मंगलवार, 25 जून 2013

यह बांए हाथ का खेल नहीं है

बाएं हाथ के लिए कैंची 
हमने अपने सगे-संबंधियों, जाने-पहचाने, अड़ोस-पड़ोस में या मशहूर बहुत सारे लोगों के बारे में पढा, सुना या देखा होगा कि वे लोग अपना ज्यादातर काम अपने बायें हाथ से निपटाते हैं। इसे हमने प्राकृतिक तौर पर ही लिया भी होगा। पर कभी भी इनकी मुश्किलों पर ना तो ध्यान ही दिया  होगा और न ही कभी सोचा होगा। यदि आप दाहिने हाथ से काम करने वाले हैं तो एक बहुत छोटा सा काम कर देखिये। एक कैंची लीजिए और अपने बायें हाथ से उससे कुछ भी, कागज, कपड़ा या अपनी मूछें, कतरने की कोशिश कर देखिये क्या होता है। फिर सोचिए बाएं हाथ से काम करने वालों की परेशानी को। हर चीज चाहे वह कैंची हो या स्क्रू कसना हो, कैमरे के बटन हों या कमीज के सब दाहिने हात को ध्यान में रख कर ही तो बनते हैं। कभी-कभी तो भारी मशीनें बांए हाथ वालों के लिए जान जोखिम की वस्तु बन जाती है जब उसे "हैंडल" करने में कठिनाई होती है। यह तो वाम-हस्त वालों की कुशलता होती है जो ऐसी परिस्थितियों को जल्द अपने अनुसार ढाल लेते हैं। अपनी इसी काबलियत से कभी-कभी तो खेलों में बांए हाथ वाले खिलाडी दाएं हाथ वालों पर भारी पड जाते हैं। क्रिकेट इसका बढिया उदाहरण है। अब तो बांए हाथ से काम करने वालों के क्लब, जो 1990 में स्थापित हुआ था, ने  1992 से 13 अगस्त को  "International Left-Handers Day  के रूप में मनाना शुरू कर दिया है.      

खब्बू की-बोर्ड 
पहले बांए हाथ के लेखकों को लिखने में जो  कुछ दिक्कतें आती थीं वह भी अब  आधुनिक तकनीकी की इजाद QWERTY कम्प्यूटर की-बोर्ड से दूर हो गयीं हैं। जिसमे करीब 56 प्रतिशत टाइपिंग बांए हाथ से की जाती है. अंग्रेजी के 3000 शब्दों की तुलना में सिर्फ 300 शब्द ही दाएं हाथ से टाइप किए जाते हैं. दुनिया में ज्यादातर लोग अपने दायें हाथ से काम करते हैं। इसीलिये उन्हीं को मद्देनजर रख औजार या मशीनेबनाने वाली कंपनियां अपने उत्पाद बनाती हैं। पर इनकी मुसीबतों और तादाद को देखते हुए आस्ट्रेलिया के एक व्यवसायी ने बायें हाथ से काम करने वालों की मुश्किलों को दूर करने के लिये अपने उत्पाद 'लेफ्ट हैंडेड प्रोडक्टस' के नाम से बनाने शुरु कर दिये हैं। एक पन्थ दो काज, अपना और दूसरों का भला एक साथ।
यह तो विज्ञान ने साबित कर दिया कि दोनों तरह के लोगों में कोई फर्क नहीं होता नहीं तो सदियों से बायें हाथ से काम करने वालों को अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता था। एक समय था जब इंग्लैण्ड में बाएं हाथ से काम करने वालों को "नाइट" की उपाधी नहीं  दी जाती थी। क्योंकि ऐसा समझा जाता था कि  उनमे शैतान  का अंश है। यहां तक कि इन्हें भूत-प्रेत की संज्ञा देकर मार डालने तक की कोशिशें भी होती रहती थीं। इसी डर से बहुत से मां-बाप अपने बायें हाथ का उपयोग करने वाले बच्चों को जबरन राइट हैंडेड बनाने की कोशिश किया करते थे। पति अपनी बायें हाथ से काम करने वाली पत्नि को त्यागने में गुरेज नहीं करते थे। मार-पीट, प्रताड़ना तो आम बात थी। आज भी रूस, जापान, जरमनी और यहां तक की अपने देश भारत में भी कहीं-कहीं बायें हाथ का इस्तेमाल अशुभ माना जाता है। 

