शनिवार, 26 मई 2012

प्रभू भी लाचार हैं।

 पर  अब तक  यह पता नहीं चल पाया है कि भगवान के रोने की खबर सर्वोच्च न्यायालय तक कैसे और किसने पहुंचाई।   खबरचियों   की  टीमें   इस बात का पता लगाने पूरी तौर से जुटि हुई है। 

खबर विश्वसनीय सूत्रों से ही मिली थी, पर विश्वास नही हो पाया था कि ऐसा भी हो सकता है। खबर आपके सामने है और फ़ैसला आपके हाथ में।

ऐसा होता तो पहले भी था। धरती की खोज-खबरों को, दुख-सुख को ऋषि-मुनि प्रभू तक पहुंचाते रहते थे। तब आवागमन निर्विरोध हुआ करता था। पर फिर कुछ महत्वाकांक्षी लोग मर्यादा का अतिक्रमण करने लगे तो इस व्यवस्था में कटौती कर दी गयी। आम लोगों में इसके बंद हो जाने की खबर फैला दी गयी पर सच तो यह है कि यह पूर्णतया बंद नहीं हुई थी। प्रभू अपने बंदों को कैसे  भूल सकते थे। विज्ञान की तरक्की के कारण इसका पता साईंस दानों को था ही और अब इसका सार्वजनिक तौर पर भी खुलासा कर दिया गया है कि ज्येष्ठ के महीने मे मेघा नक्षत्र के उदय होने के पूर्व एक मुहूर्त बनता है जिसमे प्रभू का दरबार धरती वासियों के लिए कुछ देर के लिये खोल दिया जाता है।  

ऐसा पता चलते ही अफरा-तफरी मच गयी। हर देश का हर व्यक्ति अपना दुखडा सुनाने उपर जाने को लालायित हो उठा। हडकंप को देखते हुए सारे राष्ट्रों की आपात-कालीन बैठक बुलवाई गयी जिसमें घटों बहस के बाद फैसला हुआ कि लाटरी के जरिए एक बार में तीन देशों के तीन ही प्रतिनिधियों को उपर जाने का मौका दिया जाएगा।

सो इस बार भारत, अमेरीका तथा जापान के तीन नुमांईदों को उपर जाने का वीसा मिला था। तीनों को एक जैसा ही सवाल पूछने की इजाजत थी। पहले अमेरीकन ने पूछा कि मेरे देश से भ्रष्टाचार कब खत्म होगा, प्रभू ने जवाब दिया कि सौ साल लगेंगे। अमेरीकन की आंखों मे, अपने देश का हाल सोच, आंसू आ गये। फिर यही सवाल जापानी ने भी किया उसको उत्तर मिला कि अभी कम से कम पचास साल और लग जाएंगें तुम्हारे देश की हालत सुधरते। जापानी भी उदास हो गया कि उसके देश को आदर्श बनने मे अभी समय लगेगा। अंत मे भारतवासी ने जब वही सवाल पूछा तो पहले तो प्रभू चुप रहे फिर फ़ूट-फ़ूट कर रो पड़े। 

अब आज के जमाने मे कौन ऐसी बात पर विश्वास करता है। पर जब सर्वोच्च  न्यायालय की ओर से कहा गया कि इस देश को भगवान भी नही बचा सकते, तो कुछ लोगों को इस खबर में सच्चाई नज़र आई। पर  अब तक  यह पता नहीं चल पाया है कि भगवान के रोने की खबर सर्वोच्च न्यायालय तक कैसे और किसने पहुंचाई।   खबरचियों   की  टीमें   इस बात का पता लगाने पूरी तौर से जुटि हुई है। 

7 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

यह खबर पहुँचना भारत में ही संभव था।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

कभी कभी तो तरस आता है प्रभु पर ... पर क्या करें हम भी तो सिर्फ इंसान ही है ... कर भी क्या सकते है ...


इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - माँ की सलाह याद रखना या फिर यह ब्लॉग बुलेटिन पढ़ लेना

Shanti Garg ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन रचना....
मेरे ब्लॉग

विचार बोध
पर आपका हार्दिक स्वागत है।

दिलीप ने कहा…

badhiya prastuti...

आशा जोगळेकर ने कहा…

जोरदार । प्रभु के रोने की खबर भी लीक होती है यहां ।