गुरुवार, 20 जून 2013

हमारे शरीर के कुछ रोचक तथ्य

हमारा शरीर इस दुनिया का सबसे बड़ा अजूबा है. इसका एक-एक अंग अपने आप में एक मिसाल  है. अपनी बनावट, अपनी कार्यक्षमता, अपनी जटिलता के चलते यह दुनिया की दसियों मशीनों पर भारी पड़ता है. इंसान ने चाहे  आसमान की ऊंचाईयां छू ली हों, या सागर की अतल गहराईयाँ नाप ली हों, पर मानव शरीर के कई रहस्य अभी भी अनसुलझे ही हैं। अपना शरीर होते हुए भी हम इसके बारे में बहुत कुछ नहीं जानते.
आईए इसके कुछ रोचक तथ्यों का जायजा लेते हैं।     

# हमारा दिमाग अभी भी वैज्ञानिकों के लिए एक अबूझ पहेली है.  

# दस वाट के बल्ब की ऊर्जा के बराबर शक्ति प्रदान करने वाले हमारे  दिमाग से भेजे गए संदेशों की गति 170 मील प्रति घंटे होती है.

# अक्सर सुबह को काम के लिए ज्यादा उपयुक्त समझा जाता है पर दिमाग रात को ज्यादा एक्टिव होता है. 

# हमारी कलाई से कोहनी की लम्बाई हमारे पैर के बराबर होती है.

# यदि दोनों हाथों को फैलाया जाए तो यह शरीर की लम्बाई के बराबर की लम्बाई होगी.

# चौबीस घंटों में हमारा दिल करीब एक लाख बार धड़कता है. जो पूरे जीवन में करीब तीस करोड़ का आंकड़ा पार करते हुए 400 मिलियन लीटर खून पंप कर शरीर को गतिमान बनाए रखता है.

# जन्म के समय हमारे शरीर में 300 हड्डियां होती हैं जो समय के साथ जुड़ कर 206 रह जाती हैं.

# हमारे सर में ही 22 हड्डियां होती हैं।      

# औसतन हम दिन भर में 23000 बार सांस लेकर करीब 0.6 ग्राम कार्बन डाई आक्साइड का उत्सर्जन करते हैं।

# औसतन हर आदमी करीब एक मिनट तक सांस रोक सकता है. जबकि इसका कीर्तीमान 21 मिनट 29 सेकेण्ड का है.

# हम एक दिन में करीब 5000 शब्द बोल लेते हैं।

# यदि शरीर में एक प्रतिशत पानी की कमी होती है तो हम प्यास महसूस करने लगते हैं।

# आश्चर्य की बात है की आँखें खुली रख कर छींका नहीं जा सकता.

# विश्वास करेंगे कि किसी को जम्हाई लेते देख 55 प्रतिशत लोगों को पांच मिनट में जम्हाई आ जाती  है.

# कोई भी इंसान बिना खाए एक महीना रह सकता है पर बिना पानी पिए एक सप्ताह निकालना भी मुश्किल हो जाता है.

# पेट में बनने वाला एसिड इतना तेज होता है की वह रेजर ब्लेड को भी गला सकता है। इसीलिए पेट के अन्दर का अस्तर हर तीसरे-चौथे दिन बदल जाता है. 

# हम अपने पूरे जीवन काल में करीब 75000 लीटर पानी पी जाते हैं।

# आम इंसान के सर पर करीब एक लाख बाल होते हैं। चेहरे के बाल शरीर के अन्य हिस्सों के बालों से ज्यादा तेजी से बढ़ते हैं। 

#  पुरुषों तथा महिलाओं के 70 से 90 बाल रोज झड जाते हैं।

# पुरुष दिन भर में करीब 15000 बार आँखें झपकाते हैं जबकि महिलाएं इसकी दुगनी बार।

# अभी तक खोजे गए 118 पदार्थों में से 24 हमारे शरीर में भी पाए जाते हैं।

# हमारे मुंह में रोज करीब एक लीटर लार का निर्माण होता है और पूरे जीवन काल में दस हजार गैलन का।

# सुनने के मामले में हम कई जीव-जन्तुओं से पीछे हैं।

# हमारी जीभ पर 9000 तन्तु होते हैं जिससे वह मुख्य स्वादों को तुरंत पहचान जाती है. जिसमें नमकीन तथा मीठे को जीभ की नोक से, तीखे या चरपरे को जीभ के पिछले हिस्से से, खट्टे को जीभ के दोनों किनारों से तथा मिले-जुले स्वाद को जीभ के बीच वाले हिस्से से महसूस किया जाता है. पर जब तक मुंह की लार खाने में नहीं मिल जाती  तक स्वाद की अनुभूति  नहीं होती.       

# हमारा लीवर हमारे शरीर के भीतर का सबसे बड़ा अंग है जबकि हमारी खाल शरीर का सबसे बड़ा हिस्सा. जिस पर करीब 640000 संवेदनशील तंतु होते हैं।

# शरीर में उठने वाली हिचकी पांच मिनट तक आ सकती है. इससे ज्यादा देर तक रहने से यह परेशानी का सबब बन सकती है.

# हमारे हाथ के नाखून पैरों की बनिस्पत चार गुना तेजी से बढ़ते हैं। उसमे भी हाथ की बीच वाली ऊंगली के नाखूनों की बढ़त सब से तेज होती है.

# पुराने समय में पाचन का अभिन्न अंग अपेंडिक्स का, आज के मानव के शरीर में कोई  उपयोग नहीं है.

# अभी करीब 13 प्रतिशत लोग वामहस्त हैं.

# नवजात शिशु के सर का भार उसके  कुल  भार का एक चौथाई होता है.

# हमारे शरीर की हड्डियों का रंग सफेद न हो कर कुछ भूरापन लिए होता है.

# अंगूठे की छाप की तरह हर इंसान की जीभ की  भी अलग-अलग छाप होती है.

# यदि इंसान के सारे डी एन ए को फैलाया जाए तो उसकी लम्बाई चंद्रमा की दूरी से 6000 गुना होगी.

# हमारे शरीर के भार का दो-तिहाई भार पानी का है. जिसमें खून का 92 प्रतिशत पानी, मश्तिष्क का 75 प्रतिशत पानी और मांसपेशियों का 75 प्रतिशत पानी सम्मिलित होता है.

# जन्म से मृत्यु तक हमारी आँखों का आकार एक जैसा ही रहता है. पर उम्र बढ़ने के साथ-साथ इसका लेंस मोटा होता जाता है. इसीलिए अमुमन चालीस की उम्र के बाद चश्मे की जरूरत पड जाती है.

# आँख की रेटिना में करीब  125 मिलियन रॉड और 7 मिलियन कोन होते हैं। रॉड से छाया और कम रोशनी में देखने में मदद मिलती है जबकि कोन तेज रौशनी में देखने और रंगों की पहचान करने में सहायक होते हैं.   धारणा के विपरीत हम आँखों से नहीं बल्कि अपने दिमाग से देखते हैं आँखें दरअसल कैमरे का काम करती हैं.

यह तो कुछ ही तथ्य हैं, बाकी यह शरीर ब्रह्मांड की तरह दुरूह है. जिसका पार पाना आने वाले भविष्य में तो मुश्किल ही है.


2 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (21-06-2013) के "उसकी बात वह ही जाने" (शुक्रवारीय चर्चा मंचःअंक-1282) पर भी होगी!
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रविकर जी अभी व्यस्त हैं, इसलिए शुक्रवार की चर्चा मैंने ही लगाई है।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

ईश्वर ने बेजोड़ मशीन बनायी है।