मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

अनजाने में जूते हमारी बिमारी का कारण तो नहीं बन रहे....!

बहुत से लोगों को कहते सुना है कि पता नहीं क्यों हजार उपायों के बावजूद हमारे घर में कोई ना कोई किसी ना किसी व्याधि से पीड़ित ही रहता है। ऐसे लोगों का ध्यान अपनी इस आदत की ओर नहीं जाता कि  जिन जूतों इत्यादि को पहन कर वे दिन भर बाहर घूमते हैं उनमें सड़क की तरह-तरह की गंदगी, कीटाणु, विषैले पदार्थ चिपक जाते हैं जो घर के बाहर जूते ना उतारने से घर के अंदर तक पहुँच वहाँ के वातावरण में घुल-मिल कर उनका कितना नुक्सान करते हैं........

#हिन्दी_ब्लागिंग 
कुछ दिनों पहले मेरे एक बचपन के मित्र, जिनका व्यवसाय विदेशों तक में फैला हुआ है, घर आए। पर कमरे में प्रवेश करने के पहले, मेरे बहुत मना करने के बावजूद, उन्होंने अपने जूते द्वार उतार दिए। यह बचपन की ही सीख का नतीजा था कि घर चाहे किसी का भी हो उसे साफ़-सुथरा रखना चाहिए। ऐसे घर में ही बरकत रहती है। यह बात वे कभी भी नहीं भूलते, आदत बना लिया है इस को और इसका फल उनकी जीवन शैली को देख कर समझा जा सकता है।

भले ही आज की कीमती जूते-चप्पल पहनने वाली पीढ़ी इस बात को ना माने या समझे, पर यह साइंटिफिक फैक्ट है कि जूते-चप्पल से संबंधित कुछ बातों का ध्यान न रखने पर बहुत सारी अनचाही समस्याओं से रूबरू
होना पड़ता है। यदि वास्तु या ज्योतिष को किनारे कर दिया जाए तो भी यह तो सामान्य ज्ञान की बात है कि जिन जूतों इत्यादि को आप पहन कर दिन भर बाहर घूमते हैं उनमें सड़क की तरह-तरह की गंदगी, कीटाणु, विषैले पदार्थ चिपक जाते हैं जो यदि घर के बाहर जूते ना उतारे जाएं तो घर के अंदर तक पहुँच वहाँ के वातावरण में घुल-मिल कर हमारा नुक्सान ही करते हैं। बहुत से लोगों को कहते सुना है कि पता नहीं क्यों हजार उपायों के बावजूद हमारे घर में कोई ना कोई किसी ना किसी व्याधि से पीड़ित ही रहता है। ऐसे लोगों का ध्यान अपनी इस आदत की ओर नहीं जाता। 

होना तो यह चाहिए कि, घर का हर सदस्य बाहर से आते समय घर के दरवाजे पर ही जूते-चप्पल, उतार दे। इससे बाहरी गंदगी, धूल, कीटाणु इत्यादि घर में नहीं आते। घर साफ-सुथरा रहता है। मुख्य द्वार पर एक पांव-पोछ जरूर हो,ना चाहिए, जिससे कम से कम जूते कुछ तो साफ़ हो सकें। शास्त्रों के अनुसार घर में नंगे पैर ही रहना चाहिए क्योंकि घर में कई स्थान देवी-देवताओं से संबंधित होते हैं उनके आसपास जूते-चप्पल लेकर जाना शुभ नहीं माना जाता है, पर यदि बिना कुछ पैरों में पहने रहा ही ना जा सके, तो घर के लिए एक अलग स्लीपर रख लें। जूते रखने का एक स्थान निश्चित करें, जहां परिवार के सभी सदस्य सलीके से अपने जूते
पहनें और उतारें। इसके लिए दरवाजे के पास एक शू-रैक रखी जा सकती है। पर ध्यान रहे वह ईशान-कोण में नहीं होनी  चाहिए। वैसे तो यह हमारी काफी प्राचीन  परंपरा रही है पर आजकल के फैशन ने उसे धीरे-धीरे हाशिए पर ला धरा है। द्वार पर जूते उतरना आधुनिकता नहीं मानी जाती। पर उसके परिणाम तो भुगतने ही  पड़ते हैं। 


ज्योतिष के अनुसार शनि को पैरों का कारक माना गया है जिन लोगों के घर में जूते इधर-उधर बिखरे रहते हैं, वहां शनि की अशुभता का प्रभाव रहता है। इसलिए पैरों से संबंध रखने वाली किसी भी वस्तु को साफ़-सुथरा
और यथाक्रम रखना चाहिए। टूटे-फूटे जूते-चप्पल नहीं पहनने चाहिए इससे दुर्भाग्य बढ़ता है। साफ-सुथरे और सुंदर फुटवियर पहनने से सौभाग्य सदा बना रहता है। जूते-चप्पल पहनकर कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए। इससे भी दुर्भाग्य में वृद्धि होती है। 

घर का सबसे शुद्ध व साफ़ हिस्सा रसोई का होता है। पहले यहां की बनावट कुछ और होती थी उस समय तो यहां नंगे पैर ही प्रवेश किया जाता था। पर आजकल समय के साथ यहां भी बदलाव आ गया है, फिर भी शुद्धता का ध्यान रखते हुए इसके लिए अलग स्लीपर की व्यवस्था जरूर करनी चाहिए। बाथरूम और रसोई के स्लीपरों का अलग-अलग होना हर लिहाज से जरूरी है। रसोई व्यवस्थित, शुद्ध और साफ-सुथरी होनी चाहिए। ऐसी रसोई में देवी-देवता अपना स्थाई वास बना लेते हैं जिससे घर में कभी भी निरोगिता, धन, सकारात्मकता और सुख-समृद्धि की कमी नहीं रहती। 
घर जितना शुद्ध रहेगा उतना ही घर में लक्ष्मी का वास बना रहेगा।

वास्तु शास्त्र में जूतों से संबंधित ऐसी बातें बताई गई है जिनका पालन करने से घर में प्रवेश होने वाली नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। उपयोग में आने वाले जूते-चप्पल को एक
व्यवस्थित ढंग से, उचित स्थान पर हमेशा पश्चिम की ओर ही रखना चाहिए। जो जूते चप्पल काम के न हों उन्हें घर में ना रखें उन्हें किसी गरीब को दे दें। ऐसा करने से शनि देव का प्रकोप भी कम होता है । पुराने जूते चप्पल रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और आपके घर से समस्याऐं जाने का नाम ही नहीं लेती हैं। परिवार के अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि घर में पूरी तरह साफ-सफाई रहे, गंदगी न हो, धूल-मिट्टी हो। गंदगी के कारण हमारे स्वास्थ्य को तो नुकसान है साथ ही इससे हमारी आर्थिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

6 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (07-02-2017) को "साहित्यकार समागम एवं पुस्तक विमोचन"; चर्चामंच 2872 पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शास्त्री जी,
हार्दिक आभार

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन कवि प्रदीप और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Jyoti Dehliwal ने कहा…

सही कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी जुते चप्पल बाहर ही खोलने चाहिए। सुन्दर प्रस्तुति।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

हर्ष जी,
आपका और ब्लॉग बुलेटिन का हार्दिक धन्यवाद

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

ज्योति जी,
कुछ अलग सा पर आपका सदा स्वागत है

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