।  उन्हें देख लोग हंसने लगे , देखो मूर्खों को साथ में घोड़ा है फिर भी पैदल चल रहे हैं। ऐसा सुन उस व्यक्ति ने अपनी पत्नी को घोड़े पर बैठा दिया और खुद साथ-साथ चलने लगा. कुछ देर बाद वे लोग एक गांव से गुजरे तो वहाँ के लोग उसकी पत्नी पर ताना मारने लगे कि देखो पति बेचारा पैदल चल रहा है और ये महारानी घोड़े पर सवार है।  ऐसा सुन गांव के बाहर आ पति घोड़े पर बैठ जाता है और पत्नी घोड़े की रास थाम पैदल चलने लगती है।  कुछ दूरी पर उन्हें  महिलाओं का झुंड मिलता है जो उन्हें देख कर गुस्से में आ पति को फटकारने लगता है कि देखो कितना निर्दयी पति है खुद तो घोड़े पर बैठा है और बेचारी पत्नी को पैदल घसीट रहा है। धिक्कार है ऐसे व्यक्ति पर।  
इतना सुनते ही पति ने पत्नी को भी घोड़े पर बैठा लिया। पर क्या दुनिया में सब को खुश रखा जा सकता है ? अभी कुछ ही दूर गए थे कि कुछ लोगों ने इन्हें घेर लिया और डांटते हुए बोले कि क्या तुम मे ज़रा सी भी दया-ममता नहीं है। एक निरीह जानवर पर दोनों जने लदे हुए हो शर्म नहीं आती ?  

ठीक यही हाल आज केजरीवाल और उनके दल का है। लोग ताक लगाए बैठे रहते हैं कि ये बंदा कुछ भी करे हमें "कमेंट" करना ही है। अब देखना यह है कि कहीं तानों से घबड़ा कर पति-पत्नी घोड़े को ही तो नहीं सर पर उठा लेते :-) 

4 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (27-12-13) को "जवानी में थकने लगी जिन्दगी है" (चर्चा मंच : अंक-1474) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बिलकुल सही उदाहरण दिया आपने !सबको खुश नहीं कर सकते और यहाँ तो सांप नाथ और नाग नाथ फेन फैलाये बैठे हैं|आप को अपने लक्ष पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए |
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ब्लॉग - चिठ्ठा ने कहा…

आपकी इस ब्लॉग-प्रस्तुति को हिंदी ब्लॉगजगत की सर्वश्रेष्ठ कड़ियाँ (26 दिसंबर, 2013) में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,,सादर …. आभार।।

कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

समय के साथ ये कैसा सच सामने आया, जिम्मेदारियों से भागने में ही दिलो-दिमाग लगाया