वाम-हस्त के लिए घड़ी 
पर अब बाएं हाथ से काम करने वालों के लिए खुशखबरी है की कुछ सालों पहले तक दुनिया की आबादी में  उनका 11 प्रतिशत अब बढ़ कर 13 प्रतिशत हो गया है। और फिर पहले की एक मिथ्या धारणा का भी अंत हो गया है कि दाहिने हाथ से काम करने वालों की जिन्दगी लम्बी होती है। अब तो खोजों से यह भी पता चला है की जानवर भी दाएं या बाएं  हाथ वाले होते हैं, जिसमे वाम-हस्तीय  ध्रुवीय भालू सबसे अच्छा उदाहरण है।  सुन कर बहुत अजीब लगता है कि कभी योरोप में लोग सिर्फ बांयी ओर  ही चलना पसंद करते थे जिससे किसी झगड़े के दौरान दायीं ओर तुरंत वार किया जा
सके तथा महलों में घुमावदार सीढ़ियां  भी दाहिने हाथ से काम करने वालों को ध्यान में रख कर बनाई जाती थीं।

वह तो फ्रांस का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि उसने ऐसी प्रथा को तोडा। आज संसार में ज्यादातर गाड़ियां दाहिने हाथ वाली होती हैं फिर भी करीब 65 देशों में अभी भी "लेफ्ट हैण्ड ड्राइव" लागू है। फ्रांस शायद अकेला देश है जहां रेल गाड़ियां तो बायीं तरफ चलती  हैं पर हवाई जहाज और नौकाओं को दाहिने हाथ की ओर से चलाया जाता है।

यह आम धारणा है कि दिमाग का दाहिने तरफ का हिस्सा शरीर के बांए हिस्से को जो संगीत, भावनाओं और अनुसंधान इत्यादि के लिए जिम्मेदार होता है, और बांयीं तरफ़ का हिस्सा शरीर के दाहिने हिस्से को कंट्रोल करता है जो गणित, विज्ञान, भाषा इत्यादि के लिए जिम्मेदार होता है। पर ऐसा क्यूं है इसका उत्तर मिलना अभी बाकी है।  


   

6 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

शरीर भी बायें दायें में भेद कर देता है।

सरिता भाटिया ने कहा…

नमस्कार
आपकी यह रचना कल बुधवार (26-06-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधार कर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य रखें |
सादर
सरिता भाटिया

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

सरिता जी, हार्दिक धन्यवाद।

मदन मोहन सक्सेना ने कहा…

बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!!शुभकामनायें.
आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/
http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

Sunil Gupta ने कहा…

मुझे चाकू कैंची की बोर्ड माउस हॉकी हाँथ घड़ी मोबाइल दरवाज़े के हैंडल उसकी कुंडी अदि ऐसी बहुत सारी चीज़े हैं जिनसे दिक्कत होती है। आज लेफ्ट हैण्ड वालों के लिए बना की बोर्ड देखकर दिल को तसल्ली हो गयी। उस की बोर्ड में अपना पन लगा जैसे वो हमारे लिए ही बनाया गया हो। ये बात सिर्फ एक लेफ्ट हैण्डर ही समझ सकता है।

Sunil Gupta ने कहा…

मुझे चाकू कैंची की बोर्ड माउस हॉकी हाँथ घड़ी मोबाइल दरवाज़े के हैंडल उसकी कुंडी अदि ऐसी बहुत सारी चीज़े हैं जिनसे दिक्कत होती है। आज लेफ्ट हैण्ड वालों के लिए बना की बोर्ड देखकर दिल को तसल्ली हो गयी। उस की बोर्ड में अपना पन लगा जैसे वो हमारे लिए ही बनाया गया हो। ये बात सिर्फ एक लेफ्ट हैण्डर ही समझ सकता है।

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