शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

आज हमें बधाई दे ही दीजिए

आज हमारे परिणय बंधन की सैंतिसवीं वर्ष-गाँठ है

आज वह दिन है जिसके लिए कुंवारे दोस्त-मित्र लड्डू का सहारा ले कुछ कुछ कहते रहते हैं, जबकि मौका मिलते ही वे भी खाने को ही लपकते हैंदेखते-देखते सैंतीस साल निकल गएअभी भी कल की बात लगती हैहालांकि इंसान की फितरत है कि वह किसी बंधन में बंधना नहीं चाहता पर यह बंधन प्रिय भी लगता हैयह अलग बात है कि मनोरंजन के लिए तरह-तरह के "पंच" या कहें कहावतें मशहूर हैं शादी को लेकर, जो ज्यादातर पुरुष को मद्देनजर रख बनी या बनाई गयीं हैंपर दूसरा पक्ष तो ज्यादा जोखिम उठाता है, नई जगह, नए बन्दों को लेकर

यह कहने की बात नहीं है सभी जानते हैं कि जिन्दगी उतार-चढाव भरी होती है, तो उन उतरावों में मेरी जीवन-संगिनी, कदमजी ने जो मेरा साथ दिया उसके लिए आज पहली बार सार्वजनिक रूप से मैं उनका शुक्रगुजार हूँयह उन्हीं की हिम्मत, हौसला और जिजीविषा थी कि आज भी हम खुश रहते हैं, हर हाल और परिस्थिति में

इसीलिए आप-सब से बधाई अपेक्षित है :-)

11 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

badhai ho, bahut bahut..

"जाटदेवता" संदीप पवाँर ने कहा…

बधाई हो 37 साल

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

बधाईयां जी बधाईयां, आज से सैंतिस साल पहले पंचों की राय मान कर ठीक ही किया। :)

Always Unlucky ने कहा…

बहोत बहोत बधाई हो आपको, आज की शादी जहा ३७ दिन में ही दम तोड़ देती है वहा आपकी शादी को ३७ साल हो गये, बधाई

From Great talent

वन्दना ने कहा…

37 वीं वैवाहिक वर्षगांठ की हार्दिक बधाइयाँ।

abhay Sharma ने कहा…

Bas yahi dua hai ab to ishwar se ki hume har jeevan me aap hi mile mata pita k roop me.saubhagyashaali hu main jo apke roop me bhagwaan mil gye.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत-बहुत शुभकामनायें।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

ढेरों शुभकामनायें।

उन्मुक्त ने कहा…

ढेर सारी शुभकामनायें।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

बहुत-बहुत बधाई :जीवन सतत सरस सुन्दर बना रहे!